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Fatehabad News: शहर के सार्वजनिक शौचालयों की सफाई पर फंसेगा पेंच, प्रधान ने ठेके पर देने से किया मना
Thu, 24 Oct 2024 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 24 Oct 2024 11:13 PM IST
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फतेहाबाद। शहर के सार्वजनिक शौचालयों की सफाई और देखरेख के लिए दिए जाने वाले ठेके को लेकर एक बार फिर से पेंच फंसेगा। नगर परिषद प्रधान राजेंद्र सिंह खिंची ने किसी भी निजी एजेंसी को ठेके पर देने से मना कर दिया है। प्रधान ने ईओ सुरेंद्र कुमार को पत्र लिखकर निर्देश जारी कर दिए हैं।
प्रधान ने स्पष्ट निर्देश दिए है कि ठेके पर न देकर फिलहाल नगर परिषद ने खुद कर्मचारी रखकर व्यवस्था बना रखी है उसे ही लागू रखा जाए। पिछले साल शौचालयों का ठेका 48 लाख रुपये में देने के बावजूद सफाई न होने और गड़बड़ी के आरोप लगते रहे थे। इसके चलते इस बार नगर परिषद अधिकारी एजेंसी को शौचालयों की सफाई का ठेका देने से कतरा रहे हैं। व्यवस्था बनाने के लिए नगर परिषद ने दो माह के लिए 15 कर्मचारी रखे थे और इनका कार्यकाल 31 अक्तूबर को खत्म हो रहा है। हालांकि नगर परिषद ने अभी तक न तो टेंडर की प्रक्रिया शुरू की है और न ही स्वयं सहायता समूह को देने की योजना बनाई है।
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शहर में है 15 सार्वजनिक शौचालय
नगर परिषद के शहर में पुराना बस स्टैंड के सामने, पुराना रेस्ट हाउस के सामने, थाना रोड, नगर परिषद कार्यालय, पपीहा पार्क, बीघड़ रोड, लाजपत चौक, स्वर्ण हेरिटेज पार्क आदि में सार्वजनिक शौचालय और यूरिन प्वाइंट शामिल हैं।
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- स्वयं सहायता समूह को देने की योजना नहीं चढ़ी सिरे
नगर परिषद ने इस बार सार्वजनिक शौचालयों को स्वयं सहायता समूह को देने की योजना बनाई थी। लेकिन ये सिरे नहीं चढ़ पाई। अधिकारियों ने पायलट प्रोजेक्ट पर भी किसी शौचालय को शामिल नहीं किया।
- 18 लाख रुपये महंगे में दिया गया था शौचालयों का ठेका
नगर परिषद ने वर्ष 2023 में सार्वजनिक शौचालयों का ठेका करीब 18 लाख रुपये वर्ष 2022 के मुकाबले महंगा दिया था। इसके चलते ठेका पूरा साल विवादों में रहा। वर्ष 2022 में ठेका 25 लाख रुपये में एजेंसी को दिया गया था और वर्ष 2023 में 18 लाख रुपये बढ़ाकर 43 लाख रुपये में दिया गया।
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सार्वजनिक शौचालयों की सफाई का ठेका समाप्त हो चुका है और अब पिछले दो माह से नगर परिषद अपने स्तर पर सार्वजनिक शौचालयों की सफाई अपने स्तर पर करवा रहा है और सुचारू रूप से भी हो रही है। ईओ को पत्र लिखकर कहा गया है कि सार्वजनिक शौचालयों की साफ-सफाई का टेंडर न लगाया जाए और अपने स्तर पर ही करवाई जाए।
- राजेंद्र सिंह खिंची, प्रधान, नगर परिषद
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प्रधान ने स्पष्ट निर्देश दिए है कि ठेके पर न देकर फिलहाल नगर परिषद ने खुद कर्मचारी रखकर व्यवस्था बना रखी है उसे ही लागू रखा जाए। पिछले साल शौचालयों का ठेका 48 लाख रुपये में देने के बावजूद सफाई न होने और गड़बड़ी के आरोप लगते रहे थे। इसके चलते इस बार नगर परिषद अधिकारी एजेंसी को शौचालयों की सफाई का ठेका देने से कतरा रहे हैं। व्यवस्था बनाने के लिए नगर परिषद ने दो माह के लिए 15 कर्मचारी रखे थे और इनका कार्यकाल 31 अक्तूबर को खत्म हो रहा है। हालांकि नगर परिषद ने अभी तक न तो टेंडर की प्रक्रिया शुरू की है और न ही स्वयं सहायता समूह को देने की योजना बनाई है।
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शहर में है 15 सार्वजनिक शौचालय
नगर परिषद के शहर में पुराना बस स्टैंड के सामने, पुराना रेस्ट हाउस के सामने, थाना रोड, नगर परिषद कार्यालय, पपीहा पार्क, बीघड़ रोड, लाजपत चौक, स्वर्ण हेरिटेज पार्क आदि में सार्वजनिक शौचालय और यूरिन प्वाइंट शामिल हैं।
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- स्वयं सहायता समूह को देने की योजना नहीं चढ़ी सिरे
नगर परिषद ने इस बार सार्वजनिक शौचालयों को स्वयं सहायता समूह को देने की योजना बनाई थी। लेकिन ये सिरे नहीं चढ़ पाई। अधिकारियों ने पायलट प्रोजेक्ट पर भी किसी शौचालय को शामिल नहीं किया।
- 18 लाख रुपये महंगे में दिया गया था शौचालयों का ठेका
नगर परिषद ने वर्ष 2023 में सार्वजनिक शौचालयों का ठेका करीब 18 लाख रुपये वर्ष 2022 के मुकाबले महंगा दिया था। इसके चलते ठेका पूरा साल विवादों में रहा। वर्ष 2022 में ठेका 25 लाख रुपये में एजेंसी को दिया गया था और वर्ष 2023 में 18 लाख रुपये बढ़ाकर 43 लाख रुपये में दिया गया।
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सार्वजनिक शौचालयों की सफाई का ठेका समाप्त हो चुका है और अब पिछले दो माह से नगर परिषद अपने स्तर पर सार्वजनिक शौचालयों की सफाई अपने स्तर पर करवा रहा है और सुचारू रूप से भी हो रही है। ईओ को पत्र लिखकर कहा गया है कि सार्वजनिक शौचालयों की साफ-सफाई का टेंडर न लगाया जाए और अपने स्तर पर ही करवाई जाए।
- राजेंद्र सिंह खिंची, प्रधान, नगर परिषद