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Bhiwani News: कुत्तों-बंदरों के उत्पात से सहमे शहरवासी, रोज 25 से 30 घायल पहुंच रहे अस्पताल
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शहर के जिला नागरिक अस्पताल में बैठा कुत्ता।
भिवानी। जिले के शहरी और रिहायशी इलाकों में आवारा कुत्तों और बंदरों के बढ़ते उत्पात से लोग परेशान हैं। सरकारी अस्पतालों में रोजाना औसतन 25 से 30 लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं लेकिन समस्या से निपटने के लिए नगर परिषद की ओर से प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
शहर के विभिन्न रिहायशी इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड और बंदरों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। गलियों, बाजारों और रिहायशी क्षेत्रों में कुत्तों के झुंड घूमते रहते हैं जबकि बंदर घरों की छतों और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचकर उत्पात मचाते हैं। इससे बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों में भय बना रहता है।
शहरवासी राजेश, गिरधर, अशोक, रामअवतार ने बताया कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए नियमित अभियान चलाने की जरूरत है। वहीं बंदरों को पकड़ने और आबादी वाले क्षेत्रों से दूर करने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। समस्या बढ़ने के बावजूद नगर परिषद की कार्रवाई सीमित नजर आने से लोगों में नाराजगी है। सरकारी अस्पतालों में कुत्ते और बंदर के काटने या हमले में घायल होने वाले लोगों की संख्या भी चिंता बढ़ा रही है। रोजाना 25 से 30 लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं।
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अस्पताल में लगाई जा रही वैक्सीन की पूरी खुराक
सरकारी अस्पतालों में रोजाना औसतन 25 से 30 लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकांश मामले कुत्ते और बंदर के काटने या हमले में घायल होने के हैं। कई लोगों को हमले के बाद उपचार कराने के साथ वैक्सीन की पूरी खुराक भी लेनी पड़ती है।
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शहर के विभिन्न रिहायशी इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड और बंदरों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। गलियों, बाजारों और रिहायशी क्षेत्रों में कुत्तों के झुंड घूमते रहते हैं जबकि बंदर घरों की छतों और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचकर उत्पात मचाते हैं। इससे बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों में भय बना रहता है।
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शहरवासी राजेश, गिरधर, अशोक, रामअवतार ने बताया कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए नियमित अभियान चलाने की जरूरत है। वहीं बंदरों को पकड़ने और आबादी वाले क्षेत्रों से दूर करने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। समस्या बढ़ने के बावजूद नगर परिषद की कार्रवाई सीमित नजर आने से लोगों में नाराजगी है। सरकारी अस्पतालों में कुत्ते और बंदर के काटने या हमले में घायल होने वाले लोगों की संख्या भी चिंता बढ़ा रही है। रोजाना 25 से 30 लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं।
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अस्पताल में लगाई जा रही वैक्सीन की पूरी खुराक
सरकारी अस्पतालों में रोजाना औसतन 25 से 30 लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकांश मामले कुत्ते और बंदर के काटने या हमले में घायल होने के हैं। कई लोगों को हमले के बाद उपचार कराने के साथ वैक्सीन की पूरी खुराक भी लेनी पड़ती है।