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Hisar News: हर महीने सफाई पर तीन करोड़ साफ, सड़कें गंदी
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पुरानी सब्जी मंडी रोड स्थित लगे गंदगी के ढेर।
हिसार। शहर की स्वच्छता पर हर माह करीब तीन करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं लेकिन स्वच्छ सर्वेक्षण टीम के लौटने के महज 15 दिन बाद ही हालात फिर बिगड़ गए हैं। सड़कों के किनारे, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर कचरे के ढेर नजर आने लगे हैं। नगर निगम के स्वच्छता संबंधी स्लोगन के नीचे जमा कचरा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहा है।
स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के तहत केंद्र सरकार की टीम ने 13 दिनों तक शहर का विस्तृत निरीक्षण किया था। टीम ने बस अड्डा, रेलवे स्टेशन, सेक्टर, बाजार, औद्योगिक क्षेत्र, गुजरी महल, ब्लू बर्ड झील, सिटी थाना पार्किंग, सार्वजनिक शौचालय, डंपिंग स्टेशन, कचरा प्रोसेसिंग प्लांट और कचरा संग्रहण केंद्रों का जायजा लिया। इसके अलावा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, मीट मार्केट, पार्क, सामुदायिक केंद्र, अस्पताल तथा 20 से अधिक कॉलोनियों का भी निरीक्षण किया गया। शहर से रोजाना करीब 180 टन कचरा निकाला जा रहा है।
सर्वेक्षण के दौरान नगर निगम की सफाई व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय नजर आई। गलियों और सड़कों की नियमित सफाई की गई, सार्वजनिक शौचालयों को चमकाया गया और प्रमुख मार्गों पर निर्धारित समय पर सफाई कर्मचारी तैनात रहे। हालांकि टीम के लौटने के बाद स्थिति फिर पहले जैसी होती दिखाई दे रही है।
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12 जून तक चला विशेष अभियान, फिर थम गई रफ्तार
नगर निगम ने 7 से 12 जून तक वार्ड 1 से 20 में विशेष जागरूकता अभियान चलाया था। इसके तहत लोगों को गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष श्रेणी के कचरे को अलग-अलग करने का प्रशिक्षण दिया गया। होम कम्पोस्टिंग को भी बढ़ावा दिया गया, लेकिन अभियान समाप्त होने के बाद इसकी गति धीमी पड़ गई।
कहां गईं स्वच्छता समितियां
स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन के लिए वार्ड स्तर पर स्वच्छता समितियों का गठन किया गया था। पार्षदों के नेतृत्व में इन समितियों को स्वच्छता निगरानी और जनजागरूकता की जिम्मेदारी दी गई थी। घरों, दुकानों, कार्यालयों, होटलों और संस्थानों में कचरा पृथक्करण सुनिश्चित कराने का दावा भी किया गया था, लेकिन वर्तमान हालात में इन समितियों की सक्रियता नजर नहीं आ रही।
अब तक स्वच्छता सर्वेक्षण में मिली रैंकिंग
वर्ष
देश में रैंकिंग
प्रदेश में रैंकिंग
2024 59वीं 28वीं
2023 194वीं 7वीं
2022 115वीं 8वीं
2021 165वीं 5वीं
2020 105वीं 6वीं
2019 173वीं 7वीं
2018 146वीं 5वीं
2017 291वीं 6वीं
शहर में स्वच्छता पर खर्च
वार्ड 1 से 10 डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण : 6 करोड़ रुपये वार्षिक
वार्ड 11 से 20 डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण : 6 करोड़ रुपये वार्षिक
300 पक्के व 650 कच्चे कर्मचारियों का वेतन : 20 करोड़ रुपये वार्षिक
निगम की गाड़ियों के चालक व डीजल पर खर्च : 2 करोड़ रुपये वार्षिक
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नगर निगम शहर की स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। कुछ स्थानों पर लोग अब भी खुले में कचरा फेंक रहे हैं। बार-बार जागरूक करने के बावजूद अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा। सफाई कर्मचारियों की 15 दिन की हड़ताल के दौरान बनी आदतों का असर अब भी दिखाई दे रहा है। पहले गीला और सूखा कचरा अलग करने में अच्छी सफलता मिली थी, लेकिन अब फिर दोनों को मिलाकर फेंकने और सड़कों पर कचरा डालने की शिकायतें मिल रही हैं।
