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1200 प्रवासी मजदूरों को लेकर हिसार से रवाना हुई हरियाणा की पहली ट्रेन
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वीडियो कॉलिंग से प्रवासी श्रमिक से बात करते मुख्यमंत्री मनोहरलाल।
- फोटो : Hisar
लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके घर तक छोड़ने के लिए सरकार ने पहली श्रमिक ट्रेन बुधवार को हिसार से चलाई। यह हिसार से बिहार राज्य के कटिहार तक के लिए दोपहर बाद 2:20 बजे प्लेटफार्म नंबर-1 से 1200 प्रवासी श्रमिकों को लेकर रवाना हुई। ट्रेन चलने से कुछ देर पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अररिया जिले के गांव फतेहपुर निवासी मक्खन शर्मा से बातचीत कर हालचाल भी जाना।
रेलवे स्टेशन से रवाना हुई ट्रेन में बिहार के छह जिलों के प्रवासी श्रमिक भेजे गए हैं। उनको एक समय का खाना भी साथ दिया गया है। हिसार रेलवे स्टेशन पहुंचने पर टिकट देकर पुलिस की निगरानी में प्रवासी मजदूरों को ट्रेन में बैठाया गया। ट्रेन में पुलिस के जवान भी भेजे गए हैं, ताकि किसी प्रकार की कोई व्यवस्था न बिगड़े। प्रत्येक श्रमिक का स्टेशन पहुंचने पर स्क्रीनिंग करके अंदर प्रवेश करवाया गया। सामाजिक दूरी का ध्यान रखा गया और अंदर पुलिस कर्मचारियों द्वारा प्रत्येक श्रमिक का रजिस्ट्रेशन चेक करके बोगियों में चढ़ाया गया।
सीएम बोले- कोई दिक्कत तो नहीं हुई
दोपहर दो बजे हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने सीआइडी के डीएसपी अजय शर्मा के मोबाइल पर वीडियो कॉल कर अररिया जिले के गांव फतेहपुर निवासी मक्खन शर्मा से बातचीत कर हालचाल जाना। सीएम ने कहा कि तुम्हें कोई परेशानी तो नहीं हुई। समय पर खाना मिला या नहीं। पानी मिला या नहीं। इस पर मक्खन ने कहा - कोई दिक्कत नहीं हुई साहब, सब कुछ समय पर मिल गया। हमारे टिकट के रुपये भी नहीं लगे। करीब तीन मिनट तक सीएम ने मक्खन शर्मा से बातचीत की। मक्खन शर्मा तीन महीने से बरवाला में खेतों में मजदूरी करता था।
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एंट्री गेट पर की स्क्रीनिंग
सुबह 10 बजे हरियाणा रोडवेज की बसों से श्रमिकों को हिसार रेलवे स्टेशन पर पहुंचाने का काम शुरू हो गया। सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए पार्किंग में गोल दायरे लगाए गए। 40 बसों से 1200 श्रमिकों को हिसार रेलवे स्टेशन लाया गया। एंट्री गेट पर श्रमिकों की स्क्रीनिंग की गई। हालांकि सैनिटाइजर से हाथ साफ नहीं करवाए गए, जिनके पास मास्क नहीं थे, उन्हें मास्क दिए गए।
इन जिलों के बैठे थे इतने प्रवासी
जिला - श्रमिक
अररिया - 248
पूर्णिया - 339
मधेपुरा - 406
शहरसा - 117
सुपोल - 60
कटिहार - 30
वर्जन
श्रमिक स्पेशल ट्रेन में प्रवासी मजदूरों के साथ आठ आरपीएफ के जवान भेजे गए हैं, जोकि दिल्ली तक जाएंगे। शांतिपूर्वक सभी प्रवासी मजदूरों को ट्रेन में बैठाकर रवाना किया गया।
- बीरबल कुमार, एसएचओ, आरपीएफ
वर्जन
श्रमिक स्पेशल ट्रेन में 1200 प्रवासी मजदूरों को भेजा गया है। सामाजिक दूरी का ध्यान रखा गया है। जो भी प्रवासी श्रमिक रह गए हैं, वो ई-दिशा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाकर पूरी डिटेल डालें। उनकी समस्या का समाधान करवाया जाएगा।
- डॉ. प्रियंका सोनी, उपायुक्त, हिसार
ट्रेन चलने की सूचना पर पहुंच गए थे कई लोग, पुलिस ने लौटाया
