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Jhajjar-Bahadurgarh News: 'जंजीरें' का विश्व पुस्तक मेले में हुआ लोकार्पण
Mon, 12 Jan 2026 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 12 Jan 2026 01:47 AM IST
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11jjrp11- राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू महाविद्यालय झज्जर के जनसंचार विभागाध्यक्ष डाॅ. अमित भारद्वाज
झज्जर। नई दिल्ली में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू महाविद्यालय झज्जर के जनसंचार विभागाध्यक्ष डाॅ. अमित भारद्वाज के कहानी संग्रह ''जंजीरें'' का लोकार्पण हुआ। वेरा प्रकाशन जयपुर के स्टाल पर लोकार्पण हुआ।
प्रकाशक और लेखक बनवारी कुमावत राज ने कहा कि जंजीरें मानवीय भावनाओं, संघर्षों और सामाजिक बंधनों की गहन पड़ताल करती है। यह संग्रह न केवल विचारोत्तेजक है अपितु हृदयस्पर्शी भी है।
डॉ. अमित ने कहा कि लेखन केवल शब्दों का खेल नहीं है, यह अनवरत साधना है। यह कथा संग्रह लेखकीय सफर का एक पड़ाव है। ये किसी बड़े दार्शनिक या साहित्यिक उद्देश्य को पूरा नहीं करतीं लेकिन लिखते समय मन ने साथ जरूर दिया है।
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कुछ पात्र जाने-पहचाने लगेंगे, कुछ अजनबी से होकर भी भीतर की गहराइयों को छू जाएंगे। हर लेखक की कोशिश रही है कि वह अपने समय की सच्चाई को ईमानदारी से बिना किसी बनावटीपन के पकड़ सके।
इस अवसर पर शिक्षाविद् संगीता शर्मा, अवनि भारद्वाज, अयन भारद्वाज, रचना और प्रिंस सहित अन्य प्रबुद्ध श्रोतागण उपस्थित रहे। डॉ. अमित की अब तक दस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। दस वर्ष की उम्र में उनकी पहली रचना प्रकाशित हुई।
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प्रकाशक और लेखक बनवारी कुमावत राज ने कहा कि जंजीरें मानवीय भावनाओं, संघर्षों और सामाजिक बंधनों की गहन पड़ताल करती है। यह संग्रह न केवल विचारोत्तेजक है अपितु हृदयस्पर्शी भी है।
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डॉ. अमित ने कहा कि लेखन केवल शब्दों का खेल नहीं है, यह अनवरत साधना है। यह कथा संग्रह लेखकीय सफर का एक पड़ाव है। ये किसी बड़े दार्शनिक या साहित्यिक उद्देश्य को पूरा नहीं करतीं लेकिन लिखते समय मन ने साथ जरूर दिया है।
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कुछ पात्र जाने-पहचाने लगेंगे, कुछ अजनबी से होकर भी भीतर की गहराइयों को छू जाएंगे। हर लेखक की कोशिश रही है कि वह अपने समय की सच्चाई को ईमानदारी से बिना किसी बनावटीपन के पकड़ सके।
इस अवसर पर शिक्षाविद् संगीता शर्मा, अवनि भारद्वाज, अयन भारद्वाज, रचना और प्रिंस सहित अन्य प्रबुद्ध श्रोतागण उपस्थित रहे। डॉ. अमित की अब तक दस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। दस वर्ष की उम्र में उनकी पहली रचना प्रकाशित हुई।