फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   गैंगरेप के आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए शहर में किया प्रदर्शन, धरना जारी

गैंगरेप के आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए शहर में किया प्रदर्शन, धरना जारी

Tue, 28 Aug 2018 01:40 AM IST
Updated Tue, 28 Aug 2018 01:40 AM IST
विज्ञापन
गैंगरेप के आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए शहर में किया प्रदर्शन, धरना जारी

विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। सदर थाना क्षेत्र के एक गांव में 16 अगस्त की रात को अपने घर पर सो रही युवती का तीन युवकों ने अपहरण कर उसके साथ गैंगरेप किया था। मामले में पुलिस ने पीड़िता के बयान पर केस तो दर्ज कर लिया था लेकिन, घटना के 11 दिन बाद भी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं की। इसके चलते सोमवार को पीड़िता ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। सरकार और अधिकारी भले ही महिला विरुद्ध अपराध पर तुरंत कार्रवाई के आदेश दे, पुलिस भी तुरंत कार्रवाई का दावा करे मगर जमीनी हकीकत क्या है यह इस गांव की घटना से साफ दिख रहा है। अगर समय रहते पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी कर लेती तो शायद आज पीड़िता जिंदा होती। सुसाइड करने के बाद परिजनों ने सिविल अस्पताल में हंगामा किया तो पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और डीएसपी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर धरने पर बैठे परिजनों व ग्रामीणों ने सिविल अस्पताल से लेकर हांसी चौक तक प्रदर्शन किया और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं, सिविल अस्पताल में सुबह से डीएसपी जगत सिंह मोर व सदर थाना एसएचओ देशराज दहिया मौजूद रहे। समाचार भेजे जाने तक परिजन व ग्रामीण सिविल अस्पताल में धरने पर बैठे हुए थे।
यह लिखा है सुसाइड नोट में
सुसाइड नोट में पीड़िता ने लिखा है कि आरोपी मुझे घर से उठाकर ले गए। पुलिस ने मेरी कोई सुनवाई नहीं की प्रदीप और सुरेश मेरे घर आए और मेरे मुंह में कपड़ा ठूंसकर मुझे घर से उठा ले गए। प्रदीप को मैंने पहचान लिया, दो व्यक्ति मेरे पहचान में नहीं आए, उन्होंने मुंह ढक रखा था। उन तीनों ने मेरे साथ गलत काम काम किया और बोलेे-अगर किसी को बताया तो जान से मार देंगे। मुझे तीनों ने पीटा और गलत काम करने के बाद कुएं मेें गिराने की कोशिश की। बाद मैं उनके सामने हाथ-पैर जोड़कर किसी तरह से घर पहुंची। पुलिस ने मेरी कोई सुनवाई नहीं की और मैं शर्म के कारण अपनी जान देती हूं।
विज्ञापन

सुसाइड नोट पर भी उठ रहे सवाल
सूत्रों की मानें तो सुसाइड नोट पर भी सवाल उठ रहे हैं। सुसाइड नोट पर ना तो कोई तारीख लिखी है ना ही कोई टाइम। सुसाइड नोट में पीड़िता द्वारा जगह का भी जिक्र नहीं किया गया है। इसके अलावा सुसाइड नोट में पीड़िता ने अपना हस्ताक्षर तक नहीं किए। पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पुलिस पर लगा रहे धमकाने का आरोप
पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि जब पीड़िता का मेडिकल करवाया और पूछताछ के लिए बुलाया तो पुलिस ने पीड़िता व उसके पिता को धमकाया और झूठा केस कहते हुए गाली-गलौच की। परिजनों का आरोप है कि पुलिस केस दर्ज करने के बाद उनके घर तक नहीं गई। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुलिस गांव में गई थी और मौके का मुआयना कर पूछताछ भी की थी। पुलिस ने परिजनों को किसी भी प्रकार की कोई धमकी नहीं दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed