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सिविल अस्पताल पार्क से उठाए तो मेन गेट पर शुरूकिया एनएचएम कर्मियों ने धरना
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। एनएचएम कर्मचारियों का धरना बुधवार को भी जारी रहा। सुबह धरने पर बैठे कर्मचारियों को सिविल अस्पताल परिसर पार्क से उठाने पर उन्होंने अस्पताल के मेन गेट पर धरना शुरू कर दिया। दिनभर कर्मचारी यहां धरने पर डटे रहे। वहीं, स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों की मानें तो दस से अधिक कर्मचारी ड्यूटी पर लौट आए हैं और वीरवार तक धरना खत्म होने की उम्मीद है।
बुधवार को जब एनएचएम कर्मचारी धरने पर बैठे तो उन्हें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से निर्देश मिले कि अस्पताल परिसर में धरना न दिया जाए। अधिकारियों ने अस्पताल परिसर से बाहर जाने को कहा इस पर एनएचएम कर्मचारियों में रोष बढ़ गया। बाद में इन कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर के बाहर धरना शुरू कर दिया। आशा वर्कर्स यूनियन की राज्य उपप्रधान कमलेश ने कहा कि सरकार से उनकी एक ही प्रमुख मांग है कि एनएचएम कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा दी जाए ताकि उनका भविष्य बर्बाद न होने पाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उनकी सेवाओं को केंद्र सरकार के अधीन मानकर हस्तक्षेप करने से इंकार कर रही है तो ऐसे में राज्य सरकार इन कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा संबंधी प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को तो भेज ही सकती है। यूनियन राज्य उपप्रधान कमलेश ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने गत सितंबर माह में आशा वर्कर्स का मानदेय बढ़ाया था लेकिन आज तक यह बढ़ा हुआ मानदेय भी नहीं मिल सका है जबकि राज्य सरकार के पास इसका बजट आ चुका है। राज्य सरकार इसमें अनदेखी कर रही है। कमलेश देवी ने कहा शांतिपूर्वक धरने पर बैठे कर्मचारियों को अस्पताल परिसर से बाहर खदेड़ना सरासर गलत है। वे अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्वक धरना देती आ रही हैं। धरने को संबोधित कर किसान सभा नेता रणधीर कुंगड़ व सर्वकर्मचारी संघ जिला संयोजक राजकुमार घिकाड़ा ने कहा कि सरकार को इन कर्मचारियों की मांगों पर तत्परता से विचार करना चाहिए। ये कर्मचारी लंबे समय से अपनी नियमित सेवाएं देती आ रही हैं। सरकार को इनकी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करना चाहिए। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के प्रति रोष जताया और नारेबाजी भी की।
जल्द लेगी यूनियन कोई निर्णय
एनएचएम यूनियन जिला प्रधान महेंद्र सिंह ने बताया कि इसे लेकर बुधवार को यूनियन की स्टेड बॉडी की रोहतक में बैठक आयोजित की गई जिसमें इन मांगों को पूरा करवाने के लिए विचार-विमर्श हुआ है। बैठक के बाद अब यूनियन जल्द ही अपना कोई निर्णय लेगी। धरना समाप्त करने का निर्णय स्टेड बॉडी की ओर से ही लिया जाना है। स्टेट बॉडी की बैठक में अभी निष्कर्ष नहीं निकल सका है कि धरने को जारी रखा जाए या फिर से समाप्त किया जाए। धरने में यूनियन की महिला जिला प्रधान अंजू, किसान सभा नेता रणधीर कुंगड़, अनिल श्योराण, अध्यापक संघ से जगविंद्र छिल्लर, कर्मचारी महासंघ महासचिव संजीव मंदौला,लिपिक वर्ग यूनियन नेता विजय लांबा आदि शामिल हुए।
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कुछ एनएचएम कर्मचारी काम पर लौटने को तैयार हैं। सरकार के निर्देश पर कर्मचारियों के धरने अस्पताल परिसर से बाहर शिफ्ट करवाया गया। वीरवार से हड़ताल कर्मचारियों के काम पर लौटने की उम्मीद है।
