{"_id":"6a9351d9eccf00828a0754d4","slug":"even-after-getting-permission-the-staff-of-the-blood-component-machine-is-still-waiting-ambala-news-c-36-1-sknl1017-168673-2026-08-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: अनुमति मिलने के बाद भी ब्लड कंपोनेंट मशीन के स्टाफ का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: अनुमति मिलने के बाद भी ब्लड कंपोनेंट मशीन के स्टाफ का इंतजार
विज्ञापन
- कैंट के नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक में रखी है मशीन, केवल गंभीर मरीज के लिए सुविधा देने का दावा
- ऐसे में एक साथ 50 लाख प्लेट्लेटस के लिए मरीजों को निजी लैब में काटने पड़ रहे चक्कर
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। नागरिक अस्पताल कैंट के ब्लड बैंक में लाखों रुपये की लागत से लगी ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन को लाइसेंस मिलने के बाद स्टाफ की कमी खलने लगी है। मशीन को ऑपरेट करने के लिए नर्सिंग ऑफिसर सहित दो टेक्निशियन की जरूरत है।
स्टाफ के आने के बाद ही मशीन से अस्पताल में आने वाले मरीजों को प्लेटलेट्स व ब्लड कंपोनेंट मिल सकेंगे। हालांकि विभाग की तरफ से अभी गंभीर मरीजों के लिए व्यवस्था होने का दावा किया जा रहा है। लेकिन अन्य मरीजों के परिजनों को निजी अस्पतालों और लैबों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
निजी लैबों में जेब ढीली करने को मजबूर मरीज
डेंगू व अन्य गंभीर बीमारियों के सीजन में मरीजों को एक साथ 50 हजार से ज्यादा प्लेटलेट्स की तत्काल आवश्यकता होती है। सरकारी अस्पताल में यह सुविधा शुरू न होने के कारण जरूरतमंद वर्ग के मरीजों को मजबूरन निजी सेंटरों पर जाकर मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। जबकि पहले ही डेढ़ साल के बाद धूल फांक रही मशीन को चलाने के लिए लाइसेंस मिल है। लंबे समय से इस मशीन को चलाने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। अब मुख्यालय को कई बार पत्राचार कर स्टाफ की मांग की जा चुकी है।
विज्ञापन
मशीन का ट्रायल हो चुका है। गंभीर मरीजों के लिए व्यवस्था है। स्टाफ आने के बाद ही मशीन को पूरी तरह से चलाया जाएगा।
डॉ. नीतू, पैथोलॉजिस्ट, ब्लड बैंक अंबाला कैंट
विज्ञापन
- ऐसे में एक साथ 50 लाख प्लेट्लेटस के लिए मरीजों को निजी लैब में काटने पड़ रहे चक्कर
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। नागरिक अस्पताल कैंट के ब्लड बैंक में लाखों रुपये की लागत से लगी ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन को लाइसेंस मिलने के बाद स्टाफ की कमी खलने लगी है। मशीन को ऑपरेट करने के लिए नर्सिंग ऑफिसर सहित दो टेक्निशियन की जरूरत है।
स्टाफ के आने के बाद ही मशीन से अस्पताल में आने वाले मरीजों को प्लेटलेट्स व ब्लड कंपोनेंट मिल सकेंगे। हालांकि विभाग की तरफ से अभी गंभीर मरीजों के लिए व्यवस्था होने का दावा किया जा रहा है। लेकिन अन्य मरीजों के परिजनों को निजी अस्पतालों और लैबों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
विज्ञापन
निजी लैबों में जेब ढीली करने को मजबूर मरीज
डेंगू व अन्य गंभीर बीमारियों के सीजन में मरीजों को एक साथ 50 हजार से ज्यादा प्लेटलेट्स की तत्काल आवश्यकता होती है। सरकारी अस्पताल में यह सुविधा शुरू न होने के कारण जरूरतमंद वर्ग के मरीजों को मजबूरन निजी सेंटरों पर जाकर मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। जबकि पहले ही डेढ़ साल के बाद धूल फांक रही मशीन को चलाने के लिए लाइसेंस मिल है। लंबे समय से इस मशीन को चलाने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। अब मुख्यालय को कई बार पत्राचार कर स्टाफ की मांग की जा चुकी है।
विज्ञापन
मशीन का ट्रायल हो चुका है। गंभीर मरीजों के लिए व्यवस्था है। स्टाफ आने के बाद ही मशीन को पूरी तरह से चलाया जाएगा।
डॉ. नीतू, पैथोलॉजिस्ट, ब्लड बैंक अंबाला कैंट