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70 फीसदी कर्मचारियों ने रोडवेज कर्मचारियों के समर्थन में लिया सामुहिक अवकाश, किया रोष प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
Updated Sat, 27 Oct 2018 01:02 AM IST
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70 फीसदी कर्मियों ने किया सामूहिक अवकाश, प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। रोडवेज कर्मचारियों के समर्थन व रोडवेज में निजी बसों के विरोध में विभिन्न विभागों के करीब 70 फीसदी कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश लेकर सरकार का विरोध किया। शुक्रवार को जिलेभर के कर्मचारी संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया व डीसी को ज्ञापन देने लघु सचिवालय पहुंचे। सभी कर्मचारियों सचिवालय के गेट पर ही सुरक्षा बलों ने उन्हें अंदर जाने से मना कर दिया। जिससे हजारों कर्मी गेट पर ही धरने पर बैठ गए। सुरक्षा कर्मियों ने कर्मचारी नेताओं से कहा कि वह 5 सदस्यों का एक शिष्टमंडल लेकर डीसी को ज्ञापन देने चले जाएं। लेकिन कर्मचारी नेताओं ने इससे साफ इंकार कर दिया। तब प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार विजय कुमार ज्ञापन लेने पहुंचे तो कर्मचारियों ने यह कहकर उन्हें ज्ञापन देने से इंकार कर दिया कि डीसी के पास राहगीरी के लिए समय है, लेकिन पब्लिक के लिए नहीं। कर्मचारियों की जिद के चलते करीब 10 मिनट बाद डीसी डॉ. जेके आभीर कर्मचारियों के बीच पहुंचे और ज्ञापन लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा, सीटू, शिक्षक तालमेल कमेटी के नेतृत्व में विभिन्न कर्मचारी संगठन शुक्रवार को शहर में रोडवेज के निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करते हुए कार्यकर्ता रोडवेज की हड़ताल का समर्थन करते हुए लघु सचिवालय परिसर में पहुंचे और वहां नारेबाजी करते हुए जिला उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। सरकार की वादा खिलाफी, हठधर्मिता, तानाशाही व अड़ियल रवैये के प्रति धरने की अध्यक्षता व संचालन अजय वशिष्ठ ने किया।
धरने को संबोधित करते हुए सीटू से रमेश जांडली ने कहा कि रोडवेज का निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार के तमाम दमनकारी हथकंडों एस्मा, गिरफ्तारियां, झूठे मुकदमों, बर्खास्त, निलंबन, नेताओं को लालच देकर हड़ताल तुड़वाने की नाकाम कोशिश करने के बावजूद रोडवेज कर्मचारियों की 16 अक्तूबर से चल रही हड़ताल आज तक शत प्रतिशत सफल रही है जो 29 तक बढ़ा दी गई है। सरकार ने तालमेल कमेटी को 3 बार वार्तालाप के लिए बुलाया, लेकिन हर बार तानाशाही तरीके से महकमे के निजीकरण की बात पर अड़े रहे, जिससे तालमेल कमेटी को मजबूर होकर हड़ताल आगे बढ़ानी पड़ी। नेताओं ने सरकार के इस ओछे हथकंडे की निंदा कर 1 महीने का वेतन व 2 साल का बोनस जमा करवाकर रोडवेज को बचाने की मांग की। रोडवेज के समर्थन में शुक्रवार को शिक्षक तालमेल कमेटी व अन्य कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश लिया व प्रदर्शन में शामिल हुए। रोडवेज के समर्थन में ही फतेहाबाद में 25 अक्तूबर से शाम 3 से अगले दिन 3 बजे तक क्रमिक भूख हड़ताल को शुरू किया गया है जो तब तक चलेगी जब तक सरकार पूर्ण रूप से निजीकरण पर रोक नहीं लगाती है। शिक्षक तालमेल कमेटी व अन्य जनसंगठनों के नेताओं ने चेतावनी दी कि अभी तो सामूहिक अवकाश लेकर सरकार को चेतावनी दी है, अगर सरकार प्राइवेट बसों के 720 परमिट रद्द नहीं करती है, तो सभी कर्मचारी हड़ताल में भी शामिल होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार व प्रशासन की होगी।
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70 फीसदी कर्मचारी रहे अवकाश पर
शुक्रवार को जिले के 70 फीसदी कर्मचारियों ने अवकाश लेकर सरकार की नीतियों का विरोध किया। शुक्रवार के सामूहिक अवकाश में मार्केट कमेटी, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने हिस्सा नहीं लिया। इसके अलावा बिजली विभाग के 1016 में से 922, जन स्वास्थ्य विभाग के 346 में से 180, शिक्षा विभाग के 3614 में से 2314, नगर परिषद के 506 में से 327, आंगनबाड़ी वर्कर 4445 ने सामूहिक अवकाश लिया। जबकि लघु सचिवालय के एसडीएम कार्यालय के 95 में से 95 कर्मचारी ड्यूटी पर रहे। सिंचाई विभाग के 494 में से 132 कर्मचारियों ने अवकाश लिया।
जिले में पानी व बिजली की आपूर्ति पूर्णतया रही सुचारु
कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश के दौरान रेगुलर कर्मचारियों के अलावा कांट्रेक्ट बेस पर लगे 90 फीसदी कर्मचारियों ने भी कैजुवल लिव ली। इस स्थिति में बाकी बचे कांट्रेक्ट बेसिस कर्मचारी तथा ट्रेनिंग पर आए युवाओं ने शहर की बिजली आपूर्ति बनाए रखी। निगम के एसडीओ धीरज कुमार ने इसकी पुष्टि की है। इसके अलावा जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा शहर में पानी की आपूर्ति भी आम दिनों की तरह की गई।
