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IDFC Bank Scam: सीबीआई को अब IAS प्रदीप कुमार की तलाश, सरकारी आवास पर नहीं मिले; 30 जून को होना है रिटायर

Sat, 27 Jun 2026 09:03 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Sat, 27 Jun 2026 09:03 AM IST
सार

हरियाणा सरकार ने बैंक घोटाले में गिरफ्तार 2000 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को निलंबित कर दिया है। वह वर्तमान में हरियाणा सरकार के आर्किटेक्चर विभाग के प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत थे।

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IDFC Bank Scam CBI now looking for IAS officer Pradeep Kumar not found at official residence
आईएएस प्रदीप कुमार को तलाश रही सीबीआई - फोटो : फाइल

विस्तार

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 657 करोड़ रुपये के घोटाले में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार को गिरफ्तार करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी दो-तीन स्थानों पर पहुंची मगर वह नहीं मिले। वह पिछले तीन दिनों से अपने सरकारी आवास पर भी नहीं हैं। उनका मोबाइल फोन भी बंद है। 

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प्रदीप कुमार इस साल 8 अप्रैल तक परिवहन विभाग में निदेशक (राज्य परिवहन) और विशेष सचिव के पद पर थे। बैंक घोटाले में कथित संलिप्तता के बाद सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। प्रदीप कुमार की सेवानिवृत्ति में केवल चार दिन बचे हैं। उनको 30 जून को रिटायर होना है।
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वहीं हरियाणा सरकार ने बैंक घोटाले में गिरफ्तार 2000 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को निलंबित कर दिया है। वह वर्तमान में हरियाणा सरकार के आर्किटेक्चर विभाग के प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत थे। उन्हें 22 जून की रात 8:30 बजे सीबीआई ने हिरासत में लिया था और 48 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रहने के कारण अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के तहत उन्हें 22 जून 2026 से प्रभावी माने जाने वाले निलंबन के दायरे में रखा गया है।

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दो आईएएस हो चुके हैं गिरफ्तार

सीबीआई इससे पहले आईएएस आरके सिंह व पंकज अग्रवाल को भी गिरफ्तार कर चुकी है। उन दोनों की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की जांच का फोकस प्रदीप कुमार पर था।

सीबीआई के अनुसार, 31 अगस्त 2022 से 10 दिसंबर 2025 के बीच प्रदीप कुमार के हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव रहने के दौरान सरकारी धन के कथित गबन का मामला सामने आया। सीबीआई का आरोप है कि इस अवधि में बोर्ड के खाते से करीब 169.36 करोड़ रुपये निजी कंपनियों में निवेश किए गए और बाद में कथित तौर पर शेल कंपनियों के माध्यम से राशि निकाल ली गई। 

सीबीआई ने इस मामले में 23 जून को बोर्ड के डाटा एंट्री ऑपरेटर सौरभ शर्मा को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उसने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। वह चार दिन की सीबीआई रिमांड पर है।

यह घोटाला फरवरी में सामने आया था जब हरियाणा के पंचायत विभाग ने अपना बैंक खाता बंद कर उसमें मौजूद राशि को किसी दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू की। इसी दौरान सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज राशि और खाते में वास्तव में मौजूद रकम के बीच बड़ा अंतर सामने आया। सीबीआई के मुताबिक बैंक के अधिकारियों ने हरियाणा सरकार के अधिकारियों के साथ मिलकर हरियाणा के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों के खातों से 657 करोड़ रुपये की हेराफेरी की।

छह फर्जी कंपनियों में पैसा ट्रांसफर हुआ

सीबीआई की जांच में सामने आया है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खाते से कैपको फिनटेक सर्विसेज, दिशा ट्रेडर्स, मन्नत कॉन्ट्रैक्टर, एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड, विटामेड सॉल्यूशंस और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स जैसी कंपनियों को करोड़ों रुपये भेजे गए। सबसे अधिक 70 करोड़ रुपये से ज्यादा स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स और 53 करोड़ रुपये से अधिक कैपको फिनटेक सर्विसेज को दिए गए। एजेंसी का दावा है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर सरकारी धन निकालने के लिए किया गया।

आईएएस विनीत गर्ग भी जांच के दायरे में

बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन आईएएस विनीत गर्ग भी जांच के दायरे में हैं। राज्य सरकार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत जांच की मंजूरी पहले ही दे चुकी है।

एचसीएस से हुए थे पदोन्नत, 27 साल की है सेवा

प्रदीप कुमार हरियाणा कैडर के 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्हें हरियाणा सिविल सेवा से पदोन्नत कर आईएएस बनाया गया था। उन्होंने 1999 में करनाल में सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत की थी। करीब 27 साल की सेवा में वह सिरसा और फतेहाबाद के उपायुक्त, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक, पर्यावरण निदेशक और कई अन्य महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।

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