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हड़ताल : पुलिस ने की जबरदस्ती गिरफ्तारी तो बसों की चाबियां साथ ले गए रोडवेज कर्मचारी, सुबह पुलिस ने जुगाड़ से चलाई 15 बसें, फिर
Updated Thu, 06 Sep 2018 12:46 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। बस स्टैंड परिसर में बुधवार अलसुबह 700 निजी बसों को परमिट देने के खिलाफ धरने पर बैठे हड़ताली रोडवेज कर्मचारियों को हटाने के लिए पुलिस ने हलका बल प्रयोग करते हुए कर्मचारियों का धरना जबरदस्ती उठवा दिया और बसें चलवाने का प्रयास किया। इसके विरोध में हड़ताली कर्मचारी बसों के आगे लेट गए तो पुलिस कर्मचारियों ने रोडवेज कर्मचारियों को घसीट-घसीट कर बसों के रास्ते से हटवाया और रोडवेज कर्मचारी नेता सूबे सिंह सहित 43 हड़ताली कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया। सभी गिरफ्तार किए गए रोडवेज कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस ने एस्मा एक्ट के तहत मामला दर्ज कर दोपहर को कोर्ट में पेश किया जहां से कोर्ट ने सभी कर्मचारियों को हिसार जेल भेज दिया गया।
इससे पहले बस स्टैंड पर गिरफ्तारी के दौरान भी हड़ताली रोडवेज कर्मचारियों ने पुलिस वैन में बैठते बैठते भी बसों की चाबियां निकालकर अपने पास रख ली। इसके चलते रोडवेज प्रशासन व पुलिस अधिकारियों को बसों को चलवाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि एक बारगी पुलिस के ड्राइवरों ने जुगाड़ के जरिए 6 बसों को स्टार्ट करवा दिया। इसके बाद दोपहर तक लगभग सभी रूटों पर बसों का सामान्य परिचालन शुरू हो गया। उधर पुलिस द्वारा बल प्रयोग करने की विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने निंदा की है। हालांकि मौके पर डयूटी मैजिस्ट्रेट के रूप में मौजूद बीडीपीओ सोमबीर कादियान ने लाठीचार्ज से साफ इंकार किया है।
अलसुबह तीन बजे बस स्टैंड पर भारी पुलिसबल लेकर पहुंचे डीएसपी पूनियां
हड़ताल को लेकर जिला प्रशासन की रणनीति पहले से ही तय थी। इसी के तहत डीएसपी धर्मवीर पूनियां भारी पुलिस बल लेकर अलसुबह लगभग तीन बजे ही बस स्टैंड पहुंच गए और धरने पर बैठे हड़ताली कर्मचारियों को चारों ओर से घेर लिया लेकिन उनके खिलाफ कोई एक्शन ना लेते हुए उनसे कई बार धरना समाप्त करने को कहा। इस मौके पर डयूटी मैजिस्ट्रेट सोमबीर कादियान भी उनके साथ रहे। इस तरह लगभग दो घंटे तक पुलिस ने समय निकालते हुए एकाएक सुबह साढ़े पांच बजते ही बसें निकालने का प्रयास किया। लेकिन रोडवेज कर्मचारी इससे पहले कुछ समझ पाते, इससे पहले ही पुलिसकर्मियों ने लाठियों की मदद से उनको पीछे की ओर धकेल दिया। पुलिस का घेरा तोड़कर रोडवेज कर्मचारी नेता सूबे सिंह एक बस के सामने लेट गए लेकिन एसएचओ रूपेश चौधरी व इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह ने उनको उठाकर पुलिस की गाड़ी में डाल दिया। इसी तरह बाकी लोगों को भी पुलिस बस में जबरदस्ती डालकर पुलिस लाइन ले जाया गया। जहां उनको दोपहर बाद तक एडमिन ब्लॉक में नजर बंद रखा गया। इस बीच पुलिस व रोडवेज प्रशासन ने बसों को अड्डे से बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया।
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सिर्फ दलबीर किरमारा गुट व इंटक कर्मचारियों ने रखी हड़ताल, कच्चे और प्राइवेट ड्राइवरों के सहारे चली बसें
हड़ताल की काल आल हरियाणा वर्कर यूनियन, हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ, भारतीय मजदूर संघ, मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन एवं इंटक से जुड़ी रोडवेज वर्कर यूनियनों ने की थी। इसमें मुख्ययत: दलबीर किरमारा का गुट एवं इंटक से जुड़े कर्मचारी हड़ताल में सबसे ज्यादा मुखर रहे। हालांकि दूसरी यूनियनों के सदस्यों ने इस हड़ताल का ना तो विरोध किया और ना ही समर्थन किया। सुबह भी बस स्टैंड पर दूसरी यूनियनों के कोई सदस्य मौजूद नहीं रहे। इसके चलते बस स्टैंड पर रोडवेज और पुलिस प्रशासन को ड्राइवरों की खासी कमी महसूस हुई। रोडवेज प्रशासन ने बाद में कच्चे कर्मचारियों व निजी ड्राइवरों के सहारे तकरीबन 20 से 25 रोडवेज बसें निकाल दी। दोपहर बाद तक इनकी संख्या बढ़कर 40 से 50 बसों तक पहुंच गई।
