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सरकार की नीति और निजी स्कूलों की मजबूरी के बीच फंसा गरीब बच्चों का भविष्य

Thu, 05 Apr 2018 12:29 AM IST
Updated Thu, 05 Apr 2018 12:29 AM IST
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सरकार की नीति और निजी स्कूलों की मजबूरी के बीच फंसा गरीब बच्चों का भविष्य
अमर उजाला ब्यूरो
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जींद। जिन जरूरतमंद बच्चों के अभिभावकों ने 134-ए के तहत प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों के दाखिले की बात सोची है, उनको दाखिले के लिए परेशानी उठानी पड़ सकती है। नियम 134-ए के तहत दाखिलों को लेकर प्रदेश सरकार और निजी स्कूल आमने सामने आ गए हैं। इसका खामियाजा आखिरकार विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को ही भुगतना पड़ेगा। वहीं निजी स्कूलों का कहना है कि पिछले दो साल से 134-ए के तहत कोई बजट अलॉट नहीं किया है। ऐसे में वे इस नियम के तहत विद्यार्थियों को दाखिला नहीं देंगे। सीटों का ब्यौरा नहीं देने के कारण शिक्षा विभाग ने 27 स्कूलों को नोटिस जारी किए हैं, इससे प्राइवेट स्कूल संचालक विरोध में आ गए हैं। स्कूल संचालकों ने साफ कहा है कि जब तक पिछले दो साल की राशि उन्हें नहीं मिलेगी, तब तक वे नए बच्चों को दाखिल नहीं देंगे।
प्रदेश सरकार ने जरूरतमंद बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने के लिए 134-ए नियम लागू किया है। इसके तहत दस प्रतिशत सीटें जरूरतमंद बच्चों के लिए आरक्षित की हैं। जितने स्कूलों में इस योजना के तहत बच्चे पढ़ेंगे, उनकी फीस सरकार द्वारा निजी स्कूलों को देने का प्रावधान है। तीन साल पहले शिक्षा विभाग की तरफ से 16 लाख रुपये प्राइवेट स्कूलों को दिए गए थे। उसके बाद दो साल तक सरकार की तरफ से कोई पैसा प्राइवेट स्कूलों को नहीं मिला। अब प्राइवेट स्कूलों ने नए बच्चों को प्रवेश देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। प्राइवेट स्कूल संचालकों ने कहा कि यदि सरकार पिछले दो वर्ष का बजट प्राइवेट स्कूलों को नहीं देती है तो प्राइवेट स्कूलों में इस योजना के तहत नए बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। सरकार प्राइवेट स्कूल संचालकों व अभिभावकों के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर रही है। इसके विरोध में प्राइवेट स्कूल संचालक सात अप्रैल को प्रदेशभर से संचालक दिल्ली के रामलीला मैदान में जमा होकर इसका विरोध करेंगे। वहीं शिक्षा विभाग द्वारा जिन 27 स्कूलों को सीटों का ब्योरा नहीं देने पर नोटिस जारी किए थे, उन स्कूल संचालकों ने बीईईओ ऑफिस में पहुंचकर सीटों का सही ब्यौरा देने का आश्वासन दिया है। इसके बाद शिक्षा विभाग ने इन स्कूल संचालकों के चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वे सही ब्यौरा नहीं देंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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585 बच्चों ने किए आवेदन
इस वर्ष 134-ए के तहत अब तक 585 बच्चों ने आवेदन किया है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 10 अप्रैल है। 12 अप्रैल को आवेदकों की लिस्ट लगाई जाएगी। 15 अप्रैल को परीक्षा ली जाएगी। 18 अप्रैल को परिणाम घोषित किया जाएगा। 19 अप्रैल को पहली मेरिट लिस्ट लगाई जाएगी और 20 से 25 अप्रैल तक दाखिले होंगे। एक मई को दूसरी मेरिट लिस्ट लगाई जाएगी। दूसरी लिस्ट के मेरिट अनुसार दो से पांच मई तक दाखिले लिए जाएंगे।
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एक भी बच्चे को नहीं देंगे नया प्रवेश
सरकार अभिभावकों व स्कूल संचालकों के टकराव की स्थिति पैदा कर रही है। यदि सरकार को गरीब बच्चों की इतनी ही चिंता है तो दो साल का लगभग 50 लाख रुपये सरकार जारी क्यों नहीं कर रही। वजीर ढांडा ने कहा कि जब तक पिछला बकाया सरकार नहीं देगी, एक भी नए बच्चे को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसके लिए चाहे उन्हें कोई भी आंदोलन क्यों नहीं करना पड़े।
वजीर सिंह ढांडा, प्रधान जींद प्राइवेट स्कूल संघ

मजबूरी में फंसे प्राइवेट स्कूल
सरकार ने पिछले दो वर्ष का बजट जारी नहीं किया है। प्राइवेट स्कूल संचालक बहुत मुश्किल से अपना काम चला रहे हैं। सरकार जब तक प्राइवेट स्कूलों को इन बच्चों की एवज में पैसे नहीं देगी, तब तक एक भी नए बच्चे को दाखिल नहीं दिया जाएगा। प्राइवेट स्कूल संचालक इस कारण कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। इनको उबारने के लिए सरकार को बजट जारी करना चाहिए।
सुभाष श्योराण, निदेशक, इंडस शिक्षण संस्थाएं।

निजी स्कूलों पर होगी कार्रवाई
134-ए के तहत प्राइवेट स्कूलों को गरीब बच्चों को अपने स्कूलों में दाखिले हर हाल में देने होंगे। यदि कोई निजी स्कूल बच्चों को दाखिल देने से मना करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

--परणिता मद्योक, बीईईओ, जींद

मनमानी चला रहे हैं निजी स्कूल
सरकार ने साफ किया है कि दस प्रतिशत सीटों पर नियम 134-ए के तहत गरीब बच्चों को दाखिला दिया जाना है। इनकी फीस का भुगतान सरकार और निजी स्कूलों के बीच की बात है। दाखिला प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि इस पर फैसला होता है तो इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों को काफी परेशानी होगी। ऐसे में जल्द इस पर फैसला होना चाहिए।
सुमन श्योराण, जिलाध्यक्ष दो जमा पांच जनमुद्दे संगठन।
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