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मिट्टी के दंगल में हितेश का कोई नहीं है सानी
Updated Sun, 21 Jan 2018 01:44 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
वक्त के साथ भले ही कुश्ती का प्रारूप बदल गया हो। मगर देशी कुश्ती (दंगल) का रुतबा भी अभी कम नहीं हुआ है। जब बात मिट्टी के दंगल की हो तो म्हारे हितेश पहलवान का कोई सानी नहीं है। दो बार हिंद केसरी, 15 बार भारत केसरी और 112 बार एक नंबर की कुुश्तियां जीतने वाला 32 वर्षीय हितेश दंगल में अब भी नौजवान पहलवानों के लिए चुनौती बना हुआ है।
13 वर्षों से दंगल में दबदबा
जब भी दंगल का जिक्र होता है तो हितेश का नाम खुद-ब-खुद उभर के सामने आता है। पिछले 13 वर्षों से यह पहलवान दंगल में दूसरे पहलवानों पर हावी रहा है। मौसम खत्री, कृष्ण बैंयापुर, जोगेंद्र पहलवान, नवीन, वरुण जस्सा पट्टी जैसे देश के नामी पहलवानों को हितेश कई बार पटखनी दे चुका है। 19 जनवरी को दिल्ली के ऊजावा में हुए दंगल में हाथरस के विख्यात पहलवान हरकेश उर्फ खली को हराकर डेढ़ लाख रुपये की कुश्ती जीती। हितेश ने बढ़ती उम्र के बावजूद पिछले तीन साल में 112 दंगल की पहली कुश्तियों में जीत हासिल की हैं। अनुभवी हो या फिर नौजवान हितेश पहलवान सभी के लिए चुनौती बना हुआ है।
मामा से मिली प्रेरणा
मूलत: गोहाना के महमूदपुर गांव का निवासी हितेश ने बताया कि करीब 15 वर्ष की आयु में बहादुरगढ़ के गांव बामनोली स्थित अपने मामा धर्मवीर के यहां अखाड़े में आया था। इंटरनेशनल पहलवान धर्मवीर गांव में अखाड़ा चलाते थे तो उनसे प्रेरित होकर हितेश ने भी अभ्यास शुरू कर दिया। चार वर्ष के कड़े अभ्यास के बाद 19 वर्ष की आयु में हितेश ने पहली बड़ी कुश्ती लड़ी। अपनी पहली ही कुुश्ती में जीत मिलने से हितेश का मनोबल बढ़ा और फिर उसने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। इसके बाद जूनियर-सीनियर नेशनल, फेडरेशन कप, ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी, वर्ल्ड कप व दंगलों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
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जब तक जान है, तब तक लडू़ंगा कुश्ती : हितेश
हितेश पहलवान रेलवे में टीटी है और फिलहाल बहादुरगढ़ के सेक्टर-6 में परिवार सहित रहता है। पिछले वर्ष ही उसका विवाह हुआ। हितेश अपनी कामयाबी का श्रेय कोच धर्मवीर व परिजनों को देते हैं। बकौल हितेश, कुश्ती के इस सफर में बेहद सी परेशानियां भी आई, मगर हार नहीं मानी। जब तक शरीर में जान है वो इस पारंपरिक खेल को खेलते रहेंगे। जिस दिन खेलना छोड़ देंगे, उसके बाद युवाओं को सिखाएंगे। उन्होंने युवाओं को नशे और अन्य बुराइयों से दूर रहकर कुश्ती को बढ़ावा देने को प्रेरित किया। प्रो. कुश्ती में खेलने के नाम पर हितेश ने कहा कि उसे अपनी मिट्टी से लगाव है। कुश्ती लेखक तेजपाल दलाल ने कहा कि हितेश न केवल हरियाणा बल्कि उत्तर भारत के श्रेष्ठतम पहलवानों में शुमार है। बेशक वह अब 32 साल का हो गया है, मगर वह 20 साल के नौजवान युवक की तरह कुश्ती लड़ता है।
हितेश की उपलब्धियां
- जूनियर नेशनल92008 में गोल्ड
- ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी 2009 में गोल्ड
- साउथ एशियन गेम्स ढाका 2010 में गोल्ड
- सीनियर नेशनल 2011 में गोल्ड
- सीनियर नेशनल 2013 में
- गोल्ड कोपा वर्ल्ड कप ब्राजील 2013 में गोल्ड
- हिंद केसरी-2013
- हिंद केसरी-2015
- सीनियर नेशनल 2015 में सिल्वर मेडल
- फेडरेशन कप में गोल्ड
