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जीजेयू में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी : नवनीत कौर व कीर्ति नांदल को मिला यंग साइंटिस्ट अवाॅर्ड
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जीजेयू में होनहारों को सम्मानित करते मुख्य अतिथि।
हिसार। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि जीवन में चुनौतियां आती हैं, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि हम चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं। चुनौतियों को अवसर में बदलने वाला ही उपयोगी साबित होता है। वे वीरवार को जीजेयू के मनोविज्ञान विभाग की ओर से चौधरी रणबीर सिंह सभागार में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस दौरान ओम स्टर्लिंग ग्लोबल विश्वविद्यालय की नवनीत कौर व कीर्ति नांदल को यंग साइंटिस्ट अवाॅर्ड से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा फिरोज गांधी महाविद्यालय लखनऊ के डाॅ. अमिश को प्रोफेसर मदनावत बेस्ट पेपर अवाॅर्ड, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी की अंशु प्रिया को प्रोफेसर मंजू ठाकुर बेस्ट पेपर अवाॅर्ड और हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ की शोधार्थी कोमल चेतीवाल व नेत्राशा सिंह को प्रतिभा सिंह मेमोरियल बेस्ट पेपर पुरस्कार देकर सम्मानित किया। प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि विश्व पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन व युद्धों जैसी चुनौतियों से निपटने में मनोविज्ञान की अहम भूमिका हो सकती है। मनोवैज्ञानिक समस्याओं को बेहतर ढंग से समझता है। उन्होंने प्रतिभागियों से तकनीक का बेहतर तरीके से प्रयोग करने की सलाह दी।
प्रो. संदीप राणा ने कहा कि यदि शैक्षणिक संस्थानों का वातावरण बेहतर व सकारात्मक हो जाए तो बाकी सब संस्थानों का वातावरण भी बेहतर व सकारात्मक हो जाएगा। समस्या का नहीं, समाधान का हिस्सा बनें। आयोजन सचिव डाॅ. तरुणा ने संगोष्ठी की रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम में 18 शोध प्रस्तुतियों को भी सम्मान से नवाजा गया।
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इसके अलावा फिरोज गांधी महाविद्यालय लखनऊ के डाॅ. अमिश को प्रोफेसर मदनावत बेस्ट पेपर अवाॅर्ड, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी की अंशु प्रिया को प्रोफेसर मंजू ठाकुर बेस्ट पेपर अवाॅर्ड और हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ की शोधार्थी कोमल चेतीवाल व नेत्राशा सिंह को प्रतिभा सिंह मेमोरियल बेस्ट पेपर पुरस्कार देकर सम्मानित किया। प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि विश्व पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन व युद्धों जैसी चुनौतियों से निपटने में मनोविज्ञान की अहम भूमिका हो सकती है। मनोवैज्ञानिक समस्याओं को बेहतर ढंग से समझता है। उन्होंने प्रतिभागियों से तकनीक का बेहतर तरीके से प्रयोग करने की सलाह दी।
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प्रो. संदीप राणा ने कहा कि यदि शैक्षणिक संस्थानों का वातावरण बेहतर व सकारात्मक हो जाए तो बाकी सब संस्थानों का वातावरण भी बेहतर व सकारात्मक हो जाएगा। समस्या का नहीं, समाधान का हिस्सा बनें। आयोजन सचिव डाॅ. तरुणा ने संगोष्ठी की रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम में 18 शोध प्रस्तुतियों को भी सम्मान से नवाजा गया।
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