हरियाणा: एसडीएम और डीआरओ के नाम काटे भिवानी तहसील में टोकन, नहीं हुई एक भी रजिस्ट्री, लोग परेशान
आदेशों के बावजूद अधिकारियों को रजिस्ट्री के लिए कोई लॉगइन आईडी नहीं मिली है न ही रजिस्ट्री के लिए उनके कार्यालयों में कोई व्यवस्था हो पाई है। जबकि ऑनलाइन टोकन में 100 से 200 टोकन किए जाने के बाद रेंडमली टोकन डीआरओ और एसडीएम के नाम काटे जा रहे हैं।
विस्तार
भिवानी तहसील में तहसीलदार, नायब तहसीलदार के बाद अब उपमंडल अधिकारी नागरिक (एसडीएम) और जिला राजस्व अधिकारी (डीआरओ) के पास भी रजिस्ट्री का अधिकार मिल गया है। इसके बाद भिवानी तहसील में रोजाना रजिस्ट्री के 100 टोकन से बढ़ाकर इसकी संख्या 200 कर दी गई है। वीरवार को काटे गए टोकन में एसडीएम और डीआरओ के नाम भी रजिस्ट्री के टोकन कटे, मगर सुबह से शाम हो गई एक भी रजिस्ट्री नहीं हुई।
दिनभर चक्कर काटते रहे लोग
अभी तक एसडीएम और जिला राजस्व अधिकारी को न तो लॉगइन आईडी मिली और न ही कार्यालय में रजिस्ट्री क्लर्क और कंप्यूटर ऑपरेटर की कोई व्यवस्था हो पाई है। रजिस्ट्री के टोकन कटा चुके लोग दिनभर चक्कर काटते रहे, मगर फिर भी उनका काम नहीं बना। भिवानी तहसील में रजिस्ट्री के लिए अब तक तहसीलदार और नायब तहसीलदार के लिए केवल 100 टोकन रोजाना जारी किए जाते थे। कभी तहसीलदार बैठते तो कभी नायब तहसीलदार इन रजिस्ट्रियों को कर देते थे। हरियाणा सरकार ने तहसील कार्यालय से बाहर रजिस्ट्री का अधिकार एसडीएम और डीआरओ को भी सौंप दिया।
अधिकारी अपनी लॉगइन आईडी से रजिस्ट्री करेगा
करीब एक पखवाड़े पहले जारी हुए इन आदेशों के बावजूद अब तक दोनों ही अधिकारियों को रजिस्ट्री के लिए कोई लॉगइन आईडी नहीं मिली है न ही रजिस्ट्री के लिए उनके कार्यालयों में कोई व्यवस्था हो पाई है। जबकि ऑनलाइन टोकन में 100 से 200 टोकन किए जाने के बाद रेंडमली टोकन डीआरओ और एसडीएम के नाम काटे जा रहे हैं। इसके बाद लोग अपनी रजिस्ट्री के कागजातों को उठाकर कभी एसडीएम तो कभी डीआरओ और कभी तहसीलदार कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, मगर कहीं पर भी उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। क्योंकि जिस अधिकारी के नाम टोकन कटा है, उसकी रजिस्ट्री भी वही अधिकारी अपनी लॉगइन आईडी से करेगा। ऐसे में जिन अधिकारियों को अभी लॉगइन आईडी तक नहीं मिली और रजिस्ट्री के टोकन उनके नाम कट रहे हैं तो अपने कागजातों को लेकर इधर-उधर भटकने पर भी मजबूर हो गए हैं।
50 वर्गगज का मकान बेचने के लिए विक्रेता और खरीदार मौजूद, नहीं बनी रजिस्ट्री
शहर के बृजवासी कॉलोनी निवासी कमोद देवी ने बताया कि उसने अपना 50 वर्गगज का मकान बेचा है। इसकी रजिस्ट्री ललिता के नाम होनी है। उसे जो टोकन दिया है। उस पर डीआरओ का नाम लिखा है। मगर, डीआरओ कार्यालय में रजिस्ट्री के लिए पहुंचे तो वहां पता चला कि अभी यहां कोई व्यवस्था तक नहीं है। विक्रेता और खरीदार के साथ दो गवाह भी मौजूद है। सभी दस्तावेज जमा हो चुके हैं, मगर फिर भी रजिस्ट्री नहीं बनी। टोकन पर रजिस्ट्री का समय 11 बजकर आठ मिनट का समय दर्शाया है। अब शाम चार बज चुके हैं, ऑनलाइन टोकन का फिर क्या मतलब है।
बेटे के नाम मकान कराने के लिए सुबह से शाम तक बुजुर्ग दंपती करते रहे इंतजार
नई अनाज मंडी क्षेत्र निवासी साधु सिंह ने बताया कि वह और उसकी पत्नी लक्ष्मी देवी अपने बेटे के नाम अपना रिहायशी मकान ब्लड रिलेशन की रजिस्ट्री के तहत कराने के लिए सुबह तहसील कार्यालय में आए थे। उन्हें 11 बजे रजिस्ट्री का टोकन भी मिला था, मगर शाम तक उनकी रजिस्ट्री नहीं हुई। रजिस्ट्री के टोकन पर डीआरओ लिखा है। जिस वजह से तहसीलदार का रजिस्ट्री क्लर्क भी रजिस्ट्री नहीं कर रहा है और न ही डीआरओ ऑफिस में कोई रजिस्ट्री हो रही है।
अधिकारी के अनुसार
भूमि की रजिस्ट्री के संबंध में हरियाणा सरकार के आदेश जारी हो चुके हैं, लेकिन अभी तक मेरी अलग से लॉगइन आईडी नहीं बनी है। इसकी प्रक्रिया चल रही है। मेरे कार्यालय में रजिस्ट्री के लिए अलग से रजिस्ट्री क्लर्क और एक कंप्यूटर ऑपरेटर की व्यवस्था भी कराई जाएगी। ये एक दो दिन में हो जाएगा। इसके बाद डीआरओ कार्यालय में भी भूमि की रजिस्ट्री टोकन सिस्टम के आधार पर संभव हो जाएगी। - राजकुमार, जिला राजस्व अधिकारी, भिवानी।
रजिस्ट्री के टोकन में भी कर्मचारी कर रहे हेराफेरी, 300 से 500 रुपये की हो रही वसूली
भिवानी नंबरदार एसोसिएशन के प्रधान इंद्रपाल सिंह ने आरोप लगाया कि जिन लोगों के सुबह 11 बजे टोकन कट जाते हैं उनकी शाम पांच बजे तक भी रजिस्ट्री नहीं होती है। भिवानी तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री पहले फीड करने के नाम पर भी तीन सौ से पांच सौ रुपये वसूले जा रहे हैं। जो लोग ये पैसे दे देते हैं, उनकी रजिस्ट्री टोकन से पहले ही दर्ज कर दी जाती है। रोजाना 200 टोकन कट रहे हैं, मगर मुश्किल से रजिस्ट्री 50 से 60 भी नहीं हो पाती। ये तहसील कार्यालय में बड़ा भ्रष्टाचार है।