- 2015 से लेकर अब तक 112 एक नंबर की कुश्ती जीतीं
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बहादुरगढ़।
वक्त के साथ भले ही कुश्ती का प्रारूप बदल गया हो। मगर देशी कुश्ती (दंगल) का रुतबा भी अभी कम नहीं हुआ है। जब बात मिट्टी के दंगल की हो तो म्हारे हितेश पहलवान का कोई सानी नहीं है। दो बार हिंद केसरी, 15 बार भारत केसरी और 112 बार एक नंबर की कुुश्तियां जीतने वाला 32 वर्षीय हितेश दंगल में अब भी नौजवान पहलवानों के लिए चुनौती बना हुआ है।
13 वर्षों से दंगल में दबदबा
जब भी दंगल का जिक्र होता है तो हितेश का नाम खुद-ब-खुद उभर के सामने आता है। पिछले 13 वर्षों से यह पहलवान दंगल में दूसरे पहलवानों पर हावी रहा है। मौसम खत्री, कृष्ण बैंयापुर, जोगेंद्र पहलवान, नवीन, वरुण जस्सा पट्टी जैसे देश के नामी पहलवानों को हितेश कई बार पटखनी दे चुका है। 19 जनवरी को दिल्ली के ऊजावा में हुए दंगल में हाथरस के विख्यात पहलवान हरकेश उर्फ खली को हराकर डेढ़ लाख रुपये की कुश्ती जीती। हितेश ने बढ़ती उम्र के बावजूद पिछले तीन साल में 112 दंगल की पहली कुश्तियों में जीत हासिल की हैं। अनुभवी हो या फिर नौजवान हितेश पहलवान सभी के लिए चुनौती बना हुआ है।
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मामा से मिली प्रेरणा
मूलत: गोहाना के महमूदपुर गांव का निवासी हितेश ने बताया कि करीब 15 वर्ष की आयु में बहादुरगढ़ के गांव बामनोली स्थित अपने मामा धर्मवीर के यहां अखाड़े में आया था। इंटरनेशनल पहलवान धर्मवीर गांव में अखाड़ा चलाते थे तो उनसे प्रेरित होकर हितेश ने भी अभ्यास शुरू कर दिया। चार वर्ष के कड़े अभ्यास के बाद 19 वर्ष की आयु में हितेश ने पहली बड़ी कुश्ती लड़ी। अपनी पहली ही कुुश्ती में जीत मिलने से हितेश का मनोबल बढ़ा और फिर उसने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। इसके बाद जूनियर-सीनियर नेशनल, फेडरेशन कप, ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी, वर्ल्ड कप व दंगलों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
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जब तक जान है, तब तक लडू़ंगा कुश्ती : हितेश
हितेश पहलवान रेलवे में टीटी है और फिलहाल बहादुरगढ़ के सेक्टर-6 में परिवार सहित रहता है। पिछले वर्ष ही उसका विवाह हुआ। हितेश अपनी कामयाबी का श्रेय कोच धर्मवीर व परिजनों को देते हैं। बकौल हितेश, कुश्ती के इस सफर में बेहद सी परेशानियां भी आई, मगर हार नहीं मानी। जब तक शरीर में जान है वो इस पारंपरिक खेल को खेलते रहेंगे। जिस दिन खेलना छोड़ देंगे, उसके बाद युवाओं को सिखाएंगे। उन्होंने युवाओं को नशे और अन्य बुराइयों से दूर रहकर कुश्ती को बढ़ावा देने को प्रेरित किया। प्रो. कुश्ती में खेलने के नाम पर हितेश ने कहा कि उसे अपनी मिट्टी से लगाव है। कुश्ती लेखक तेजपाल दलाल ने कहा कि हितेश न केवल हरियाणा बल्कि उत्तर भारत के श्रेष्ठतम पहलवानों में शुमार है। बेशक वह अब 32 साल का हो गया है, मगर वह 20 साल के नौजवान युवक की तरह कुश्ती लड़ता है।
हितेश की उपलब्धियां
- जूनियर नेशनल92008 में गोल्ड
- ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी 2009 में गोल्ड
- साउथ एशियन गेम्स ढाका 2010 में गोल्ड
- सीनियर नेशनल 2011 में गोल्ड
- सीनियर नेशनल 2013 में
- गोल्ड कोपा वर्ल्ड कप ब्राजील 2013 में गोल्ड
- हिंद केसरी-2013
- हिंद केसरी-2015
- सीनियर नेशनल 2015 में सिल्वर मेडल
- फेडरेशन कप में गोल्ड
- 2015 से लेकर अब तक 112 एक नंबर की कुश्ती जीतीं