डॉ. वीरेंद्र यादव, सीएमओ, चरखी दादरी
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चरखी दादरी। एनएचएम कर्मचारियों का धरना बुधवार को भी जारी रहा। सुबह धरने पर बैठे कर्मचारियों को सिविल अस्पताल परिसर पार्क से उठाने पर उन्होंने अस्पताल के मेन गेट पर धरना शुरू कर दिया। दिनभर कर्मचारी यहां धरने पर डटे रहे। वहीं, स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों की मानें तो दस से अधिक कर्मचारी ड्यूटी पर लौट आए हैं और वीरवार तक धरना खत्म होने की उम्मीद है।
बुधवार को जब एनएचएम कर्मचारी धरने पर बैठे तो उन्हें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से निर्देश मिले कि अस्पताल परिसर में धरना न दिया जाए। अधिकारियों ने अस्पताल परिसर से बाहर जाने को कहा इस पर एनएचएम कर्मचारियों में रोष बढ़ गया। बाद में इन कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर के बाहर धरना शुरू कर दिया। आशा वर्कर्स यूनियन की राज्य उपप्रधान कमलेश ने कहा कि सरकार से उनकी एक ही प्रमुख मांग है कि एनएचएम कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा दी जाए ताकि उनका भविष्य बर्बाद न होने पाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उनकी सेवाओं को केंद्र सरकार के अधीन मानकर हस्तक्षेप करने से इंकार कर रही है तो ऐसे में राज्य सरकार इन कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा संबंधी प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को तो भेज ही सकती है। यूनियन राज्य उपप्रधान कमलेश ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने गत सितंबर माह में आशा वर्कर्स का मानदेय बढ़ाया था लेकिन आज तक यह बढ़ा हुआ मानदेय भी नहीं मिल सका है जबकि राज्य सरकार के पास इसका बजट आ चुका है। राज्य सरकार इसमें अनदेखी कर रही है। कमलेश देवी ने कहा शांतिपूर्वक धरने पर बैठे कर्मचारियों को अस्पताल परिसर से बाहर खदेड़ना सरासर गलत है। वे अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्वक धरना देती आ रही हैं। धरने को संबोधित कर किसान सभा नेता रणधीर कुंगड़ व सर्वकर्मचारी संघ जिला संयोजक राजकुमार घिकाड़ा ने कहा कि सरकार को इन कर्मचारियों की मांगों पर तत्परता से विचार करना चाहिए। ये कर्मचारी लंबे समय से अपनी नियमित सेवाएं देती आ रही हैं। सरकार को इनकी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करना चाहिए। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के प्रति रोष जताया और नारेबाजी भी की।
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जल्द लेगी यूनियन कोई निर्णय
एनएचएम यूनियन जिला प्रधान महेंद्र सिंह ने बताया कि इसे लेकर बुधवार को यूनियन की स्टेड बॉडी की रोहतक में बैठक आयोजित की गई जिसमें इन मांगों को पूरा करवाने के लिए विचार-विमर्श हुआ है। बैठक के बाद अब यूनियन जल्द ही अपना कोई निर्णय लेगी। धरना समाप्त करने का निर्णय स्टेड बॉडी की ओर से ही लिया जाना है। स्टेट बॉडी की बैठक में अभी निष्कर्ष नहीं निकल सका है कि धरने को जारी रखा जाए या फिर से समाप्त किया जाए। धरने में यूनियन की महिला जिला प्रधान अंजू, किसान सभा नेता रणधीर कुंगड़, अनिल श्योराण, अध्यापक संघ से जगविंद्र छिल्लर, कर्मचारी महासंघ महासचिव संजीव मंदौला,लिपिक वर्ग यूनियन नेता विजय लांबा आदि शामिल हुए।
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कुछ एनएचएम कर्मचारी काम पर लौटने को तैयार हैं। सरकार के निर्देश पर कर्मचारियों के धरने अस्पताल परिसर से बाहर शिफ्ट करवाया गया। वीरवार से हड़ताल कर्मचारियों के काम पर लौटने की उम्मीद है।
डॉ. वीरेंद्र यादव, सीएमओ, चरखी दादरी