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Bhiwani News: देवसर माता मंदिर प्रकरण में सड़कों पर उतर हिंदू संगठनों ने जताया रोष, मुख्यमंत्री को भेजा मांगपत्र
Fri, 13 Oct 2023 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 13 Oct 2023 11:33 PM IST
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देवसर माता मंदिर में मामले में प्रदर्शन करते फैसले से नाराज ग्रामीण।
भिवानी।
गांव देवसर माता मंदिर में पुजारियों और चंदे को लेकर उपजे विवाद में अब हिंदू संगठन भी कूद गए हैं। शुक्रवार को नेहरू पार्क में गांव देवसर के ग्रामीणों और पुजारियों की एक अहम बैठक हुई। इसमें विश्व हिंदू परिषद पदाधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। बैठक के बाद नेहरू पार्क से शहर मेें विरोध प्रदर्शन कर लघु सचिवालय परिसर में पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम मांगपत्र भेजा।
वहीं शुक्रवार को ही ये मामला सेशन कोर्ट में भी सुनवाई तक पहुंचा। इस पर कोर्ट इस मामले मेें सोमवार को फिर से सुनवाई करेगा। ग्रामीणों और मंदिर के पुजारियों ने देवसर के सरपंच संजय देवसरिया पर भी चंदे की राशि में 51 फीसदी हिस्सेदारी मांगने के गंभीर आरोप लगाए। वहीं पैसा नहीं देने पर प्रशासन को झूठी शिकायत देने की भी बात कही। पुजारियों ने कहा कि पिछले 700 सालों से उनके पूर्वज माता की सेवा करते आ रहे हैं।
गांव देवसर स्थित देवसर माता मंदिर में एसडीएम कोर्ट के फैसले के बाद तहसीलदार और बीडीपीओ और अकाउंटेंट को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जो मंदिर के चंदे का हिसाब किताब रखेंगे और अलग से बैंक खाता भी खोला जाएगा। इस फैसले के बाद शुक्रवार को गांव देवसर के सैकड़ों ग्रामीण और मंदिर के पुजारी उपायुक्त दरबार पहुंचे। उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम मांगपत्र सौंपकर मंदिर को सरकार के अधीन सौंपे जाने के फैसले को वापस लेने की मांग की।
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देवसर धाम के पुजारी कंवरपाल ने बताया कि बीते दिनों गांव के सरपंच ने देवसर मंदिर धाम के चढ़ावे का 51 प्रतिशत हिस्सा देने की मांग की थी और इसी को लेकर सरपंच ने पुजारियों पर गलत व झूठे आरोप लगाकर एसडीएम को शिकायत सौंपी थी। इसके बाद एसडीएम ने कार्रवाई करते हुए देवसर मंदिर धाम को सरकार के आधीन कर दिया तथा वहां पर रिसीवर तैनात कर दिए।
पुजारी कंवरपाल ने कहा कि सरपंच द्वारा लगाई गई शिकायत के मामले के समाधान को लेकर बीते दिनों भिवानी के विधायक ने पुजारियों को आश्वासन दिया था कि 11 अक्तूबर को इस मामले में पंचायत आयोजित कर समाधान करवा दिया जाएगा, लेकिन 10 अक्तूबर को ही प्रशासन ने मंदिर में रिसीवर बैठाने के निर्देश दे दिए। उन्होंने उपायुक्त को मांगपत्र सौंपकर मंदिर को सरकार के अधीन सौंपे जाने के फैसले को वापस लेने की मांग की गई। इस मौके पर विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष प्रदीप कुमार, बजरंग दल के हरियाणा प्रांत के अध्यक्ष वरुण बजरंगी, वुमन हेल्पलाइन सोसायटी की प्रधान सुशील, पूर्व सरपंच जसवंत सिंह, अधिवक्ता समरबीर सिंह, बजरंग दल से गोपाल तंवर सहित अनेक ग्रामीण एवं विभिन्न संगठनों के लोग मौजूद रहे।
आरोप गलत, कीमती आभूषणों का रिकार्ड होना चाहिए : संजय देवसरिया
गांव के सरपंच संजय देवसरिया ने बताया कि चढ़ावे के 51 फीसदी हिस्सा मांगने का आरोप गलत है। बौखलाहट में इस तरह का आरोप लगाया है। श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा से माता पर आभूषण चढ़ाते हैं और वे चाहते हैं कि उन द्वारा चढ़ाए गए आभूषण माता के शृंगार में हमेशा शामिल रहें। श्रद्धालुओं द्वारा जो दुर्गा माता पर कीमती आभूषण चढ़ाए जाते हैं, उनका रिकाॅर्ड तो होना ही चाहिए। विगत में दो श्रद्धालुओं ने दुर्गा माता की प्रतिमा पर लाखों रुपये के आभूषण चढ़ाए थे। उनकी जानकारी सभी ग्रामीणों को होनी चाहिए थी। उन्होंने इस मामले में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया तो उन्होंने इस तरह के आरोप लगाने आरंभ कर दिए। अगर इन आरोपों में सच्चाई होती तो वे एसडीएम की कोर्ट में रखते। एसडीएम ने कई बार दोनों पार्टियों का पक्ष जानने के लिए बुलाया था। उस वक्त सारी बातें बतानी चाहिए थीं। अब सारा मामला जिला प्रशासन के अधीन है। जिला प्रशासन ही इस मामले में कुछ कर सकता है।
