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Ambala News: सड़कों पर जमा कूड़े के ढेरों से उठ रही बदबू
Sun, 30 Aug 2026 03:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sun, 30 Aug 2026 03:08 AM IST
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अंबाला छावनी में राय मार्केट के पीछे डंपिंग जोन में बिखरी गंदगी। संवाद
अंबाला। नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल शनिवार को लगातार 24वें दिन भी जारी रही। प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद छावनी की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से बदहाल हो चुकी है। हालात इतने बदतर हैं कि रक्षाबंधन की छुट्टी के कारण जब कचरा नहीं उठा, तो त्रस्त लोगों को खुद ही गंदगी के ढेरों में आग लगानी पड़ी, ताकि वे सड़न, बदबू और मक्खी-मच्छरों के प्रकोप से बच सकें।
प्रशासन ने हड़ताल से निपटने के लिए 15 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और दो जेसीबी के साथ अपनी टीमें मैदान में उतारी थीं, यह वैकल्पिक व्यवस्था नाकाफी साबित हुई। स्थिति यह है कि घर-घर (डोर-टू-डोर) जाकर कचरा उठाने वाले कर्मचारी भी अपनी मनमानी पर उतारू हैं। विभागीय अधिकारियों की सुस्त और ढीली कार्यशैली का कर्मचारी खुलकर फायदा उठा रहे हैं।
खुद उपाध्यक्ष का वार्ड भी बदहाल
एक तरफ शहर की जनता गंदगी के अंबार से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य सफाई निरीक्षक अपनी मूल जिम्मेदारी को दरकिनार कर अन्य कार्यों में व्यस्त नजर आ रहे हैं। वे सफाई की गंभीर समस्या पर ध्यान देने के बजाय कभी डिफेंस कॉलोनी में दुकानों के बाहर से अतिक्रमण हटवा रहे हैं, तो कभी टांगरी बांध के किनारे से सामान कब्जे में ले रहे हैं। जिस नगर परिषद के कंधों पर पूरे छावनी को साफ रखने की जिम्मेदारी है। उसके उपाध्यक्ष के अपने वार्ड में ही सफाई के सबसे बुरे हालात बने हुए हैं। शनिवार को लगातार कचरा न उठने के कारण नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। संवाद
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ऐसा नहीं है, रोजाना सफाई व्यवस्था का फीडबैक लिया जा रहा है और व्हाट्सएप पर फोटो भी साझा की जा रही हैं। अगर फिर भी कहीं गंदगी पड़ी है तो उसे तुरंत उठवा दिया जाएगा। कूड़े के ढेर में आग लगाने की जानकारी नहीं है। देवेंद्र नरवाल, कार्यकारी अधिकारी, नप सदर,अंबाला।
सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं। ऐसे में अगर नगर परिषद ने वैकल्पिक व्यवस्था की है तो उसकी जिम्मेदारी किसे सौंपी है। आधा-अधूरा कूड़ा उठाया जा रहा है। लेकिन यह देखने वाले अधिकारी गायब हैं, जबकि व्यवस्थाएं दुरुस्त होने का मात्र दिखावा किया जा रहा है। -राजकुमार।
यदि जल्द ही हड़ताल का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो छावनी में किसी बड़ी बीमारी के फैलने का खतरा पैदा हो सकता है। -अशोक कुमार।
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प्रशासन ने हड़ताल से निपटने के लिए 15 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और दो जेसीबी के साथ अपनी टीमें मैदान में उतारी थीं, यह वैकल्पिक व्यवस्था नाकाफी साबित हुई। स्थिति यह है कि घर-घर (डोर-टू-डोर) जाकर कचरा उठाने वाले कर्मचारी भी अपनी मनमानी पर उतारू हैं। विभागीय अधिकारियों की सुस्त और ढीली कार्यशैली का कर्मचारी खुलकर फायदा उठा रहे हैं।
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खुद उपाध्यक्ष का वार्ड भी बदहाल
एक तरफ शहर की जनता गंदगी के अंबार से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य सफाई निरीक्षक अपनी मूल जिम्मेदारी को दरकिनार कर अन्य कार्यों में व्यस्त नजर आ रहे हैं। वे सफाई की गंभीर समस्या पर ध्यान देने के बजाय कभी डिफेंस कॉलोनी में दुकानों के बाहर से अतिक्रमण हटवा रहे हैं, तो कभी टांगरी बांध के किनारे से सामान कब्जे में ले रहे हैं। जिस नगर परिषद के कंधों पर पूरे छावनी को साफ रखने की जिम्मेदारी है। उसके उपाध्यक्ष के अपने वार्ड में ही सफाई के सबसे बुरे हालात बने हुए हैं। शनिवार को लगातार कचरा न उठने के कारण नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। संवाद
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ऐसा नहीं है, रोजाना सफाई व्यवस्था का फीडबैक लिया जा रहा है और व्हाट्सएप पर फोटो भी साझा की जा रही हैं। अगर फिर भी कहीं गंदगी पड़ी है तो उसे तुरंत उठवा दिया जाएगा। कूड़े के ढेर में आग लगाने की जानकारी नहीं है। देवेंद्र नरवाल, कार्यकारी अधिकारी, नप सदर,अंबाला।
सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं। ऐसे में अगर नगर परिषद ने वैकल्पिक व्यवस्था की है तो उसकी जिम्मेदारी किसे सौंपी है। आधा-अधूरा कूड़ा उठाया जा रहा है। लेकिन यह देखने वाले अधिकारी गायब हैं, जबकि व्यवस्थाएं दुरुस्त होने का मात्र दिखावा किया जा रहा है। -राजकुमार।
यदि जल्द ही हड़ताल का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो छावनी में किसी बड़ी बीमारी के फैलने का खतरा पैदा हो सकता है। -अशोक कुमार।

अंबाला छावनी में राय मार्केट के पीछे डंपिंग जोन में बिखरी गंदगी। संवाद