जैसे ही बुधवार को हिसार से कटिहार के लिए ट्रेन चलने की सूचना लोगों तक पहुंची तो सुबह ही लोग रेलवे स्टेशन पहुंचने शुरू हो गए, लेकिन बाहर गेट पर तैनात पुलिस ने उन्हें लौटा दिया। उन लोगों ने रजिस्ट्रेशन नहीं करवाए हुए थे। प्रवासी मजदूरों को सिर्फ रोडवेज की ही बसों में रेलवे स्टेशन पहुंचाया गया था। मध्यप्रदेश के एक युवक और महिला भी सूचना मिलने पर स्टेशन पहुंची, लेकिन उन्हें गेट पर ही रोक लिया गया। पुलिसकर्मियों ने उन्हें बताया कि रजिस्ट्रेशन कराए श्रमिक ही जा रहे हैं। इसके बाद युवक और महिला लौट गए।
250 से ज्यादा पुलिसकर्मी रहे तैनात
बुधवार सुबह रेलवे स्टेशन पूरी तरह सील कर दिया था। सिर्फ एक ही गेट से प्रवासी मजदूरों की एंट्री की गई। स्टेशन पर 250 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात रहे। इनमें जीआरपी और आरपीएफ के स्टाफ में शामिल थे। आने-जाने वालों पर पुलिस पैनी नजर बनाए हुई थी। इस अवसर पर जीआरपी से एसएचओ प्रदीप कुमार, डीएसपी गुरदियाल सिंह, एसआई राधेश्याम, एसआई रोहताश, एसआई अनिल, एसआई राजेंद्र, एसआई नरेश कुमार, प्रधान सिपाही सुनीता, आरपीएफ से एएसआई सुरेश कुमार सहित स्टाफ के सदस्य मौजूद रहे।
आज दोपहर दो बजे हिसार से मुजफ्फरपुर के लिए रवाना होगी ट्रेन
वीरवार को भी हिसार से मुजफ्फरपुर के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन रवाना होगी। यह ट्रेन हिसार से दोपहर दो बजे चलेगी। इस ट्रेन में भी करीब 1200 प्रवासी मजदूरों को भेजा जाएगा। इसको लेकर प्रशासन और रेलवे ने पूरी तैयारी कर ली है। वहीं ट्रेन को सैनिटाइज करने के बाद ही प्रवासी मजदूरों को बैठाया जाएगा।
वर्जन
कटिहार के लिए रवाना हुई ट्रेन में 1200 प्रवासी श्रमिकों को भेजा गया है। ट्रेन को पूरी तरह सैनिटाइज किया गया था। प्रवासी श्रमिकों के खाने की व्यवस्था हरियाणा सरकार की ओर से की गई है। वीरवार को एक ट्रेन हिसार से मुजफ्फरपुर के लिए भेजी जाएगी।
- जितेंद्र मीणा, सीनियर डीसीएम, बीकानेर मंडल, रेलवे
वर्जन
श्रमिक ट्रेन में सभी प्रवासी श्रमिकों को निशुल्क यात्रा करवाई गई है। साथ ही उन्हें दो समय का खाना भी दिया गया है।
- दयांनद वर्मा, टीटीआई, रेलवे
कोट्स
मैं बिहार के अररिया जिले से आठ महीने पहले हिसार आया था। मैंने यहां पहले धान की कटाई की। फिर गाजर की खुदाई के काम में लग गया। लॉकडाउन के बाद सब काम बंद हो गए और कमाए पैसे भी खत्म होने लग गए। घर पर भी परिवार के लोगों का बुरा हाल हो गया। अब मुझे काफी खुशी है कि मैं अपने घर पहुंच जाऊंगा। वहां मेरे पास जमीन है। उस पर खेती करूंगा।
- नालवरिषी देव, श्रमिक
कोट्स
मैं बिहार से तीन महीने पहले यहां गेहूं की कटाई व धान की रोपाई के लिए आया था। पहले मौसम के कारण काम लेट शुरू हुआ। अभी 10 दिन ही काम किया था कि लॉकडाउन लग गया। सीसवाल में जिनके यहां रुके थे, उन्होंने ही खाने-पीने और रहने का प्रबंध किया। सरकार और प्रशासन की मदद से अब मैं घर जा रहा हूं। वहां मेरे पास दो एकड़ जमीन है, उसमें खेती करूंगा।
मक्खन शर्मा, श्रमिक
कोट्स
मैं बिहार से यहां गेहूं की कटाई व धान की रोपाई के लिए 19 मार्च को आया था। उसके कुछ बाद ही लॉकडाउन लग गया। मैं यहां कमाई के लिए आया था, लेकिन साथ में जो लाया वह भी खत्म हो गया। अब हरियाणा सरकार व प्रशासन की मदद से वापस घर पहुंच पा रहा हूं। अपने घर जाकर परिवार को संभालेंगे।
- डोमी कुमार, श्रमिक
कोट्स
