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Ambala News: नोटिस के बावजूद लीज धारक ने नहीं दिया जवाब
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अवैध निर्माण को रोकने के लिए कार्यस्थल पर सील की जगह लगाई गई सीढ़ी। संवाद
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अंबाला। अंबाला-लुधियाना नेशनल हाइवे पर रेलवे एसपी कार्यालय के नजदीक अवैध निर्माण का मामला उलझता ही जा रहा है। कैंटोनमेंट बोर्ड की ओर से लीजधारक को दिए नोटिस का जवाब नहीं मिला है कि वो किसकी परमिशन से यहां निर्माण कर रहा है। अभी तक इस निर्माण को सील भी नहीं किया है।
सबसे बड़ा सवाल है कि सरकारी जमीन पर लीजधारक लगभग दो महीने से गोदाम का निर्माण करता रहा और इसकी जानकारी न तो रेलवे को मिली और न ही कैंटोनमेंट बोर्ड सहित रक्षा संपदा विभाग को। यह विभागीय कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
हैरानी की बात है कि पुरानी इमारत को तोड़कर उसकी ही पुरानी ईंटों से गोदाम तैयार कर दिया गया और इसके चारों तरफ चार शटर भी लगा दिए गए। गनीमत रही कि गोदाम पर लेंटर डालने का कार्य पूरा नहीं हो पाया। अन्यथा कुछ समय बाद यहां के हालात ही कुछ और हो जाते। वहीं अब यह भी जानकारी सामने आई है कि जीआरपी थाने के साथ बने पुराने डीएसपी क्वार्टर सहित अन्य निर्माण को जिस ठेकेदार ने ढहाया था, उसी ठेकेदार ने इस निर्माण को भी तोड़ा था, हालांकि अब इसकी जांच रेलवे पर निर्भर करती है कि वो इस पर क्या कार्रवाई करती है। बिना विभागीय जानकारी के करोड़ों रुपये की जमीन पर चल रहे अवैध निर्माण से रेलवे, कैंटोनमेंट बोर्ड और रक्षा संपदा विभाग भी हैरान है।
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वर्जन
मामला रक्षा संपदा विभाग के अधीन है। जमीन का लेखा-जोखा कैंटोनमेंट बोर्ड के अधीन होता था, इसलि अपने स्तर पर लीज धारक को नोटिस जारी करके जवाब मांगा गया था, जोकि अभी उसने नहीं दिया है। इस मामले में आगामी कार्यवाही रक्षा संपदा विभाग द्वारा ही की जा रही है।
सतीश गुप्ता, अभियंता, कैंटोनमेंट बोर्ड।
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सबसे बड़ा सवाल है कि सरकारी जमीन पर लीजधारक लगभग दो महीने से गोदाम का निर्माण करता रहा और इसकी जानकारी न तो रेलवे को मिली और न ही कैंटोनमेंट बोर्ड सहित रक्षा संपदा विभाग को। यह विभागीय कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
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हैरानी की बात है कि पुरानी इमारत को तोड़कर उसकी ही पुरानी ईंटों से गोदाम तैयार कर दिया गया और इसके चारों तरफ चार शटर भी लगा दिए गए। गनीमत रही कि गोदाम पर लेंटर डालने का कार्य पूरा नहीं हो पाया। अन्यथा कुछ समय बाद यहां के हालात ही कुछ और हो जाते। वहीं अब यह भी जानकारी सामने आई है कि जीआरपी थाने के साथ बने पुराने डीएसपी क्वार्टर सहित अन्य निर्माण को जिस ठेकेदार ने ढहाया था, उसी ठेकेदार ने इस निर्माण को भी तोड़ा था, हालांकि अब इसकी जांच रेलवे पर निर्भर करती है कि वो इस पर क्या कार्रवाई करती है। बिना विभागीय जानकारी के करोड़ों रुपये की जमीन पर चल रहे अवैध निर्माण से रेलवे, कैंटोनमेंट बोर्ड और रक्षा संपदा विभाग भी हैरान है।
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मामला रक्षा संपदा विभाग के अधीन है। जमीन का लेखा-जोखा कैंटोनमेंट बोर्ड के अधीन होता था, इसलि अपने स्तर पर लीज धारक को नोटिस जारी करके जवाब मांगा गया था, जोकि अभी उसने नहीं दिया है। इस मामले में आगामी कार्यवाही रक्षा संपदा विभाग द्वारा ही की जा रही है।
सतीश गुप्ता, अभियंता, कैंटोनमेंट बोर्ड।