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किसानों ने ओलावृष्टि से हुए नुक्सान के मुआवजे को लेकर पटवारी पर लगाया रिश्वत मांगने का आरोप

Fri, 22 Sep 2017 12:00 AM IST
Updated Fri, 22 Sep 2017 12:00 AM IST
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किसानों ने ओलावृष्टि से हुए नुक्सान के मुआवजे को लेकर पटवारी पर लगाया रिश्वत मांगने का आरोप
किसानों ने पटवारी पर लगाया रिश्वत मांगने का आरोप
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अमर उजाला ब्यूरो
रतिया। गांव कमाना के आधा दर्जन के करीब किसानों ने गांव के पटवारी पर 2016 में ओलावृष्टि से नष्ट हुई उनकी फसल की गिरदावरी करने की एवज में रिश्वत मांगने के आरोप लगाए हैं। किसान पहले ही इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों के साथ सीएम विंडो पर भी कर चुके हैं। किसानों का आरोप है कि सीएम विंडों में शिकायत देने के बाद भी आरोपी पटवारी को अधिकारियों की मिलीभगत से बचाया जा रहा है।
गांव कमाना के किसान मलकीत सिंह, गुरपाल सिंह, अमर सिंह, नछत्तर सिंह, रोशन सिंह, परषोतम सिंह आदि ने बताया कि वर्ष 2016 में हुई ओलावृष्टि के कारण उनकी गेहूं की फसल नष्ट हो गई थी। सरकार के आदेशों के बाद प्रशासन ने संबंधित गांवों के पटवारियों को ही नष्ट हुई फसल की गिरदावरी करने के आदेश दिए थे। इसके चलते गांव के तत्कालीन पटवारी जग्गू राम ने गांव कमाना में गिरदावरी का काम शुरू किया। इन किसानों का आरोप है कि पटवारी जग्गू राम ने किसानों से उनकी फसल की गिरदावरी के एवज में प्रति एकड़ एक हजार रुपये रिश्वत लेनी शुरू कर दी। उन्होंने मना किया तो पटवारी ने उनकी वास्तव में खराब हुई फसल की गिरदावरी नहीं की। इस वजह से उन्हें मुआवजा नहीं मिला।
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किसानों ने बताया कि इसके बाद उन्होंने पटवारी जग्गू की शिकायत उपायुक्त कार्यालय में की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद किसानों ने मामले की शिकायत सीएम विंडो पर की। आरोप लगाया कि शिकायत के बाद सरकार के आदेश पर बनी सीएम विंडो शिकायत निवारण कमेटी के सदस्य सदस्य जगजीत फौजी को मामले की जांच सौंपी गई। किसानों ने बताया कि जगजीत फौजी ने गांव में आकर मामले की जांच की तो मामले में पटवारी को ही दोषी पाया। किसानों दावा किया कि पटवारी को बचाने के लिए प्रशासन ने कमेटी के एक अन्य सदस्य भीम लांबा के हस्ताक्षरयुक्त एक प्रतिलिपि आगे भेज दी। उसमें पटवारी को क्लीन चिट दी गई थी। किसानों ने आरोप लगाया कि पटवारी जग्गू राम को बचाने के लिए प्रशासन ने रिपोर्ट को ही बदल दिया।
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क्या कहते है जांच अधिकारी
इस मामले के जांच अधिकारी कैप्टन जगजीत फौजी ने बताया कि उनके पास यह मामला जांच के लिए आया था। वे स्वयं गांव में गए थे। जांच के दौरान उन्होंने पटवारी जग्गू राम को दोषी पाया था। उन्होंने आगामी जांच के लिए उच्च अधिकारियों से लिखित में सिफारिश की थी।

क्या कहते है निवारण कमेटी अध्यक्ष भीम लांबा
इस मामले की जांच रिपोर्ट में पटवारी को क्लीन चिट देने वाली प्रतिलिपि पर अपने हस्ताक्षर होने के बारे में कमेटी अध्यक्ष भीम लांबा ने कहा कि मामले की जांच के दौरान उनको गलत तथ्य दिए गए थे। इस मामले को लेकर शुक्रवार को रतिया के एसडीएम कार्यालय में दोनों पक्षों की बैठक बुलाई गई है।
आरोप निराधार है: जग्गू राम
गांव कमाना के तत्कालीन पटवारी जग्गू राम ने कहा कि किसानों के आरोप निराधार हैं। मामले की जांच में कमेटी के अध्यक्ष ने उनको क्लीन चिट भी दी है।
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