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Hisar News: मतदाता सूची में दर्ज पते पर नहीं मिल रहे वोटर तो कहीं मकान नंबर गलत
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लघु सचिवालय स्थित जिला निर्वाचन कार्यालय
हिसार। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की तैयारी के मद्देनजर बीएलओ विधानसभा क्षेत्रवार मतदाताओं की मैपिंग में जुटे हैं। जिले में अब तक करीब 76 फीसदी मैपिंग हो चुकी है। हालांकि हिसार सबसे फिसड्डी है। यहां महज 44.48 फीसदी मैपिंग हुई है।
मैपिंग के दौरान सबसे अधिक समस्या यह आ रही है कि बीएलओ को कहीं मकान नंबर गलत मिल रहे हैं तो कहीं मतदाता सूची में दर्ज व्यक्ति की जगह कोई और रह रहा है। इस तरह की समस्याओं के समाधान के लिए 16 से 27 फरवरी तक 162 बीएलओ अपने-अपने बूथों पर बैठेंगे। इसके साथ ही सत्यापन कार्य भी शुरू हो जाएगा। जिला निर्वाचन कार्यालय से सभी बीएलओ को इस आशय के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बाद अन्य छह विधानसभा सीटों के मतदाताओं की समस्याएं सुनीं जाएंगी।
जिला निर्वाचन कार्यालय में असिस्टेंट स्नेह जांगड़ा के मुताबिक एसआईआर की तैयारी के मद्देनजर जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में करीब 76 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग कर ली है। सबसे ज्यादा परेशानी मतदाताओं के मकान नंबर को लेकर आ रही हैं। दरअसल वर्ष 2002 के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं ने अपने घर बदल लिए हैं। कोई शहर छोड़कर चला गया तो कोई अन्य जगह किराये पर रहने लगा।
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कई नए सेक्टर बसे हैं। लोग पुराने घरों को बेचकर इन सेक्टरों में रहने लगे हैं। इन सब की वजह से बीएलओ को मतदाताओें तक पहुंचने में भारी परेशानी हो रही है। जिन घरों में जा रहे हैं, वहां कोई और रह रहा है। कइयों के मकान नंबर ही गलत है। आसपास पूछने पर भी कोई तस्दीक नहीं कर रहा। हालांकि, रोजाना अनेक लोग चुनाव कार्यालय में आकर अपने पते अपडेट करा रहे हैं।
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मैपिंग के दौरान सबसे अधिक समस्या यह आ रही है कि बीएलओ को कहीं मकान नंबर गलत मिल रहे हैं तो कहीं मतदाता सूची में दर्ज व्यक्ति की जगह कोई और रह रहा है। इस तरह की समस्याओं के समाधान के लिए 16 से 27 फरवरी तक 162 बीएलओ अपने-अपने बूथों पर बैठेंगे। इसके साथ ही सत्यापन कार्य भी शुरू हो जाएगा। जिला निर्वाचन कार्यालय से सभी बीएलओ को इस आशय के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बाद अन्य छह विधानसभा सीटों के मतदाताओं की समस्याएं सुनीं जाएंगी।
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जिला निर्वाचन कार्यालय में असिस्टेंट स्नेह जांगड़ा के मुताबिक एसआईआर की तैयारी के मद्देनजर जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में करीब 76 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग कर ली है। सबसे ज्यादा परेशानी मतदाताओं के मकान नंबर को लेकर आ रही हैं। दरअसल वर्ष 2002 के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं ने अपने घर बदल लिए हैं। कोई शहर छोड़कर चला गया तो कोई अन्य जगह किराये पर रहने लगा।
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कई नए सेक्टर बसे हैं। लोग पुराने घरों को बेचकर इन सेक्टरों में रहने लगे हैं। इन सब की वजह से बीएलओ को मतदाताओें तक पहुंचने में भारी परेशानी हो रही है। जिन घरों में जा रहे हैं, वहां कोई और रह रहा है। कइयों के मकान नंबर ही गलत है। आसपास पूछने पर भी कोई तस्दीक नहीं कर रहा। हालांकि, रोजाना अनेक लोग चुनाव कार्यालय में आकर अपने पते अपडेट करा रहे हैं।