मैं बिहार से अन्य साथियों के साथ यहां मजदूरी के लिए पहली बार आया था। कुछ दिन बाद ही लॉकडाउन हो गया। कोई भी काम नहीं चला, साथ ही परिवार की भी चिंता होने लगी। पिछले 43 दिन बिना काम और परिवार की चिंता में गुजरे हैं। अब ट्रेन से घर जा रहा हूं।
- केसरी, श्रमिक
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रेलवे स्टेशन से रवाना हुई ट्रेन में बिहार के छह जिलों के प्रवासी श्रमिक भेजे गए हैं। उनको एक समय का खाना भी साथ दिया गया है। हिसार रेलवे स्टेशन पहुंचने पर टिकट देकर पुलिस की निगरानी में प्रवासी मजदूरों को ट्रेन में बैठाया गया। ट्रेन में पुलिस के जवान भी भेजे गए हैं, ताकि किसी प्रकार की कोई व्यवस्था न बिगड़े। प्रत्येक श्रमिक का स्टेशन पहुंचने पर स्क्रीनिंग करके अंदर प्रवेश करवाया गया। सामाजिक दूरी का ध्यान रखा गया और अंदर पुलिस कर्मचारियों द्वारा प्रत्येक श्रमिक का रजिस्ट्रेशन चेक करके बोगियों में चढ़ाया गया।
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सीएम बोले- कोई दिक्कत तो नहीं हुई
दोपहर दो बजे हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने सीआइडी के डीएसपी अजय शर्मा के मोबाइल पर वीडियो कॉल कर अररिया जिले के गांव फतेहपुर निवासी मक्खन शर्मा से बातचीत कर हालचाल जाना। सीएम ने कहा कि तुम्हें कोई परेशानी तो नहीं हुई। समय पर खाना मिला या नहीं। पानी मिला या नहीं। इस पर मक्खन ने कहा - कोई दिक्कत नहीं हुई साहब, सब कुछ समय पर मिल गया। हमारे टिकट के रुपये भी नहीं लगे। करीब तीन मिनट तक सीएम ने मक्खन शर्मा से बातचीत की। मक्खन शर्मा तीन महीने से बरवाला में खेतों में मजदूरी करता था।
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एंट्री गेट पर की स्क्रीनिंग
सुबह 10 बजे हरियाणा रोडवेज की बसों से श्रमिकों को हिसार रेलवे स्टेशन पर पहुंचाने का काम शुरू हो गया। सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए पार्किंग में गोल दायरे लगाए गए। 40 बसों से 1200 श्रमिकों को हिसार रेलवे स्टेशन लाया गया। एंट्री गेट पर श्रमिकों की स्क्रीनिंग की गई। हालांकि सैनिटाइजर से हाथ साफ नहीं करवाए गए, जिनके पास मास्क नहीं थे, उन्हें मास्क दिए गए।
इन जिलों के बैठे थे इतने प्रवासी
जिला - श्रमिक
अररिया - 248
पूर्णिया - 339
मधेपुरा - 406
शहरसा - 117
सुपोल - 60
कटिहार - 30
वर्जन
श्रमिक स्पेशल ट्रेन में प्रवासी मजदूरों के साथ आठ आरपीएफ के जवान भेजे गए हैं, जोकि दिल्ली तक जाएंगे। शांतिपूर्वक सभी प्रवासी मजदूरों को ट्रेन में बैठाकर रवाना किया गया।
- बीरबल कुमार, एसएचओ, आरपीएफ
वर्जन
श्रमिक स्पेशल ट्रेन में 1200 प्रवासी मजदूरों को भेजा गया है। सामाजिक दूरी का ध्यान रखा गया है। जो भी प्रवासी श्रमिक रह गए हैं, वो ई-दिशा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाकर पूरी डिटेल डालें। उनकी समस्या का समाधान करवाया जाएगा।
- डॉ. प्रियंका सोनी, उपायुक्त, हिसार
ट्रेन चलने की सूचना पर पहुंच गए थे कई लोग, पुलिस ने लौटाया
जैसे ही बुधवार को हिसार से कटिहार के लिए ट्रेन चलने की सूचना लोगों तक पहुंची तो सुबह ही लोग रेलवे स्टेशन पहुंचने शुरू हो गए, लेकिन बाहर गेट पर तैनात पुलिस ने उन्हें लौटा दिया। उन लोगों ने रजिस्ट्रेशन नहीं करवाए हुए थे। प्रवासी मजदूरों को सिर्फ रोडवेज की ही बसों में रेलवे स्टेशन पहुंचाया गया था। मध्यप्रदेश के एक युवक और महिला भी सूचना मिलने पर स्टेशन पहुंची, लेकिन उन्हें गेट पर ही रोक लिया गया। पुलिसकर्मियों ने उन्हें बताया कि रजिस्ट्रेशन कराए श्रमिक ही जा रहे हैं। इसके बाद युवक और महिला लौट गए।