गिरफ्तार रोडवेज कर्मचारियों को पुलिस ने पिलाई चाय, साथियों ने खिलाए केले
अलसुबह बस स्टैंड परिसर से गिरफ्तार किए गए रोडवेज कर्मचारी नेताओं व कर्मचारियों को पुलिस वैन में भरकर पुलिस लाइन में ले जाया गया। कर्मचारी नेता कहीं दीवार फांदकर वापस बस स्टैंड ना आ जाएं, इसके मद्देनजर उनके पुलिस लाइन एडमिन ब्लॉक में जाते ही पुलिस लाइन के दरवाजे बंद कर बाहर पुलिस के कमांडो तैनात कर दिए गए। पुलिस लाइन में गिरफ्तार कर्मचारियों को पुलिस ने दो बार चाय पिलाई। जबकि बाद में उनसे मिलने पहुंचे अन्य रोडवेज नेता उनके खाने के लिए केले व अन्य खाद्य सामग्री लेकर पुलिस लाइन में मिलने पहुंचे।
वर्जन
कुछ रोडवेज कर्मचारियों ने हड़ताल करने का प्रयास किया था, लेकिन उनका प्रयास विफल रहा है। बुधवार को डिपो की कुल 165 बसों में से 138 बसें अपने निर्धारित रूटों पर चली हैं। सुबह थोड़ी दिक्कत आई थी क्योंकि कई बसों की चाबियां इधर-उधर थी, लेकिन बाद में व्यवस्था को सुचारू कर दिया गया।
राहुल मित्तल, रोडवेज महाप्रबंधक, फतेहाबाद।
हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार हमने हड़ताल करने वाले कर्मचारियों को धरना खत्म करने का आग्रह किया था लेकिन हड़ताली कर्मचारी बसों के आगे लेटने लगे जिसके लिए उन्हें जबरदस्ती बसों के आगे से हटवाना पड़ा ताकि उन्हें कोई चोट ना लगे। जब उन्होंने इसका भी विरोध किया तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया है। सभी 43 कर्मचारियों के खिलाफ एस्मा एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में पेश किया था जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
डीएसपी धर्मवीर पूनियां।
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फतेहाबाद। बस स्टैंड परिसर में बुधवार अलसुबह 700 निजी बसों को परमिट देने के खिलाफ धरने पर बैठे हड़ताली रोडवेज कर्मचारियों को हटाने के लिए पुलिस ने हलका बल प्रयोग करते हुए कर्मचारियों का धरना जबरदस्ती उठवा दिया और बसें चलवाने का प्रयास किया। इसके विरोध में हड़ताली कर्मचारी बसों के आगे लेट गए तो पुलिस कर्मचारियों ने रोडवेज कर्मचारियों को घसीट-घसीट कर बसों के रास्ते से हटवाया और रोडवेज कर्मचारी नेता सूबे सिंह सहित 43 हड़ताली कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया। सभी गिरफ्तार किए गए रोडवेज कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस ने एस्मा एक्ट के तहत मामला दर्ज कर दोपहर को कोर्ट में पेश किया जहां से कोर्ट ने सभी कर्मचारियों को हिसार जेल भेज दिया गया।
इससे पहले बस स्टैंड पर गिरफ्तारी के दौरान भी हड़ताली रोडवेज कर्मचारियों ने पुलिस वैन में बैठते बैठते भी बसों की चाबियां निकालकर अपने पास रख ली। इसके चलते रोडवेज प्रशासन व पुलिस अधिकारियों को बसों को चलवाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि एक बारगी पुलिस के ड्राइवरों ने जुगाड़ के जरिए 6 बसों को स्टार्ट करवा दिया। इसके बाद दोपहर तक लगभग सभी रूटों पर बसों का सामान्य परिचालन शुरू हो गया। उधर पुलिस द्वारा बल प्रयोग करने की विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने निंदा की है। हालांकि मौके पर डयूटी मैजिस्ट्रेट के रूप में मौजूद बीडीपीओ सोमबीर कादियान ने लाठीचार्ज से साफ इंकार किया है।
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अलसुबह तीन बजे बस स्टैंड पर भारी पुलिसबल लेकर पहुंचे डीएसपी पूनियां
