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ठेकेदार के पिंजरे में फंसे बंदर, लोगों ने ली राहत की सांस
Updated Fri, 29 Dec 2017 11:42 PM IST
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पिंजरे में फंसे बंदर, लोगों ने ली राहत की सांस
अमर उजाला बंदर पकड़ो अभियान फॉलोअप
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
करीब तीन साल के लंबे इंतजार के बाद शहर में आखिरकार बंदर पकड़ो अभियान शुरू हो गया। अभियान के पहले दो दिनों में ठेकेदार के पिंजरे में पांच बंदर फंसे और इससे लोगों ने राहत की सांस ली है। ठेकेदार ने अभियान की शुरुआत वार्ड दो से की और आगे वार्डों में जरुरत के मुताबिक बड़े पिंजरे लगाए जाएंगे। अभियान शुरू होने पर लोगों ने काफी राहत महसूस की है। पकड़े गए बंदरों के खाने से लेकर इन्हें जंगली क्षेत्र में छोड़ने की जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी। नगर परिषद ने शहर के बंदरों का पकड़ने का काम मथुरा के ठेकेदार को दिया है। बंदरों को पकड़ने के बाद इन्हें सुरक्षित जगह पर छोड़े जाने की प्लानिंग नगर परिषद की ओर से तैयार की जा रही है। वहीं, शहरवासियों ने अभियान शुरू कराने पर अमर उजाला टीम को धन्यवाद दिया।
अभियान शुरू होने पर लोग बोले : थैंक्स अमर उजाला
1. बंदरों की समस्या पिछले काफी से समय से बनी हुई है। प्रतिदिन बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा था। अमर उजाला ने इस खबर को कई बार प्रमुखता से प्रकाशित करने के बाद नगर परिषद ने बंदर पकड़ो अभियान की शुरूआत की है इसके लिए थैंक्स अमर उजाला।
-सतीश कुमार, निवासी वार्ड दो
2. बंदरों के आंतक के कारण मकान की छत पर जाने का भी खतरा बना रहता है। कभी भी बंदर घर के अंदर घुसकर घरेलू सामान बिखेर देते है। तो कभी परिजनों को चोटिल कर देते हैं अमर उजाला में बार-बार खबर प्रकाशित होने के बाद अभियान की शुरूआत हो पाई है।
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-रजनी गृहिणी, निवासी वार्ड दो
3. बंदर दुकान में रखे सामान को कभी उठा कर भाग जाते थे। राहगीरों पर भी हमला कर देते थे। बंदरों के आंतक के चलते बच्चों का घरों की छतों पर जाना भी बंद हो गया था। अमर उजाला ने लोगों की समस्या को प्रकाशित किया, जिससे समस्या का समाधान होने की संभावना है इसलिए थैंक्स अमर उजाला।
-संजय दुकानदार, निवासी वार्ड दो
4. बंदरों के आतंक की वजह से घरों के बाहर बैठने में भी परेशानी उठानी पड़ती है। छोटे बच्चों को घर पर अकेला नहीं छोड़ सकते थे। घर के अंदर रखे सामान को उठा ले जाते या बिखेर देते थे। अमर उजाला ने बंदरों की समस्या को कई दफा प्रकाशित करने के बाद नगर परिषद ने अभियान की शुरूआत की है।
-मूर्ति देवी, निवासी वार्ड दो
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अमर उजाला बंदर पकड़ो अभियान फॉलोअप
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
करीब तीन साल के लंबे इंतजार के बाद शहर में आखिरकार बंदर पकड़ो अभियान शुरू हो गया। अभियान के पहले दो दिनों में ठेकेदार के पिंजरे में पांच बंदर फंसे और इससे लोगों ने राहत की सांस ली है। ठेकेदार ने अभियान की शुरुआत वार्ड दो से की और आगे वार्डों में जरुरत के मुताबिक बड़े पिंजरे लगाए जाएंगे। अभियान शुरू होने पर लोगों ने काफी राहत महसूस की है। पकड़े गए बंदरों के खाने से लेकर इन्हें जंगली क्षेत्र में छोड़ने की जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी। नगर परिषद ने शहर के बंदरों का पकड़ने का काम मथुरा के ठेकेदार को दिया है। बंदरों को पकड़ने के बाद इन्हें सुरक्षित जगह पर छोड़े जाने की प्लानिंग नगर परिषद की ओर से तैयार की जा रही है। वहीं, शहरवासियों ने अभियान शुरू कराने पर अमर उजाला टीम को धन्यवाद दिया।
अभियान शुरू होने पर लोग बोले : थैंक्स अमर उजाला
1. बंदरों की समस्या पिछले काफी से समय से बनी हुई है। प्रतिदिन बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा था। अमर उजाला ने इस खबर को कई बार प्रमुखता से प्रकाशित करने के बाद नगर परिषद ने बंदर पकड़ो अभियान की शुरूआत की है इसके लिए थैंक्स अमर उजाला।
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-सतीश कुमार, निवासी वार्ड दो
2. बंदरों के आंतक के कारण मकान की छत पर जाने का भी खतरा बना रहता है। कभी भी बंदर घर के अंदर घुसकर घरेलू सामान बिखेर देते है। तो कभी परिजनों को चोटिल कर देते हैं अमर उजाला में बार-बार खबर प्रकाशित होने के बाद अभियान की शुरूआत हो पाई है।
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-रजनी गृहिणी, निवासी वार्ड दो
3. बंदर दुकान में रखे सामान को कभी उठा कर भाग जाते थे। राहगीरों पर भी हमला कर देते थे। बंदरों के आंतक के चलते बच्चों का घरों की छतों पर जाना भी बंद हो गया था। अमर उजाला ने लोगों की समस्या को प्रकाशित किया, जिससे समस्या का समाधान होने की संभावना है इसलिए थैंक्स अमर उजाला।
-संजय दुकानदार, निवासी वार्ड दो
4. बंदरों के आतंक की वजह से घरों के बाहर बैठने में भी परेशानी उठानी पड़ती है। छोटे बच्चों को घर पर अकेला नहीं छोड़ सकते थे। घर के अंदर रखे सामान को उठा ले जाते या बिखेर देते थे। अमर उजाला ने बंदरों की समस्या को कई दफा प्रकाशित करने के बाद नगर परिषद ने अभियान की शुरूआत की है।
-मूर्ति देवी, निवासी वार्ड दो