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गांव देवसर माता मंदिर में पुजारियों और चंदे को लेकर उपजे विवाद में अब हिंदू संगठन भी कूद गए हैं। शुक्रवार को नेहरू पार्क में गांव देवसर के ग्रामीणों और पुजारियों की एक अहम बैठक हुई। इसमें विश्व हिंदू परिषद पदाधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। बैठक के बाद नेहरू पार्क से शहर मेें विरोध प्रदर्शन कर लघु सचिवालय परिसर में पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम मांगपत्र भेजा।
वहीं शुक्रवार को ही ये मामला सेशन कोर्ट में भी सुनवाई तक पहुंचा। इस पर कोर्ट इस मामले मेें सोमवार को फिर से सुनवाई करेगा। ग्रामीणों और मंदिर के पुजारियों ने देवसर के सरपंच संजय देवसरिया पर भी चंदे की राशि में 51 फीसदी हिस्सेदारी मांगने के गंभीर आरोप लगाए। वहीं पैसा नहीं देने पर प्रशासन को झूठी शिकायत देने की भी बात कही। पुजारियों ने कहा कि पिछले 700 सालों से उनके पूर्वज माता की सेवा करते आ रहे हैं।
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गांव देवसर स्थित देवसर माता मंदिर में एसडीएम कोर्ट के फैसले के बाद तहसीलदार और बीडीपीओ और अकाउंटेंट को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जो मंदिर के चंदे का हिसाब किताब रखेंगे और अलग से बैंक खाता भी खोला जाएगा। इस फैसले के बाद शुक्रवार को गांव देवसर के सैकड़ों ग्रामीण और मंदिर के पुजारी उपायुक्त दरबार पहुंचे। उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम मांगपत्र सौंपकर मंदिर को सरकार के अधीन सौंपे जाने के फैसले को वापस लेने की मांग की।
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देवसर धाम के पुजारी कंवरपाल ने बताया कि बीते दिनों गांव के सरपंच ने देवसर मंदिर धाम के चढ़ावे का 51 प्रतिशत हिस्सा देने की मांग की थी और इसी को लेकर सरपंच ने पुजारियों पर गलत व झूठे आरोप लगाकर एसडीएम को शिकायत सौंपी थी। इसके बाद एसडीएम ने कार्रवाई करते हुए देवसर मंदिर धाम को सरकार के आधीन कर दिया तथा वहां पर रिसीवर तैनात कर दिए।
पुजारी कंवरपाल ने कहा कि सरपंच द्वारा लगाई गई शिकायत के मामले के समाधान को लेकर बीते दिनों भिवानी के विधायक ने पुजारियों को आश्वासन दिया था कि 11 अक्तूबर को इस मामले में पंचायत आयोजित कर समाधान करवा दिया जाएगा, लेकिन 10 अक्तूबर को ही प्रशासन ने मंदिर में रिसीवर बैठाने के निर्देश दे दिए। उन्होंने उपायुक्त को मांगपत्र सौंपकर मंदिर को सरकार के अधीन सौंपे जाने के फैसले को वापस लेने की मांग की गई। इस मौके पर विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष प्रदीप कुमार, बजरंग दल के हरियाणा प्रांत के अध्यक्ष वरुण बजरंगी, वुमन हेल्पलाइन सोसायटी की प्रधान सुशील, पूर्व सरपंच जसवंत सिंह, अधिवक्ता समरबीर सिंह, बजरंग दल से गोपाल तंवर सहित अनेक ग्रामीण एवं विभिन्न संगठनों के लोग मौजूद रहे।
आरोप गलत, कीमती आभूषणों का रिकार्ड होना चाहिए : संजय देवसरिया
गांव के सरपंच संजय देवसरिया ने बताया कि चढ़ावे के 51 फीसदी हिस्सा मांगने का आरोप गलत है। बौखलाहट में इस तरह का आरोप लगाया है। श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा से माता पर आभूषण चढ़ाते हैं और वे चाहते हैं कि उन द्वारा चढ़ाए गए आभूषण माता के शृंगार में हमेशा शामिल रहें। श्रद्धालुओं द्वारा जो दुर्गा माता पर कीमती आभूषण चढ़ाए जाते हैं, उनका रिकाॅर्ड तो होना ही चाहिए। विगत में दो श्रद्धालुओं ने दुर्गा माता की प्रतिमा पर लाखों रुपये के आभूषण चढ़ाए थे। उनकी जानकारी सभी ग्रामीणों को होनी चाहिए थी। उन्होंने इस मामले में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया तो उन्होंने इस तरह के आरोप लगाने आरंभ कर दिए। अगर इन आरोपों में सच्चाई होती तो वे एसडीएम की कोर्ट में रखते। एसडीएम ने कई बार दोनों पार्टियों का पक्ष जानने के लिए बुलाया था। उस वक्त सारी बातें बतानी चाहिए थीं। अब सारा मामला जिला प्रशासन के अधीन है। जिला प्रशासन ही इस मामले में कुछ कर सकता है।