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परिषद उपाध्यक्ष ने अनाधिकार रिलीज कराए तीन करोड़
Updated Sun, 25 Feb 2018 01:56 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
नगर परिषद बहादुरगढ़ के कई सदस्यों ने उपाध्यक्ष विनोद कुमार पर एक कंस्ट्रक्शन कंपनी की करीब तीन करोड़ रुपये सिक्योरिटी राशि अवैध तरीके से रिलीज करा देने का आरोप लगाया है। इन पार्षदों ने कहा है कि उप प्रधान इस सिक्योरिटी राशि हैंडओवर प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत नहीं हैं, इसलिए प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
परिषद की सत्ता के विरोधी पार्षदों ने शनिवार को प्रेस वार्ता की। इन पार्षदों ने बताया कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड द्वारा एचएसआईआईडीसी के माध्यम से 28.3 किलोमीटर लंबे झज्जर-बहादुरगढ़ मार्ग का निर्माण करवाया गया था। यह कार्य 9 जुलाई 2013 में शुरू हुआ था और 6 जुलाई 2014 को संपन्न हुआ। इस पर करीब 156 करोड़ 52 लाख रुपये खर्च किए गए थे। कंस्ट्रक्शन कंपनी की डिफेक्ट लाइबिलिटी 3 साल की थी। इसके बाद एक सितंबर 2017 को पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) के रोहतक सर्कल के अधीक्षण अभियंता द्वारा यह क्लीयरेंस निर्माता कंपनी को दे दी गई थी, लेकिन स्ट्रीट लाइट हैंडओवर नहीं होने के कारण कंपनी की करीब 3 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी निगम में फंसी हुई थी।
नगर परिषद अधिकारियों ने कंपनी से टूटे हुए खंभे दोबारा लगाने और सभी लाइटें चालू होने की सूरत में ही हैंडओवर लेने की शर्त रखी थी। प्रेस वार्ता में पार्षदों ने कहा कि इसके बावजूद परिषद उपाध्यक्ष विनोद कुमार ने एचएसआरडीसी के डीजीएम-4 के साथ इन लाइटों के हैंडओवर/टेकन ओवर दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए। हैरत की बात यह है कि इस दस्तावेज में स्पष्ट रूप से लिखा है कि 189 खंभों में से 23 खंभे टूटे हुए हैं। अपात्र होने के बावजूद नप उपाध्यक्ष ने हैंडओवर पत्र कंपनी को थमा दिया, जिसके आधार पर उसकी करीब तीन करोड़ रुपये की सिक्योरिटी रिलीज हो गई। इसके बाद नगर परिषद की 8 दिसंबर 2017 की बैठक के मुताबिक 10 लाख रुपये झज्जर रोड और रोहतक रोड की लाइटों की रिपेयर करने के नाम का प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया है। जबकि यह रिपेयर उस कंपनी द्वारा करके अधिकारिक रूप से हैंडओवर किया जाना चाहिए था। पार्षदों ने कहा कि वे इस मामले में सीएम मनोहर लाल से मिलकर निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे।
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ये पार्षद रहे मौजूद
शनिवार को हुई प्रेस वार्ता में पार्षद संदीप कुमार, राममूर्ति के पुत्र मुकेश, प्रवीण राठी, बिमला हुड्डा के पुत्र सोनू हुड्डा, लक्ष्मी सहवाग के पति समुंद्र सहवाग, सीमा राठी के पति वजीर राठी, मोनिका राठी के पति कपूर राठी, गुरदेव राठी, रमन यादव, रेखा दलाल के पति सोनू दलाल, नीना राठी के पति सतपाल राठी व पार्षद शशि कुमार मौजूद रहे। पार्षद प्रवीण राठी ने कहा कि कर्मचारियों का ईपीएफ समय पर नहीं जमा करवाने के एवज में नगर परिषद को करीब 96 लाख रुपये की पेनल्टी चुकानी पड़ी।
अध्यक्षा और उपाध्यक्ष बोले
परिषद उपाध्यक्ष विनोद कुमार ने पार्षदों के आरोप को निराधार बताते हुए कहा कि मेरी इस मामले में कोई दुर्भावना नहीं थी। मैंने सिर्फ लाइटों की कंप्लीशन पर हस्ताक्षर किए थे। जबकि चेयरपर्सन शीला राठी ने कहा कि एचएसआईआईडीसी ने लाइटों का काम कराया था। परिषद की ओर से इसके भुगतान का कोई सरोकार नहीं था। परिषद की राजनीति में पिछड़े बैठे लोग निराधार बयानबाजी कर रहे हैं।