- डॉ. प्रदीप हुड्डा, अतिरिक्त निगम आयुक्त, हिसार।
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स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के तहत केंद्र सरकार की टीम ने 13 दिनों तक शहर का विस्तृत निरीक्षण किया था। टीम ने बस अड्डा, रेलवे स्टेशन, सेक्टर, बाजार, औद्योगिक क्षेत्र, गुजरी महल, ब्लू बर्ड झील, सिटी थाना पार्किंग, सार्वजनिक शौचालय, डंपिंग स्टेशन, कचरा प्रोसेसिंग प्लांट और कचरा संग्रहण केंद्रों का जायजा लिया। इसके अलावा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, मीट मार्केट, पार्क, सामुदायिक केंद्र, अस्पताल तथा 20 से अधिक कॉलोनियों का भी निरीक्षण किया गया। शहर से रोजाना करीब 180 टन कचरा निकाला जा रहा है।
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सर्वेक्षण के दौरान नगर निगम की सफाई व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय नजर आई। गलियों और सड़कों की नियमित सफाई की गई, सार्वजनिक शौचालयों को चमकाया गया और प्रमुख मार्गों पर निर्धारित समय पर सफाई कर्मचारी तैनात रहे। हालांकि टीम के लौटने के बाद स्थिति फिर पहले जैसी होती दिखाई दे रही है।
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12 जून तक चला विशेष अभियान, फिर थम गई रफ्तार
नगर निगम ने 7 से 12 जून तक वार्ड 1 से 20 में विशेष जागरूकता अभियान चलाया था। इसके तहत लोगों को गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष श्रेणी के कचरे को अलग-अलग करने का प्रशिक्षण दिया गया। होम कम्पोस्टिंग को भी बढ़ावा दिया गया, लेकिन अभियान समाप्त होने के बाद इसकी गति धीमी पड़ गई।
कहां गईं स्वच्छता समितियां
स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन के लिए वार्ड स्तर पर स्वच्छता समितियों का गठन किया गया था। पार्षदों के नेतृत्व में इन समितियों को स्वच्छता निगरानी और जनजागरूकता की जिम्मेदारी दी गई थी। घरों, दुकानों, कार्यालयों, होटलों और संस्थानों में कचरा पृथक्करण सुनिश्चित कराने का दावा भी किया गया था, लेकिन वर्तमान हालात में इन समितियों की सक्रियता नजर नहीं आ रही।
अब तक स्वच्छता सर्वेक्षण में मिली रैंकिंग
वर्ष
देश में रैंकिंग
प्रदेश में रैंकिंग
2024 59वीं 28वीं
2023 194वीं 7वीं
2022 115वीं 8वीं
2021 165वीं 5वीं
2020 105वीं 6वीं
2019 173वीं 7वीं
2018 146वीं 5वीं
2017 291वीं 6वीं
शहर में स्वच्छता पर खर्च
वार्ड 1 से 10 डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण : 6 करोड़ रुपये वार्षिक
वार्ड 11 से 20 डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण : 6 करोड़ रुपये वार्षिक
300 पक्के व 650 कच्चे कर्मचारियों का वेतन : 20 करोड़ रुपये वार्षिक
निगम की गाड़ियों के चालक व डीजल पर खर्च : 2 करोड़ रुपये वार्षिक
नगर निगम शहर की स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। कुछ स्थानों पर लोग अब भी खुले में कचरा फेंक रहे हैं। बार-बार जागरूक करने के बावजूद अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा। सफाई कर्मचारियों की 15 दिन की हड़ताल के दौरान बनी आदतों का असर अब भी दिखाई दे रहा है। पहले गीला और सूखा कचरा अलग करने में अच्छी सफलता मिली थी, लेकिन अब फिर दोनों को मिलाकर फेंकने और सड़कों पर कचरा डालने की शिकायतें मिल रही हैं।
- डॉ. प्रदीप हुड्डा, अतिरिक्त निगम आयुक्त, हिसार।