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Bhiwani News: उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र की साक्षी में प्रदोष काल के दौरान होगा होलिका का पूजन

Sun, 17 Mar 2024 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Sun, 17 Mar 2024 11:59 PM IST
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Holika will be worshiped during Pradosh period under the witness of Uttara Phalguni Nakshatra.
पंडित श्रीकांत शास्त्री।
तोशाम। फाल्गुन पूर्णिमा पर 24 मार्च को होलिका का पूजन होगा। इस बार होलिका पूजन के समय प्रदोषकाल में पाताल वासिनी भद्रा रहेगी। इसके साए में होलिका का पूजन धन- धान्य, सुख समृद्धि तथा पुत्र पौत्र प्रदान करने वाला माना गया है। ज्योतिषियों के अनुसार कुछ स्थानों पर भद्रा के बाद पूजन की मान्यता बताई गई है। जबकि ज्योतिष शास्त्र में भद्रावास का विशेष महत्व है। पाताल वासिनी भद्रा की साक्षी में पूजन करने से किसी प्रकार का कोई दोष नहीं लगता है। इसलिए फाल्गुन पूर्णिमा पर प्रदोष काल में नि:संकोच होलिका का पूजन किया जा सकता है।
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पंडित श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि होली का त्योहार फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाता है। होली का त्योहार पूरे देश भर में धूम-धाम और खुशी के साथ मनाया जाता है। इस बार 24 मार्च को रविवार के दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र की साक्षी में प्रदोष काल के दौरान होलिका का पूजन होगा। उन्होंने बताया कि पंचांग की गणना के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर प्रदोष काल में होलिका के पूजन की मान्यता है। इस बार 24 मार्च को रविवार के दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र की साक्षी में प्रदोष काल के दौरान होलिका का पूजन होगा। कुछ स्थानों पर भद्रा के बाद पूजन की मान्यता बताई गई है जबकि कन्या राशि के चंद्रमा की साक्षी में आने वाले पर्व पर भद्रा पाताल लोक में निवास करती है। इस दृष्टि से इसमें कोई दोष नहीं है, अर्थात प्रदोष काल में ही होलिका का पूजन होगा।
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श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि फाल्गुन पूर्णिमा 24 मार्च को सुबह 9 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ हो रही है, जो 25 मार्च को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर समाप्त हो रही है। ऐसे में होलिका दहन 24 मार्च और रंगों वाली होली 25 मार्च को खेली जाएगी। इस साल होलिका दहन 24 मार्च को है। इसके साथ ही इस दिन देर रात होलिका दहन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार रात 11 बजकर 15 मिनट पर शुरू होकर 25 मार्च को 12 बजकर 23 मिनट पर दहन समाप्त होगा ऐसे में होलिका दहन के लिए आपको कुल 1 घंटे 14 मिनट का समय मिलेगा। प्रदोष काल में भद्रा रहने से दहन का उचित समय नहीं है फिर भी अति आवश्यक परिस्थिति में होलिका दहन भद्रा के पुच्छकाल में शाम 06:34 से 07:54 तक भी किया जा सकता है।
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श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि होलिका दहन को लेकर मान्यता है कि इस दिन भगवान हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद जो भगवान की भक्ति में लीन था। उसे अपनी बहन होलिका के जरिए जिंदा जला देना चाहा था। लेकिन, प्रहलाद की भक्ति की जीत हुई और होलिका आग में जलकर भस्म हो गई। तभी से होलिका दहन की परंपरा चली आ रही है। होलिका दहन के अगले दिन रंगों का उत्सव मनाया जाता है। रंग वाली होली को धुलंडी के नाम से भी जाना जाता है।
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