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मौसम का असर सेहत पर : उल्टी व दस्त के मरीजों की संख्या में हुआ इजाफा
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हांसी। नागरिक अस्पताल में बारिश के चलते दो दिन से ओपीडी घट रही है। प्रतिदिन 300 के करीब ओपीडी हो रही है। जिनमें 100 के करीब मरीज उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बुखार व खांसी के आ रहे हैं।
बारिश के मौसम में सर्दी, खांसी, बुखार जैसी सामान्य बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। बीते दिनों बारिश होने से भी लोगों में बीमारी बढ़ी हैं। ऐसे में अस्पताल में मौसमी बीमारियों के मरीज सबसे अधिक पहुंच रहे हैं। वहीं चिकित्सक भी मौसमी बीमारियों से बचने की सलाह दे रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार मौसम में बदलाव होता है तो शरीर का इम्युन सिस्टम सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। इम्युन सिस्टम हमारे शरीर का एक सुरक्षा तंत्र है। जब मौसम में बदलाव होता है तो अलग-अलग तरह के बैक्टीरिया व वायरस आदि तापमान के अनुसार सक्रिय हो जाते हैं, जो शरीर पर हमला करते हैं। बारिश के मौसम के दौरान यदि शरीर का इम्युन सिस्टम कमजोर होगा, तो बैक्टीरिया आसानी से शरीर को कमजोर करना शुरू कर देते हैं। यही कारण है कि बीमार होने पर डॉक्टर हमें एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं। एंटीबायोटिक दवाएं शरीर पर बैक्टीरिया व वायरस के द्वारा होने वाले बाहरी आक्रमण को खत्म कर देती है। यही नहीं बारिश के मौसम में आसपास कीचड़ व पानी जमा होने से मलेरिया और डेंगू के मच्छर अधिक पैदा होते है, जिससे हमें अधिक खतरा होता है।
मौसम बदलने से उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। सभी लोगों को अपने घर में ओआरएस के साथ ही अन्य बुखार से संबंधित दवाओं का रखना जरूरी है, जिससे घर में किसी को भी उल्टी- दस्त होने पर ओआरएस का घोल पिलाने से शरीर में नमक व पानी की कमी को पूरा किया जा सके। अगर किसी मरीज को आराम नहीं मिल रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेने के साथ ही प्राथमिक इलाज कराना जरूरी है। अभी नागरिक अस्पताल में पेट में दर्द, उल्टी दस के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है।
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- डॉक्टर कामिद मोंगा, नागरिक अस्पताल, हांसी।
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बारिश के मौसम में सर्दी, खांसी, बुखार जैसी सामान्य बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। बीते दिनों बारिश होने से भी लोगों में बीमारी बढ़ी हैं। ऐसे में अस्पताल में मौसमी बीमारियों के मरीज सबसे अधिक पहुंच रहे हैं। वहीं चिकित्सक भी मौसमी बीमारियों से बचने की सलाह दे रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार मौसम में बदलाव होता है तो शरीर का इम्युन सिस्टम सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। इम्युन सिस्टम हमारे शरीर का एक सुरक्षा तंत्र है। जब मौसम में बदलाव होता है तो अलग-अलग तरह के बैक्टीरिया व वायरस आदि तापमान के अनुसार सक्रिय हो जाते हैं, जो शरीर पर हमला करते हैं। बारिश के मौसम के दौरान यदि शरीर का इम्युन सिस्टम कमजोर होगा, तो बैक्टीरिया आसानी से शरीर को कमजोर करना शुरू कर देते हैं। यही कारण है कि बीमार होने पर डॉक्टर हमें एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं। एंटीबायोटिक दवाएं शरीर पर बैक्टीरिया व वायरस के द्वारा होने वाले बाहरी आक्रमण को खत्म कर देती है। यही नहीं बारिश के मौसम में आसपास कीचड़ व पानी जमा होने से मलेरिया और डेंगू के मच्छर अधिक पैदा होते है, जिससे हमें अधिक खतरा होता है।
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मौसम बदलने से उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। सभी लोगों को अपने घर में ओआरएस के साथ ही अन्य बुखार से संबंधित दवाओं का रखना जरूरी है, जिससे घर में किसी को भी उल्टी- दस्त होने पर ओआरएस का घोल पिलाने से शरीर में नमक व पानी की कमी को पूरा किया जा सके। अगर किसी मरीज को आराम नहीं मिल रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेने के साथ ही प्राथमिक इलाज कराना जरूरी है। अभी नागरिक अस्पताल में पेट में दर्द, उल्टी दस के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है।
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- डॉक्टर कामिद मोंगा, नागरिक अस्पताल, हांसी।