हड़ताल को लेकर जिला प्रशासन की रणनीति पहले से ही तय थी। इसी के तहत डीएसपी धर्मवीर पूनियां भारी पुलिस बल लेकर अलसुबह लगभग तीन बजे ही बस स्टैंड पहुंच गए और धरने पर बैठे हड़ताली कर्मचारियों को चारों ओर से घेर लिया लेकिन उनके खिलाफ कोई एक्शन ना लेते हुए उनसे कई बार धरना समाप्त करने को कहा। इस मौके पर डयूटी मैजिस्ट्रेट सोमबीर कादियान भी उनके साथ रहे। इस तरह लगभग दो घंटे तक पुलिस ने समय निकालते हुए एकाएक सुबह साढ़े पांच बजते ही बसें निकालने का प्रयास किया। लेकिन रोडवेज कर्मचारी इससे पहले कुछ समझ पाते, इससे पहले ही पुलिसकर्मियों ने लाठियों की मदद से उनको पीछे की ओर धकेल दिया। पुलिस का घेरा तोड़कर रोडवेज कर्मचारी नेता सूबे सिंह एक बस के सामने लेट गए लेकिन एसएचओ रूपेश चौधरी व इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह ने उनको उठाकर पुलिस की गाड़ी में डाल दिया। इसी तरह बाकी लोगों को भी पुलिस बस में जबरदस्ती डालकर पुलिस लाइन ले जाया गया। जहां उनको दोपहर बाद तक एडमिन ब्लॉक में नजर बंद रखा गया। इस बीच पुलिस व रोडवेज प्रशासन ने बसों को अड्डे से बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया।
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सिर्फ दलबीर किरमारा गुट व इंटक कर्मचारियों ने रखी हड़ताल, कच्चे और प्राइवेट ड्राइवरों के सहारे चली बसें
हड़ताल की काल आल हरियाणा वर्कर यूनियन, हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ, भारतीय मजदूर संघ, मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन एवं इंटक से जुड़ी रोडवेज वर्कर यूनियनों ने की थी। इसमें मुख्ययत: दलबीर किरमारा का गुट एवं इंटक से जुड़े कर्मचारी हड़ताल में सबसे ज्यादा मुखर रहे। हालांकि दूसरी यूनियनों के सदस्यों ने इस हड़ताल का ना तो विरोध किया और ना ही समर्थन किया। सुबह भी बस स्टैंड पर दूसरी यूनियनों के कोई सदस्य मौजूद नहीं रहे। इसके चलते बस स्टैंड पर रोडवेज और पुलिस प्रशासन को ड्राइवरों की खासी कमी महसूस हुई। रोडवेज प्रशासन ने बाद में कच्चे कर्मचारियों व निजी ड्राइवरों के सहारे तकरीबन 20 से 25 रोडवेज बसें निकाल दी। दोपहर बाद तक इनकी संख्या बढ़कर 40 से 50 बसों तक पहुंच गई।
गिरफ्तार रोडवेज कर्मचारियों को पुलिस ने पिलाई चाय, साथियों ने खिलाए केले
अलसुबह बस स्टैंड परिसर से गिरफ्तार किए गए रोडवेज कर्मचारी नेताओं व कर्मचारियों को पुलिस वैन में भरकर पुलिस लाइन में ले जाया गया। कर्मचारी नेता कहीं दीवार फांदकर वापस बस स्टैंड ना आ जाएं, इसके मद्देनजर उनके पुलिस लाइन एडमिन ब्लॉक में जाते ही पुलिस लाइन के दरवाजे बंद कर बाहर पुलिस के कमांडो तैनात कर दिए गए। पुलिस लाइन में गिरफ्तार कर्मचारियों को पुलिस ने दो बार चाय पिलाई। जबकि बाद में उनसे मिलने पहुंचे अन्य रोडवेज नेता उनके खाने के लिए केले व अन्य खाद्य सामग्री लेकर पुलिस लाइन में मिलने पहुंचे।
वर्जन
कुछ रोडवेज कर्मचारियों ने हड़ताल करने का प्रयास किया था, लेकिन उनका प्रयास विफल रहा है। बुधवार को डिपो की कुल 165 बसों में से 138 बसें अपने निर्धारित रूटों पर चली हैं। सुबह थोड़ी दिक्कत आई थी क्योंकि कई बसों की चाबियां इधर-उधर थी, लेकिन बाद में व्यवस्था को सुचारू कर दिया गया।
राहुल मित्तल, रोडवेज महाप्रबंधक, फतेहाबाद।
हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार हमने हड़ताल करने वाले कर्मचारियों को धरना खत्म करने का आग्रह किया था लेकिन हड़ताली कर्मचारी बसों के आगे लेटने लगे जिसके लिए उन्हें जबरदस्ती बसों के आगे से हटवाना पड़ा ताकि उन्हें कोई चोट ना लगे। जब उन्होंने इसका भी विरोध किया तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया है। सभी 43 कर्मचारियों के खिलाफ एस्मा एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में पेश किया था जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
डीएसपी धर्मवीर पूनियां।