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Jhajjar-Bahadurgarh News: दुराचार पीड़ितों को शीघ्र न्याय के लिए विशेष त्वरित अदालतों के गठन की मांग की
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झज्जर। जिले में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए काम कर रहे गैरसरकारी संगठन एमडीडी ऑफ इंडिया ने दुराचार व यौन शोषण के पीड़ितों को शीघ्रता से न्याय दिलाने के लिए राज्य सरकार से नई विशेष त्वरित अदालतों के गठन की दिशा में तत्काल कदम उठाने की अपील की है।
इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की रिपोर्ट ‘फास्ट ट्रैकिंग जस्टिस : रोल ऑफ फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स इन रिड्यूसिंग केस बैकलॉग्स’ में यह तथ्य उजागर हुआ है कि फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स यानी विशेष त्वरित अदालतें ही बलात्कार व यौन शोषण के पीड़ितों को शीघ्रता से न्याय दिलाने का एकमात्र रास्ता हैं। रिपोर्ट को नई दिल्ली में एक तीन दिवसीय कार्यशाला में जारी किया गया। रिपोर्ट में उजागर तथ्यों का हवाले से एमडीडी ऑफ इंडिया के निदेशक सुरिंद्र सिंह मान ने कहा कि एक तरफ जहां हम लगातार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि पीड़ित और उनके परिवार चुप रहने के बजाय न्याय के लिए आवाज उठाएं कड़वी सच्चाई यह है कि न्याय के लिए उनका यह संघर्ष अक्सर अंतहीन होता है। कचहरी के चक्कर और न्याय के बजाय तारीख पर तारीख कई बार तो पीड़ित के साथ हुए अत्याचार से भी ज्यादा असहनीय हो जाती है।
रिपोर्ट साफ तौर से यह तथ्य स्थापित करती है कि और ज्यादा विशेष त्वरित अदालतों का गठन हमारे बच्चों और उनके परिवारों के लिए शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने में सहायक होगा। हम राज्य सरकार से अपील करते हैं कि राज्य में जितनी भी विशेष त्वरित अदालतों की स्वीकृति है, उन सभी में अदालती कामकाज जारी रखना सुनिश्चित करते हुए तत्काल नई विशेष अदालतें गठित की जाएं।
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इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की रिपोर्ट ‘फास्ट ट्रैकिंग जस्टिस : रोल ऑफ फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स इन रिड्यूसिंग केस बैकलॉग्स’ में यह तथ्य उजागर हुआ है कि फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स यानी विशेष त्वरित अदालतें ही बलात्कार व यौन शोषण के पीड़ितों को शीघ्रता से न्याय दिलाने का एकमात्र रास्ता हैं। रिपोर्ट को नई दिल्ली में एक तीन दिवसीय कार्यशाला में जारी किया गया। रिपोर्ट में उजागर तथ्यों का हवाले से एमडीडी ऑफ इंडिया के निदेशक सुरिंद्र सिंह मान ने कहा कि एक तरफ जहां हम लगातार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि पीड़ित और उनके परिवार चुप रहने के बजाय न्याय के लिए आवाज उठाएं कड़वी सच्चाई यह है कि न्याय के लिए उनका यह संघर्ष अक्सर अंतहीन होता है। कचहरी के चक्कर और न्याय के बजाय तारीख पर तारीख कई बार तो पीड़ित के साथ हुए अत्याचार से भी ज्यादा असहनीय हो जाती है।
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रिपोर्ट साफ तौर से यह तथ्य स्थापित करती है कि और ज्यादा विशेष त्वरित अदालतों का गठन हमारे बच्चों और उनके परिवारों के लिए शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने में सहायक होगा। हम राज्य सरकार से अपील करते हैं कि राज्य में जितनी भी विशेष त्वरित अदालतों की स्वीकृति है, उन सभी में अदालती कामकाज जारी रखना सुनिश्चित करते हुए तत्काल नई विशेष अदालतें गठित की जाएं।
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