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सांस रोगियों का उखड़ रहा दम, बच्चों के मर्ज की भी नहीं दवा
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04 फोटो नागरिक अस्पताल के सामने मेडिकल स्टोर में दवा की खरीददारी करते लोग। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। सांस के रोगियों का दम उखड़ रहा है मगर उसे ठीक करने के लिए इनहेलर नहीं है। यह व्यवस्था है जिला नागरिक अस्पताल की। सांस के रोगियों के लिए अस्पताल में पिछले कई दिनों से इनहेलर नहीं है। अस्पताल में सांस के रोगियों सहित बच्चों की दवाइयों की भी कमी है, जिसके कारण मरीज व तीमारदारों को अधिक दाम देकर बाहर के मेडिकल स्टोर से दवाइयों लेनी पड़ती हैं। मेडिकल स्टोर पर मरीज को 200 से लेकर 500 रुपये औसत देने ही पड़ते हैं। वहीं, अस्पताल में मल्टीविटामिन, दर्द की जेल, खांसी की दवा, अमॉक्सी सहित जीवन रक्षक दवाइयों की भी कमी है, जिसके कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बच्चों को बुखार में देने वाली दवा नहीं
अस्पताल में पिछले कुछ समय से मरीजों को सामान्य दवाइयां भी नहीं मिल रही। मजबूरन मरीजों को महंगे दामों पर बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही है। मौसम में बदलाव के साथ-साथ मौसमी बीमारियों की के मरीज बढ़ रहे हैं। ज्यादा केस बुखार के सामने आ रहे हैं। हालात ये है कि बच्चों को बुखार में पीने के लिए देने वाली दवा तक नहीं है। इसके अलावा दर्द में बच्चों को देने वाली दवा भी नहीं है।
बाहर से लेनी पड़ रही आंखों व एलर्जी की दवाइयां
अस्पताल में चार से पांच तरह की आंखों की दवाइयां मिलती है, लेकिन अब एक ही प्रकार की दवा मिल रही है। बाकी दवाइयां मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही है। एंटीबॉयोटिक दवाइयां की भी कमी है, जिसकी वजह से मरीज बिना दवाई के ही वापस लौट रहे हैं। एलर्जी के समय शरीर पर लगाने वाला एक लोशन भी मरीजों को नहीं मिल रहा है। वहीं, अमॉक्सी के कैप्सूल और गोलियां भी खत्म हो गई हैं।
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कूलिंग सिस्टम न होने से गुणवत्ता हो रही प्रभावित
किसी भी दवा के भंडारण और उसको सुरक्षित तरीके से रखने के लिए 15 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान होना चाहिए। अगर इससे अधिक तापमान होगा तो दवा के खराब होने के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता में कमी आने की आशंका हो जाती है। दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने और उनके खराब होने से बचाने के लिए जिला नागरिक अस्पताल में निर्धारित इंतजाम की व्यवस्था कम ही है। ऐसे में क्यूपिक सीरप, एलबेंडाजोल, एमोक्सिसीलिन आदि दवाइयों के खराब होने या फिर उनकी गुणवत्ता पर असर पड़ने की अधिक आशंका बनी रहती है।
रोजाना पहुंच रहे 1000 से 1200 मरीज
जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में चेकअप करवाने के लिए रोजाना 1000 से 1200 मरीज पहुंच रहे है। स्वास्थ्य विभाग ने दो जगह ओपीडी की व्यवस्था की हुई है। स्त्री रोग विशेषज्ञ की ओपीडी अल्ट्रासाउंड केंद्र में बनाई हुई है। इसके अलावा फिजिशियन, हड्डी रोग, दंत रोग, नेत्र रोग, बाल रोग पुरानी ओपीडी में ही मरीजों का चेकअप करते हैं।
लंबे समय से सांस लेने में तकलीफ है, जिसका उपचार करवाने के लिए अस्पताल में लाया था। चिकित्सक ने जो दवाई लिखी है उनमें से एक दवाई अस्पताल में नहीं मिली। अब बार मेडिकल स्टोर पर रुपये लगाकर दवाई लेनी पड़ेगी। न ही इनलेहर है, जोकि बाहर से ही लेना पड़ेगा।
- राजेंद्र, रिवाड़ी खेड़ा।
पिछले कई दिनों से लीवर में दिक्कत चल रही है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने के कारण बाहर निजी लैब में अल्ट्रासाउंड करवाया है। अब चिकित्सक ने जो दवाई बताई थी उनमें से भी एक दवाई नहीं मिली। ऐसे में बाहर मेडिकल स्टोर पर ऊंचे दाम देकर दवाई लेनी पड़ेगी।
- गुलाब, सिंघानी।
मेरे बेटे आदिल को इंफ्ेक्शन हो रखा है, जिसके उपचार के लिए तीन दिन से अस्पताल में आ रहा हूं। चिकित्सक ने जो दवाई लिखी उनमें से दो-तीन दवाई अस्पताल में नहीं मिली। पहले भी ऐसा ही हुआ है। अस्पताल में दवाई न होने के कारण आमजन को बाहर जेब कटवानी पड़ रही है।
- ताजुदिन, बजीणा।
सांस लेने में काफी दिक्कत रहती है। सुबह नौ बजे फिजिशियन से उपचार करवाने आया था। अब चिकित्सक ने जो दवाई लिखी है वे अस्पताल में नहीं है। इसकी वजह से बाहर मेडिकल स्टोर पर 200 से 300 रुपये देकर दवाई लेनी पड़ेगी। पहले ही कई बार बाहर से ही दवाई लेकर आया हूं।
