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तहसीलदार लगाने के नाम पर 30 लाख की ठगी
ब्यूरो/अमर उजाला भिवानी
Updated Sat, 05 Dec 2015 12:56 AM IST
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भिवानी। तहसीलदार लगवाने के नाम पर 30 लाख रुपये की ठगी का मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित पक्ष के पक्ष मामले से संबंधित रिकार्डिंग भी है। पीड़ित पक्ष ने सारे सबूत होने के बाद भी पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया।
गोशाला मार्केट क्षेत्र में रहने वाले पुरुषोत्तम दास मित्तल ने शिकायत में बताया कि वर्ष 2012 मं राय सिंह की गली से एक व्यक्ति उसके पास आया। उसने अपने आपको रेलवे मिनिस्ट्री का सदस्य का बताया। एक-दो उसने अपने एक प्राइवेट स्कूल में भी उसे बुलाया। साथ ही कहा कि रेलवे में उसकी अच्छी जान-पहचान है। इसके अलावा प्रदेश सरकार में भी उसकी जान पहचान है। बाद में एक दिन उसने बताया कि हरियाणा में तहसीलदार पद के लिए जॉब निकली है। पुरुषोत्तम दास मित्तल ने बताया कि उसने अच्छा रसूख देख अपनी बहन के बेटे को लगवाने की बात रखी। इसके लिए 30 लाख रुपये भी दिए। मगर उसके बाद तीन-चार महीने में लगवाने के नाम पर टरकाते रहे। बाद में कागजात की जांच के नाम पर मामला लटकाया। अब तंग होकर उन्होंने रुपये वापस मांगे तो रुपये भी नहीं दे रहे। इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक को की। सिविल लाइन थाना में जांच आई मगर यहां आपसी विवाद कहकर पल्ला झाड़ लिया। बाद में उसने सीएम विंडो पर शिकायत की। जिसकी जांच शहर थाना को भेजी गई। यहां से रिपोर्ट दी गई कि कोर्ट में केस चल रहा है। दोबारा सीएम विंडो पर शिकायत लगाने गया तो शिकायत लेने से इंकार कर दिया। जिसके बाद उसने शिकायत रजिस्ट्री करवाई। अबकी बार जांच सदर थाना में आई। सदर थाना पुलिस ने भी बाकी थानों की तरह उससे किसी तरह की पूछताछ या कागजात की जांच के ही अपनी ओर से जवाब बनाकर भेज दिया। पुरुषोत्तम गोयल ने बताया कि उसके पास सारे कागजात है और रिकार्डिंग भी है। इतने सबूत पुलिस को दे रहा हूं, फिर भी पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई नहीं कर रही।
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गोशाला मार्केट क्षेत्र में रहने वाले पुरुषोत्तम दास मित्तल ने शिकायत में बताया कि वर्ष 2012 मं राय सिंह की गली से एक व्यक्ति उसके पास आया। उसने अपने आपको रेलवे मिनिस्ट्री का सदस्य का बताया। एक-दो उसने अपने एक प्राइवेट स्कूल में भी उसे बुलाया। साथ ही कहा कि रेलवे में उसकी अच्छी जान-पहचान है। इसके अलावा प्रदेश सरकार में भी उसकी जान पहचान है। बाद में एक दिन उसने बताया कि हरियाणा में तहसीलदार पद के लिए जॉब निकली है। पुरुषोत्तम दास मित्तल ने बताया कि उसने अच्छा रसूख देख अपनी बहन के बेटे को लगवाने की बात रखी। इसके लिए 30 लाख रुपये भी दिए। मगर उसके बाद तीन-चार महीने में लगवाने के नाम पर टरकाते रहे। बाद में कागजात की जांच के नाम पर मामला लटकाया। अब तंग होकर उन्होंने रुपये वापस मांगे तो रुपये भी नहीं दे रहे। इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक को की। सिविल लाइन थाना में जांच आई मगर यहां आपसी विवाद कहकर पल्ला झाड़ लिया। बाद में उसने सीएम विंडो पर शिकायत की। जिसकी जांच शहर थाना को भेजी गई। यहां से रिपोर्ट दी गई कि कोर्ट में केस चल रहा है। दोबारा सीएम विंडो पर शिकायत लगाने गया तो शिकायत लेने से इंकार कर दिया। जिसके बाद उसने शिकायत रजिस्ट्री करवाई। अबकी बार जांच सदर थाना में आई। सदर थाना पुलिस ने भी बाकी थानों की तरह उससे किसी तरह की पूछताछ या कागजात की जांच के ही अपनी ओर से जवाब बनाकर भेज दिया। पुरुषोत्तम गोयल ने बताया कि उसके पास सारे कागजात है और रिकार्डिंग भी है। इतने सबूत पुलिस को दे रहा हूं, फिर भी पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई नहीं कर रही।
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