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बहादुरगढ़।
नगर परिषद बहादुरगढ़ के कई सदस्यों ने उपाध्यक्ष विनोद कुमार पर एक कंस्ट्रक्शन कंपनी की करीब तीन करोड़ रुपये सिक्योरिटी राशि अवैध तरीके से रिलीज करा देने का आरोप लगाया है। इन पार्षदों ने कहा है कि उप प्रधान इस सिक्योरिटी राशि हैंडओवर प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत नहीं हैं, इसलिए प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
परिषद की सत्ता के विरोधी पार्षदों ने शनिवार को प्रेस वार्ता की। इन पार्षदों ने बताया कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड द्वारा एचएसआईआईडीसी के माध्यम से 28.3 किलोमीटर लंबे झज्जर-बहादुरगढ़ मार्ग का निर्माण करवाया गया था। यह कार्य 9 जुलाई 2013 में शुरू हुआ था और 6 जुलाई 2014 को संपन्न हुआ। इस पर करीब 156 करोड़ 52 लाख रुपये खर्च किए गए थे। कंस्ट्रक्शन कंपनी की डिफेक्ट लाइबिलिटी 3 साल की थी। इसके बाद एक सितंबर 2017 को पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) के रोहतक सर्कल के अधीक्षण अभियंता द्वारा यह क्लीयरेंस निर्माता कंपनी को दे दी गई थी, लेकिन स्ट्रीट लाइट हैंडओवर नहीं होने के कारण कंपनी की करीब 3 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी निगम में फंसी हुई थी।
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नगर परिषद अधिकारियों ने कंपनी से टूटे हुए खंभे दोबारा लगाने और सभी लाइटें चालू होने की सूरत में ही हैंडओवर लेने की शर्त रखी थी। प्रेस वार्ता में पार्षदों ने कहा कि इसके बावजूद परिषद उपाध्यक्ष विनोद कुमार ने एचएसआरडीसी के डीजीएम-4 के साथ इन लाइटों के हैंडओवर/टेकन ओवर दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए। हैरत की बात यह है कि इस दस्तावेज में स्पष्ट रूप से लिखा है कि 189 खंभों में से 23 खंभे टूटे हुए हैं। अपात्र होने के बावजूद नप उपाध्यक्ष ने हैंडओवर पत्र कंपनी को थमा दिया, जिसके आधार पर उसकी करीब तीन करोड़ रुपये की सिक्योरिटी रिलीज हो गई। इसके बाद नगर परिषद की 8 दिसंबर 2017 की बैठक के मुताबिक 10 लाख रुपये झज्जर रोड और रोहतक रोड की लाइटों की रिपेयर करने के नाम का प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया है। जबकि यह रिपेयर उस कंपनी द्वारा करके अधिकारिक रूप से हैंडओवर किया जाना चाहिए था। पार्षदों ने कहा कि वे इस मामले में सीएम मनोहर लाल से मिलकर निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे।
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ये पार्षद रहे मौजूद
शनिवार को हुई प्रेस वार्ता में पार्षद संदीप कुमार, राममूर्ति के पुत्र मुकेश, प्रवीण राठी, बिमला हुड्डा के पुत्र सोनू हुड्डा, लक्ष्मी सहवाग के पति समुंद्र सहवाग, सीमा राठी के पति वजीर राठी, मोनिका राठी के पति कपूर राठी, गुरदेव राठी, रमन यादव, रेखा दलाल के पति सोनू दलाल, नीना राठी के पति सतपाल राठी व पार्षद शशि कुमार मौजूद रहे। पार्षद प्रवीण राठी ने कहा कि कर्मचारियों का ईपीएफ समय पर नहीं जमा करवाने के एवज में नगर परिषद को करीब 96 लाख रुपये की पेनल्टी चुकानी पड़ी।
अध्यक्षा और उपाध्यक्ष बोले
परिषद उपाध्यक्ष विनोद कुमार ने पार्षदों के आरोप को निराधार बताते हुए कहा कि मेरी इस मामले में कोई दुर्भावना नहीं थी। मैंने सिर्फ लाइटों की कंप्लीशन पर हस्ताक्षर किए थे। जबकि चेयरपर्सन शीला राठी ने कहा कि एचएसआईआईडीसी ने लाइटों का काम कराया था। परिषद की ओर से इसके भुगतान का कोई सरोकार नहीं था। परिषद की राजनीति में पिछड़े बैठे लोग निराधार बयानबाजी कर रहे हैं।