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शहर में अब किसी भी फीडर की क्षमता 200 एम्पीयर से ज्यादा नहीं होगी

Wed, 08 Nov 2017 02:19 AM IST
Updated Wed, 08 Nov 2017 02:19 AM IST
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शहर में अब किसी भी फीडर की क्षमता 200 एम्पीयर से ज्यादा नहीं होगी
शहर में 12 फीडर बनने से कम हुआ लोड
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चरखी दादरी।
इस समय शहर में ओवरलोड फीडर की क्षमता 300 एंपीयर से अधिक होने के कारण बार- बार ट्रिपिंग बढ़ रही है। तीन नए फीडर समेत शहर में कुल 12 फीडर होने से शहर में दोनों मेन पावर सब स्टेशनों के साथ अन्य फीडरों का लोड भी कम होगा। तीन नए फीडर में से दो को घसौला 33 सब स्टेशन से जोड़ा गया है। विभाग के मुताबिक एक फीडर की क्षमता 200 एंपीयर से ज्यादा नहीं होगी।
इस समय बिजली के कटों के अलावा अब लंबे फॅाल्ट निगम भी उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बनते रहे हैं। कर्मचारियों का अधिकतर समय फाल्ट ठीक करने मेें ही बीत रहा है। शहर में छह से आठ घंटे तक बिजली कट भी अब बंद हो चुके हैं। शहर में सभी फीडर ओवरलोड चलने से फॅाल्ट व ब्रेक डाउन की समस्या लगातार बन रही है। वहीं गांवों में इस समय 12 से 14 घंटे तक बिजली आपूर्ति की जा रही है। दिन के समय तो चार से पांच घंटे ही बिजली आपूर्ति हो पा रही है। शहर में सभी फीडर लंबे समय से ओवरलोड चल रहे थे जिससे फॅाल्ट व ब्रेक डाउन की समस्या लगातार बनी रही है।
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जानकारी के अनुसार शहर में रोजाना तीन लाख यूनिट बिजली की खपत हो रही है। करीब 14 हजार बिजली उपभोक्ता हैं और पावर हाउस की क्षमता 950 एम्पीयर है लेकिन लोड बढ़ जाने पर यह अक्सर 850 एंपीयर तक ही लोड उठा पाता है। लोड बढ़ने पर पावर कट लगानी पड़ती है तब जाकर सामान्य बन पाता है। शहर में लाइन लोस इस समय 15 से 35 प्रतिशत तक बना हुआ है। पुराने शहर में लाइन लोस की मात्रा कई बार 50 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। इसके अलावा शहर में लाल रंग के ट्रांसफार्मरों की संख्या 963 है। ये ट्रांसफार्मर मोटी केबल से कनेक्ट हैं। एक ट्रांसफार्मर से मुश्किल से 20 मकानों में ही बिजली आपूर्ति हो पाती है। इनकी केबल में पंक्चर होने की शिकायत रहती है। करीब 30 प्रतिशत केबल पंक्चर पड़ी हैं। इतना ही नहीं शहर में करीब 13 सौ पुराने ट्रांसफार्मरों में से करीब 25 प्रतिशत ट्रांसफार्मर लोड चल रहे हैं। कालोनियों में पुरानी तारें लटक गई हैं। थोड़ी सी बारिश व तेज हवाएं चलने पर फॉल्ट आ जाता है। कई जगह तो जमीन पर ही यह ट्रांसफार्मर रखे हुए हैं। एक ट्रांसफार्मर का लोड बढ़ने पर उसके साथ ही दूसरा ट्रांसफार्मर रख दिया जाता है ताकि जैसे-तैसे लोड को कम किया जा सके।
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शहर में अब तीन नए फीडर और शुरू वर्किंग में आ गए हैं। तीन नए फीडर में प्रेमनगर फीडर, घिकाड़ा बाईपास फीडर और महेंद्रगढ़ बाईपास फीडर को शामिल किया गया है। प्रेमनगर फीडर व महेंद्रगढ़ बाईपास फीडर को गांव घसौला स्थित 33 केवीए सब स्टेशन से कनेक्ट किया जा रहा है। निगम ने महेंद्रगढ़ बाईपास फीडर का काम पूरा कर लिया है जबकि प्रेमनगर फीडर का काम 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है जबकि तीसरे घिकाड़ा बाईपास फीडर को शहर के मेन सब स्टेशन-आरडी-जीरो से कनेक्ट किया जा रहा है। फिलहाल यह एरिया शहर के मेन सब स्टेशन 132केवीएम -प्रथम व द्वितीय से कनेक्ट कर रखे हैं। इसके साथ ही शहर के दोनों मेन सब स्टेशनों का लोड भी कम हो जाएगा। इससे शहरी एरिया में बिजली फ्रीक्वेंसी में 80 प्रतिशत तक सुधार आएगा। पावर कटों से निजात मिल सकेगी। एक फीडर की क्षमता 150 से 200 एमवीए तक की जाएगी जबकि इस समय पुराने फीडरों पर 300 एमवीए तक लोड चल रहा है इस वजह से बार-बार लाइन ब्रेक डाउन कर जाती है और फॉल्ट बढ़ जाते हैं। सर्दियों के मौसम में लोड बढ़ने पर निगम को बारी-बारी से फीडर चलाने पड़ते हैं।

== वर्जन-
शहर में तीन नए फीडर का 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। महेंद्रगढ़ बाईपास फीडर को कनेक्ट कर दिया गया है जिससे ब्रेक डाउन व फॉल्टों से काफी हद तक छुटकारा मिल जाएगा।
एसडीओ विक्रम सिंह, बिजली निगम
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