- कृष्ण, सिंघानी।
अस्पताल में जिन-जिन दवाइयों की कमी है उसके बारे में चीफ फॉर्मासिस्ट से बातचीत कर उन्हें तुरंत उपलब्ध करवा दिया जाएगा। मरीजों को दवा और बेहतर उपचार की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
- डॉ. एडविन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी।
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बच्चों को बुखार में देने वाली दवा नहीं
अस्पताल में पिछले कुछ समय से मरीजों को सामान्य दवाइयां भी नहीं मिल रही। मजबूरन मरीजों को महंगे दामों पर बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही है। मौसम में बदलाव के साथ-साथ मौसमी बीमारियों की के मरीज बढ़ रहे हैं। ज्यादा केस बुखार के सामने आ रहे हैं। हालात ये है कि बच्चों को बुखार में पीने के लिए देने वाली दवा तक नहीं है। इसके अलावा दर्द में बच्चों को देने वाली दवा भी नहीं है।
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बाहर से लेनी पड़ रही आंखों व एलर्जी की दवाइयां
अस्पताल में चार से पांच तरह की आंखों की दवाइयां मिलती है, लेकिन अब एक ही प्रकार की दवा मिल रही है। बाकी दवाइयां मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही है। एंटीबॉयोटिक दवाइयां की भी कमी है, जिसकी वजह से मरीज बिना दवाई के ही वापस लौट रहे हैं। एलर्जी के समय शरीर पर लगाने वाला एक लोशन भी मरीजों को नहीं मिल रहा है। वहीं, अमॉक्सी के कैप्सूल और गोलियां भी खत्म हो गई हैं।
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कूलिंग सिस्टम न होने से गुणवत्ता हो रही प्रभावित
किसी भी दवा के भंडारण और उसको सुरक्षित तरीके से रखने के लिए 15 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान होना चाहिए। अगर इससे अधिक तापमान होगा तो दवा के खराब होने के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता में कमी आने की आशंका हो जाती है। दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने और उनके खराब होने से बचाने के लिए जिला नागरिक अस्पताल में निर्धारित इंतजाम की व्यवस्था कम ही है। ऐसे में क्यूपिक सीरप, एलबेंडाजोल, एमोक्सिसीलिन आदि दवाइयों के खराब होने या फिर उनकी गुणवत्ता पर असर पड़ने की अधिक आशंका बनी रहती है।
रोजाना पहुंच रहे 1000 से 1200 मरीज
जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में चेकअप करवाने के लिए रोजाना 1000 से 1200 मरीज पहुंच रहे है। स्वास्थ्य विभाग ने दो जगह ओपीडी की व्यवस्था की हुई है। स्त्री रोग विशेषज्ञ की ओपीडी अल्ट्रासाउंड केंद्र में बनाई हुई है। इसके अलावा फिजिशियन, हड्डी रोग, दंत रोग, नेत्र रोग, बाल रोग पुरानी ओपीडी में ही मरीजों का चेकअप करते हैं।
लंबे समय से सांस लेने में तकलीफ है, जिसका उपचार करवाने के लिए अस्पताल में लाया था। चिकित्सक ने जो दवाई लिखी है उनमें से एक दवाई अस्पताल में नहीं मिली। अब बार मेडिकल स्टोर पर रुपये लगाकर दवाई लेनी पड़ेगी। न ही इनलेहर है, जोकि बाहर से ही लेना पड़ेगा।
- राजेंद्र, रिवाड़ी खेड़ा।
पिछले कई दिनों से लीवर में दिक्कत चल रही है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने के कारण बाहर निजी लैब में अल्ट्रासाउंड करवाया है। अब चिकित्सक ने जो दवाई बताई थी उनमें से भी एक दवाई नहीं मिली। ऐसे में बाहर मेडिकल स्टोर पर ऊंचे दाम देकर दवाई लेनी पड़ेगी।
- गुलाब, सिंघानी।
मेरे बेटे आदिल को इंफ्ेक्शन हो रखा है, जिसके उपचार के लिए तीन दिन से अस्पताल में आ रहा हूं। चिकित्सक ने जो दवाई लिखी उनमें से दो-तीन दवाई अस्पताल में नहीं मिली। पहले भी ऐसा ही हुआ है। अस्पताल में दवाई न होने के कारण आमजन को बाहर जेब कटवानी पड़ रही है।
- ताजुदिन, बजीणा।
सांस लेने में काफी दिक्कत रहती है। सुबह नौ बजे फिजिशियन से उपचार करवाने आया था। अब चिकित्सक ने जो दवाई लिखी है वे अस्पताल में नहीं है। इसकी वजह से बाहर मेडिकल स्टोर पर 200 से 300 रुपये देकर दवाई लेनी पड़ेगी। पहले ही कई बार बाहर से ही दवाई लेकर आया हूं।
- कृष्ण, सिंघानी।
अस्पताल में जिन-जिन दवाइयों की कमी है उसके बारे में चीफ फॉर्मासिस्ट से बातचीत कर उन्हें तुरंत उपलब्ध करवा दिया जाएगा। मरीजों को दवा और बेहतर उपचार की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
- डॉ. एडविन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी।