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रिश्वत मामले में 20 महीने पहले बर्खास्त एएसआई निकला निर्दोष
Updated Wed, 31 Jan 2018 12:53 AM IST
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अमर उजाला
बरवाला (हिसार)।
करीब 20 महीने पहले बरवाला में विजिलेंस की टीम ने पुलिस के जिस एएसआई धर्मवीर खटकड़ को 15 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था, वह अब जांच में निर्दोष साबित हुआ। एसडीएम और डीएसपी की जांच के बाद बरवाला पुलिस ने अब मामले में बरवाला निवासी सुरेंद्र, वेद प्रकाश, हंसराज और एक महिला सुनहरी देवी के खिलाफ जालसाजी का मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि इस साजिश की कीमत एएसआई को अपनी नौकरी से बर्खास्त होकर चुकानी पड़ी, लेकिन यह मामला भी अब हाईकोर्ट में चल रहा है।
20 मई 2016 को विजिलेंस के तत्कालीन इंस्पेक्टर देवीलाल की टीम ने सुरेंद्र की शिकायत पर धर्मवीर खटकड़ को 15 हजार की रिश्वत लेते हुए बरवाला पुलिस स्टेशन से रंगे हाथों पकड़ा था। खटकड़ पर आरोप था कि सुरेंद्र का सुनहरी देवी, वेदप्रकाश और हंसराज के साथ विवाद था। उनमें समझौता हो गया और धर्मवीर खटकड़ समझौते को लागू करवाने के लिए 15 हजार की रिश्वत मांग रहा था। इसके बाद धर्मवीर को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अश्विन शैणवी ने बर्खास्त कर दिया। मामला हाईकोर्ट में भी चल रहा है। इसके अलावा खुद को निर्दोष साबित करने के लिए धर्मवीर को डीसी और एसपी को सच्चाई बताते हुए शिकायत की। डीसी को दी शिकायत पर 6 अक्तूबर 2017 को एसडीएम ने जांच रिपोर्ट सौंपी। इसमें कहा गया कि सुरेंद्र का सुनहरी देवी, वेद प्रकाश और हंसराज मिलकर बरवाला नगर पालिका की जमीन हड़पना चाहते थे। इसी के लिए इन्होंने जमीनी विवाद की झूठी कहानी गढ़ी और इस कहानी में धर्मवीर खटकड़ को भी फंसा दिया। यह भी सामने आया कि धर्मवीर पर जिस शिकायत की एवज में रिश्वत लेने का आरोप था, उसकी जांच ना तो उसे दी गई थी और ना ही दी जा सकती थी। एसपी को दी शिकायत पर बरवाला के डीएसपी ने जांच की और धर्मवीर की बात को सही माना। इसी के बाद बरवाला पुलिस ने गत 25 जनवरी को इन चारों के खिलाफ जालसाजी का मामला दर्ज किया है। धर्मवीर के मामले में सुरेंद्र और विजिलेंस इंस्पेक्टर देवीलाल की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है। दरअसल सुरेंद्र ने धर्मवीर सहित तीन लोगों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार करवाया था और तीनों ही मामलों में इंस्पेक्टर देवीलाल ने छापा मारा। एक ही शिकायतकर्ता से हर जगह रिश्वत मांगी जाती है और एक ही विजिलेंस इंस्पेक्टर कार्रवाई करता है।
खुद रिश्वत लेते पकड़ा गया सुरेंद्र
जिस सुरेंद्र ने धर्मवीर सहित तीन लोगों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार करवाया, वह अपने साथी फतेहाबाद के गाजूवाला गांव निवासी उमेद के साथ 20 अक्तूबर 2016 को दो लाख रुपये वसूलते हुए गिरफ्तार हो चुका है। यह रिश्वत इन्होंने रजिस्ट्री क्लर्क राकेश से ली, जिसको इन्होंने रिश्वत लेते हुए 8 सितंबर 2016 को पकड़वाया था।
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बरवाला (हिसार)।
करीब 20 महीने पहले बरवाला में विजिलेंस की टीम ने पुलिस के जिस एएसआई धर्मवीर खटकड़ को 15 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था, वह अब जांच में निर्दोष साबित हुआ। एसडीएम और डीएसपी की जांच के बाद बरवाला पुलिस ने अब मामले में बरवाला निवासी सुरेंद्र, वेद प्रकाश, हंसराज और एक महिला सुनहरी देवी के खिलाफ जालसाजी का मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि इस साजिश की कीमत एएसआई को अपनी नौकरी से बर्खास्त होकर चुकानी पड़ी, लेकिन यह मामला भी अब हाईकोर्ट में चल रहा है।
20 मई 2016 को विजिलेंस के तत्कालीन इंस्पेक्टर देवीलाल की टीम ने सुरेंद्र की शिकायत पर धर्मवीर खटकड़ को 15 हजार की रिश्वत लेते हुए बरवाला पुलिस स्टेशन से रंगे हाथों पकड़ा था। खटकड़ पर आरोप था कि सुरेंद्र का सुनहरी देवी, वेदप्रकाश और हंसराज के साथ विवाद था। उनमें समझौता हो गया और धर्मवीर खटकड़ समझौते को लागू करवाने के लिए 15 हजार की रिश्वत मांग रहा था। इसके बाद धर्मवीर को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अश्विन शैणवी ने बर्खास्त कर दिया। मामला हाईकोर्ट में भी चल रहा है। इसके अलावा खुद को निर्दोष साबित करने के लिए धर्मवीर को डीसी और एसपी को सच्चाई बताते हुए शिकायत की। डीसी को दी शिकायत पर 6 अक्तूबर 2017 को एसडीएम ने जांच रिपोर्ट सौंपी। इसमें कहा गया कि सुरेंद्र का सुनहरी देवी, वेद प्रकाश और हंसराज मिलकर बरवाला नगर पालिका की जमीन हड़पना चाहते थे। इसी के लिए इन्होंने जमीनी विवाद की झूठी कहानी गढ़ी और इस कहानी में धर्मवीर खटकड़ को भी फंसा दिया। यह भी सामने आया कि धर्मवीर पर जिस शिकायत की एवज में रिश्वत लेने का आरोप था, उसकी जांच ना तो उसे दी गई थी और ना ही दी जा सकती थी। एसपी को दी शिकायत पर बरवाला के डीएसपी ने जांच की और धर्मवीर की बात को सही माना। इसी के बाद बरवाला पुलिस ने गत 25 जनवरी को इन चारों के खिलाफ जालसाजी का मामला दर्ज किया है। धर्मवीर के मामले में सुरेंद्र और विजिलेंस इंस्पेक्टर देवीलाल की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है। दरअसल सुरेंद्र ने धर्मवीर सहित तीन लोगों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार करवाया था और तीनों ही मामलों में इंस्पेक्टर देवीलाल ने छापा मारा। एक ही शिकायतकर्ता से हर जगह रिश्वत मांगी जाती है और एक ही विजिलेंस इंस्पेक्टर कार्रवाई करता है।
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खुद रिश्वत लेते पकड़ा गया सुरेंद्र
जिस सुरेंद्र ने धर्मवीर सहित तीन लोगों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार करवाया, वह अपने साथी फतेहाबाद के गाजूवाला गांव निवासी उमेद के साथ 20 अक्तूबर 2016 को दो लाख रुपये वसूलते हुए गिरफ्तार हो चुका है। यह रिश्वत इन्होंने रजिस्ट्री क्लर्क राकेश से ली, जिसको इन्होंने रिश्वत लेते हुए 8 सितंबर 2016 को पकड़वाया था।
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