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फोटो 21-25-40

Wed, 06 Feb 2019 12:51 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 06 Feb 2019 12:51 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़। बच्चा हो या युवा सभी में ऑनलाइन गेम प्लेयर अननोन्स बैटल ग्राउंड्स (पबजी) का दीवानापन बढ़ता जा रहा है। एक युवक पर तो इस गेम का खुमार कुछ इस कद्र चढ़ा कि उसने इसे खेलने के लिए ही 48 हजार का मोबाइल खरीद लिया। इतना ही नहीं गेम के दीवानेपन ने उसका गर्लफ्रेंड से भी ब्रेकअप करा दिया। पबजी गेम ने स्टूडेंट्स से लेकर घरेलू लोगों की नींद उड़ा दी है। खासकर स्टूडेंट्स पढ़ाई में कम गेम में ज्यादा समय बीता रहे हैं। यही कारण है कि वह आए दिन स्टूडेंट्स बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। वहीं, बहादुरगढ़ के एक युवा ने पहचान छिपाते हुए बताया कि पबजी गेम की वजह से उसने 12 हजार का फोन लिया था, लेकिन मोबाइल में ठीक से गेम नहीं चल हो रहा था। जिसके चलते उसने 48 हजार का एक नया मोबाइल फोन खरीद लिया। युवक ने बताया कि गेम के दौरान उसकी गर्लफ्रेंड का कॉल आता है तो उसे काटकर गेम का सीजन पूरा करने के बाद फोन करता। ऐसा कई बार होने के कारण झगड़ा होने के बाद गर्लफ्रेंड से फाइनल ब्रेकअप हो चुका है।

ब्लू व्हेल का दूसरा रूप से पबजी
इंटरनेट में पबजी गेम खोजने में पता चला कि साउथ कोरिया की कंपनी ब्लू व्हेल ने 2017 में पबजी को बनाया है। आपको बता दें कि ब्लू व्हेल गेम का लेवर पूरा करने के चक्कर से देश कई राज्यों के बच्चों की जान चली गई थी। इस तरह कंपनी ने पबजी बना दिया है। इससे भी लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। खास बात यह है कि ऑनलाइन पबजी गेम जिसमें एक ही बार में 100 लोग खेल सकते हैं। यह गेम एकदम रियल गेम का अनुभव करता है।
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दो से शुरुआत की 52 सीजन तक पहुंचा
घेवरा निवासी यश ने बताया कि गेम को पहले सीजन 2 से शुरू किया था। अब वह लेवल 52 हो चुका है। उसने यह भी बताया कि वह इस गेम को पूरी रात ठंड में रजाई का सहारा लेकर खेलता है। उसने इस गेम के लिए अपना पुराना फोन बेचकर नया महंगा फोन खरीदा। वहीं, एक नाबालिग के अभिभावक का कहना है कि गेम के चक्कर से उनके बेटे को चश्मा लग गया है।
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मल्टी प्लेयर ऑनलाइन गेम पबजी, खेलने वाले बच्चों के माता-पिता काफी परेशान हो रहे है। गेम की बढ़ती लत के कारण युवाओं के संबंधों में दरार आ रही है। बच्चे रात-रात भर सोते नहीं है। साथ ही वे अपनी निजी जिंदगी में जैसे दोस्तों अपने परिवार वालो के साथ बातचीत करना पसंद नहीं करते हैं। इसके साथ ही बच्चे कई दिन तक स्कूल भी नहीं जाते, ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों से मोबाइल दूर रखें और ज्यादा से ज्यादा समय बच्चों को दें। डॉ. रोहित भारद्वाज, मनोचिकित्सक
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