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। रोडवेज कर्मचारियों के समर्थन व रोडवेज में निजी बसों के विरोध में विभिन्न विभागों के करीब 70 फीसदी कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश लेकर सरकार का विरोध किया। शुक्रवार को जिलेभर के कर्मचारी संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया व डीसी को ज्ञापन देने लघु सचिवालय पहुंचे। सभी कर्मचारियों सचिवालय के गेट पर ही सुरक्षा बलों ने उन्हें अंदर जाने से मना कर दिया। जिससे हजारों कर्मी गेट पर ही धरने पर बैठ गए। सुरक्षा कर्मियों ने कर्मचारी नेताओं से कहा कि वह 5 सदस्यों का एक शिष्टमंडल लेकर डीसी को ज्ञापन देने चले जाएं। लेकिन कर्मचारी नेताओं ने इससे साफ इंकार कर दिया। तब प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार विजय कुमार ज्ञापन लेने पहुंचे तो कर्मचारियों ने यह कहकर उन्हें ज्ञापन देने से इंकार कर दिया कि डीसी के पास राहगीरी के लिए समय है, लेकिन पब्लिक के लिए नहीं। कर्मचारियों की जिद के चलते करीब 10 मिनट बाद डीसी डॉ. जेके आभीर कर्मचारियों के बीच पहुंचे और ज्ञापन लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा, सीटू, शिक्षक तालमेल कमेटी के नेतृत्व में विभिन्न कर्मचारी संगठन शुक्रवार को शहर में रोडवेज के निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करते हुए कार्यकर्ता रोडवेज की हड़ताल का समर्थन करते हुए लघु सचिवालय परिसर में पहुंचे और वहां नारेबाजी करते हुए जिला उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। सरकार की वादा खिलाफी, हठधर्मिता, तानाशाही व अड़ियल रवैये के प्रति धरने की अध्यक्षता व संचालन अजय वशिष्ठ ने किया।
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धरने को संबोधित करते हुए सीटू से रमेश जांडली ने कहा कि रोडवेज का निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार के तमाम दमनकारी हथकंडों एस्मा, गिरफ्तारियां, झूठे मुकदमों, बर्खास्त, निलंबन, नेताओं को लालच देकर हड़ताल तुड़वाने की नाकाम कोशिश करने के बावजूद रोडवेज कर्मचारियों की 16 अक्तूबर से चल रही हड़ताल आज तक शत प्रतिशत सफल रही है जो 29 तक बढ़ा दी गई है। सरकार ने तालमेल कमेटी को 3 बार वार्तालाप के लिए बुलाया, लेकिन हर बार तानाशाही तरीके से महकमे के निजीकरण की बात पर अड़े रहे, जिससे तालमेल कमेटी को मजबूर होकर हड़ताल आगे बढ़ानी पड़ी। नेताओं ने सरकार के इस ओछे हथकंडे की निंदा कर 1 महीने का वेतन व 2 साल का बोनस जमा करवाकर रोडवेज को बचाने की मांग की। रोडवेज के समर्थन में शुक्रवार को शिक्षक तालमेल कमेटी व अन्य कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश लिया व प्रदर्शन में शामिल हुए। रोडवेज के समर्थन में ही फतेहाबाद में 25 अक्तूबर से शाम 3 से अगले दिन 3 बजे तक क्रमिक भूख हड़ताल को शुरू किया गया है जो तब तक चलेगी जब तक सरकार पूर्ण रूप से निजीकरण पर रोक नहीं लगाती है। शिक्षक तालमेल कमेटी व अन्य जनसंगठनों के नेताओं ने चेतावनी दी कि अभी तो सामूहिक अवकाश लेकर सरकार को चेतावनी दी है, अगर सरकार प्राइवेट बसों के 720 परमिट रद्द नहीं करती है, तो सभी कर्मचारी हड़ताल में भी शामिल होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार व प्रशासन की होगी।
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70 फीसदी कर्मचारी रहे अवकाश पर
शुक्रवार को जिले के 70 फीसदी कर्मचारियों ने अवकाश लेकर सरकार की नीतियों का विरोध किया। शुक्रवार के सामूहिक अवकाश में मार्केट कमेटी, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने हिस्सा नहीं लिया। इसके अलावा बिजली विभाग के 1016 में से 922, जन स्वास्थ्य विभाग के 346 में से 180, शिक्षा विभाग के 3614 में से 2314, नगर परिषद के 506 में से 327, आंगनबाड़ी वर्कर 4445 ने सामूहिक अवकाश लिया। जबकि लघु सचिवालय के एसडीएम कार्यालय के 95 में से 95 कर्मचारी ड्यूटी पर रहे। सिंचाई विभाग के 494 में से 132 कर्मचारियों ने अवकाश लिया।
जिले में पानी व बिजली की आपूर्ति पूर्णतया रही सुचारु
कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश के दौरान रेगुलर कर्मचारियों के अलावा कांट्रेक्ट बेस पर लगे 90 फीसदी कर्मचारियों ने भी कैजुवल लिव ली। इस स्थिति में बाकी बचे कांट्रेक्ट बेसिस कर्मचारी तथा ट्रेनिंग पर आए युवाओं ने शहर की बिजली आपूर्ति बनाए रखी। निगम के एसडीओ धीरज कुमार ने इसकी पुष्टि की है। इसके अलावा जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा शहर में पानी की आपूर्ति भी आम दिनों की तरह की गई।