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Bhiwani News: तीन बार जन्मतिथि बदलकर पूर्व सैनिक कोटे में हासिल की शिक्षक की नौकरी
Sat, 23 Aug 2025 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 23 Aug 2025 01:33 AM IST
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20 जुलाई को अमर उजाला में प्रकाशित समाचार।
भिवानी। शिक्षा विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। स्कूल रिकॉर्ड में तीन बार जन्मतिथि बदलकर एक जेबीटी शिक्षक ने पूर्व सैनिक कोटे से प्राथमिक शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली। तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए रिपोर्ट कैरू खंड शिक्षा अधिकारी को भेज दी है। इस मामले में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। यह फर्जीवाड़ा ढाबढाणी निवासी रामपाल सिंह की ओर से सूचना का अधिकार (आरटीआई) लगाने के बाद सामने आया है।
आरटीआई के तहत मिली जानकारी के बाद शिकायतकर्ता रामपाल सिंह ने इस मामले की शिकायत खंड शिक्षा अधिकारी कैरू से लेकर राष्ट्रपति तक की। जांच में दस्तावेजों से स्पष्ट हुआ कि राजकीय प्राथमिक पाठशाला जूई बिचाली में कार्यरत जेबीटी शिक्षक ने नौकरी पाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में तीन बार जन्मतिथि बदली और गलत प्रमाणपत्र लगाकर पूर्व सैनिक कोटे से नियुक्ति पाई।
रिकॉर्ड के मुताबिक पहली बार राजकीय प्राथमिक पाठशाला पोहकरवास में कक्षा एक में 10 अगस्त 1971 को दाखिला लिया गया, जिसमें जन्मतिथि 14 अप्रैल 1966 दर्ज थी। दूसरी बार इसी स्कूल में कक्षा दो में 9 मार्च 1973 को दाखिला हुआ, जिसमें जन्मतिथि 15 मई 1966 दर्ज कराई गई। तीसरी बार कक्षा तीन में 18 नवंबर 1974 को दाखिला संख्या 451 पर जन्मतिथि 15 मई 1966 दर्ज की गई। स्कूल छोड़ने के बाद भी दो बार जन्म प्रमाणपत्र बनवाए गए।
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ढाबढाणी में कक्षा नौ में 7 जुलाई 1980 को दाखिला खारिज रजिस्टर में जन्मतिथि 4 फरवरी 1968 दर्ज की गई। इसी आधार पर आरोपी ने दसवीं कक्षा पास की। इस तरह अलग-अलग जन्म तिथि का सहारा लेकर और केवल डिस्चार्ज बुक लगाकर उसने पात्रता न होते हुए भी पूर्व सैनिक कोटे का लाभ उठाया और जेबीटी शिक्षक बन गया।
तीन बार हुई जांच, हर बार दोषी साबित
रामपाल सिंह ने बताया कि उसने आरोपी शिक्षक के खिलाफ तीन बार शिकायत दी। पहले दो अवसरों पर विभागीय जांच में आरोपी दोषी पाया गया था। तीसरी बार भी तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनी और इस रिपोर्ट में भी शिक्षक दोषी ठहराया गया। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी कार्रवाई से बच रहे हैं। इसके चलते शिकायतकर्ता ने अब हरियाणा सरकार के उच्चाधिकारियों को भी शिकायत भेजी है।
अगर जेबीटी शिक्षक जांच में दोषी साबित हो चुका है तो उसकी बर्खास्तगी को लेकर विभागीय प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सेवा नियमों के अनुसार जिस कर्मचारी का जिस स्तर पर दोष साबित होता है, उसी आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। संबंधित जेबीटी पर भी विभागीय नियमों के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी। - सुभाष भारद्वाज, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, भिवानी।
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आरटीआई के तहत मिली जानकारी के बाद शिकायतकर्ता रामपाल सिंह ने इस मामले की शिकायत खंड शिक्षा अधिकारी कैरू से लेकर राष्ट्रपति तक की। जांच में दस्तावेजों से स्पष्ट हुआ कि राजकीय प्राथमिक पाठशाला जूई बिचाली में कार्यरत जेबीटी शिक्षक ने नौकरी पाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में तीन बार जन्मतिथि बदली और गलत प्रमाणपत्र लगाकर पूर्व सैनिक कोटे से नियुक्ति पाई।
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रिकॉर्ड के मुताबिक पहली बार राजकीय प्राथमिक पाठशाला पोहकरवास में कक्षा एक में 10 अगस्त 1971 को दाखिला लिया गया, जिसमें जन्मतिथि 14 अप्रैल 1966 दर्ज थी। दूसरी बार इसी स्कूल में कक्षा दो में 9 मार्च 1973 को दाखिला हुआ, जिसमें जन्मतिथि 15 मई 1966 दर्ज कराई गई। तीसरी बार कक्षा तीन में 18 नवंबर 1974 को दाखिला संख्या 451 पर जन्मतिथि 15 मई 1966 दर्ज की गई। स्कूल छोड़ने के बाद भी दो बार जन्म प्रमाणपत्र बनवाए गए।
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ढाबढाणी में कक्षा नौ में 7 जुलाई 1980 को दाखिला खारिज रजिस्टर में जन्मतिथि 4 फरवरी 1968 दर्ज की गई। इसी आधार पर आरोपी ने दसवीं कक्षा पास की। इस तरह अलग-अलग जन्म तिथि का सहारा लेकर और केवल डिस्चार्ज बुक लगाकर उसने पात्रता न होते हुए भी पूर्व सैनिक कोटे का लाभ उठाया और जेबीटी शिक्षक बन गया।
तीन बार हुई जांच, हर बार दोषी साबित
रामपाल सिंह ने बताया कि उसने आरोपी शिक्षक के खिलाफ तीन बार शिकायत दी। पहले दो अवसरों पर विभागीय जांच में आरोपी दोषी पाया गया था। तीसरी बार भी तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनी और इस रिपोर्ट में भी शिक्षक दोषी ठहराया गया। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी कार्रवाई से बच रहे हैं। इसके चलते शिकायतकर्ता ने अब हरियाणा सरकार के उच्चाधिकारियों को भी शिकायत भेजी है।
अगर जेबीटी शिक्षक जांच में दोषी साबित हो चुका है तो उसकी बर्खास्तगी को लेकर विभागीय प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सेवा नियमों के अनुसार जिस कर्मचारी का जिस स्तर पर दोष साबित होता है, उसी आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। संबंधित जेबीटी पर भी विभागीय नियमों के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी। - सुभाष भारद्वाज, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, भिवानी।