250 से ज्यादा पुलिसकर्मी रहे तैनात
बुधवार सुबह रेलवे स्टेशन पूरी तरह सील कर दिया था। सिर्फ एक ही गेट से प्रवासी मजदूरों की एंट्री की गई। स्टेशन पर 250 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात रहे। इनमें जीआरपी और आरपीएफ के स्टाफ में शामिल थे। आने-जाने वालों पर पुलिस पैनी नजर बनाए हुई थी। इस अवसर पर जीआरपी से एसएचओ प्रदीप कुमार, डीएसपी गुरदियाल सिंह, एसआई राधेश्याम, एसआई रोहताश, एसआई अनिल, एसआई राजेंद्र, एसआई नरेश कुमार, प्रधान सिपाही सुनीता, आरपीएफ से एएसआई सुरेश कुमार सहित स्टाफ के सदस्य मौजूद रहे।
आज दोपहर दो बजे हिसार से मुजफ्फरपुर के लिए रवाना होगी ट्रेन
वीरवार को भी हिसार से मुजफ्फरपुर के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन रवाना होगी। यह ट्रेन हिसार से दोपहर दो बजे चलेगी। इस ट्रेन में भी करीब 1200 प्रवासी मजदूरों को भेजा जाएगा। इसको लेकर प्रशासन और रेलवे ने पूरी तैयारी कर ली है। वहीं ट्रेन को सैनिटाइज करने के बाद ही प्रवासी मजदूरों को बैठाया जाएगा।
वर्जन
कटिहार के लिए रवाना हुई ट्रेन में 1200 प्रवासी श्रमिकों को भेजा गया है। ट्रेन को पूरी तरह सैनिटाइज किया गया था। प्रवासी श्रमिकों के खाने की व्यवस्था हरियाणा सरकार की ओर से की गई है। वीरवार को एक ट्रेन हिसार से मुजफ्फरपुर के लिए भेजी जाएगी।
- जितेंद्र मीणा, सीनियर डीसीएम, बीकानेर मंडल, रेलवे
वर्जन
श्रमिक ट्रेन में सभी प्रवासी श्रमिकों को निशुल्क यात्रा करवाई गई है। साथ ही उन्हें दो समय का खाना भी दिया गया है।
- दयांनद वर्मा, टीटीआई, रेलवे
कोट्स
मैं बिहार के अररिया जिले से आठ महीने पहले हिसार आया था। मैंने यहां पहले धान की कटाई की। फिर गाजर की खुदाई के काम में लग गया। लॉकडाउन के बाद सब काम बंद हो गए और कमाए पैसे भी खत्म होने लग गए। घर पर भी परिवार के लोगों का बुरा हाल हो गया। अब मुझे काफी खुशी है कि मैं अपने घर पहुंच जाऊंगा। वहां मेरे पास जमीन है। उस पर खेती करूंगा।
- नालवरिषी देव, श्रमिक
कोट्स
मैं बिहार से तीन महीने पहले यहां गेहूं की कटाई व धान की रोपाई के लिए आया था। पहले मौसम के कारण काम लेट शुरू हुआ। अभी 10 दिन ही काम किया था कि लॉकडाउन लग गया। सीसवाल में जिनके यहां रुके थे, उन्होंने ही खाने-पीने और रहने का प्रबंध किया। सरकार और प्रशासन की मदद से अब मैं घर जा रहा हूं। वहां मेरे पास दो एकड़ जमीन है, उसमें खेती करूंगा।
मक्खन शर्मा, श्रमिक
कोट्स
मैं बिहार से यहां गेहूं की कटाई व धान की रोपाई के लिए 19 मार्च को आया था। उसके कुछ बाद ही लॉकडाउन लग गया। मैं यहां कमाई के लिए आया था, लेकिन साथ में जो लाया वह भी खत्म हो गया। अब हरियाणा सरकार व प्रशासन की मदद से वापस घर पहुंच पा रहा हूं। अपने घर जाकर परिवार को संभालेंगे।
- डोमी कुमार, श्रमिक
कोट्स
मैं बिहार से अन्य साथियों के साथ यहां मजदूरी के लिए पहली बार आया था। कुछ दिन बाद ही लॉकडाउन हो गया। कोई भी काम नहीं चला, साथ ही परिवार की भी चिंता होने लगी। पिछले 43 दिन बिना काम और परिवार की चिंता में गुजरे हैं। अब ट्रेन से घर जा रहा हूं।
- केसरी, श्रमिक

42 - प्रवासी श्रमिकों में महिलाएं और बच्चे न के बराबर थे। बच्चों के लिए खिलौनों की व्यवस्था रेडक्रॉ- फोटो : Hisar

30 - रेलवे प्लेटफार्म पर गाड़ी में चढ़ने से पहले प्रवासियों के रजिस्ट्रेशन की जांच करते पुलिस कर्म?- फोटो : Hisar