जालसाजी का खेल: गाजियाबाद में परिचय पत्र...गोरखनाथ मंदिर की सेल्फी भेजकर लेते थे भरोसे में
एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि दोनों ठगों की लखनऊ में एक साल पहले मुलाकात हुई थी। इसके बाद से दोनों ने साजिश रचकर फर्जी तरीके से संस्था का पंजीकरण करा लिया। शुरुआती जांच में सचिवालय के एक कर्मचारी समेत दो लोगों का नाम सामने आया है।
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गोरखनाथ मंदिर के पते पर योगी कार्पोरेशन ग्रुप ऑफ इंडिया नाम से फर्जी संस्था का पंजीकरण कराकर जालसाजी करने वाले आरोपी गाजियाबाद से परिचय पत्र को छपवाते थे। 1100 रुपये शुल्क खाते में मंगवाने के बाद परिचय पत्र कोरियर से भेजते थे। वहीं, जनता दर्शन में लोगों को भेजकर वसूली करने का भी जालसाजों ने एक तरीका निकाल लिया था।
जालसाज गोरखपुर जिले के बाहर के लोगों को मदद के नाम पर फंसाते थे और गोरखनाथ मंदिर के सामने की सेल्फी भेजकर भरोसे में लेते थे। अब पुलिस दोनों ठगों के मोबाइल नंबरों के सीडीआर की मदद से जांच को आगे बढ़ा रही है। फिलहाल, सचिवालय के कर्मचारी और लखनऊ के कथित पत्रकार के भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस ने गाजियाबाद के योगी हर्ष और महराजगंज के योगी केदारनाथ से पूछताछ के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन से मिले दस्तावेज और पास से मिले प्रार्थना पत्रों की जांच कर ही है। अब तक की जांच में सामने आया है कि दोनों ठग प्रदेश के हर जिले में अपना जाल फैला लिए थे।
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ये लोग जिसे पदाधिकारी बनाते थे, उसे कभी भी अपने कार्यालय आने को नहीं कहते थे, क्योंकि कार्यालय का जो पता दिया गया था। उन्हें डर था कि अगर कोई कार्यालय जाएगा तो भंडाफोड़ हो सकता है। इसी वजह से ऑनलाइन ही रुपयों की लेनदेन करने के बाद परिचय पत्र को कोरियर से भेज दिया जाता था। इसके लिए महज 11 सौ रुपये वसूले जाते थे। अब मुख्यमंत्री की संस्था का इतने रकम में सदस्य बनने की चाह में लोग ठगों की जालसाजी की शिकार हो जाते थे।
लखनऊ के कथा में हुई थी दोनों की मुलाकात
एक साल पहले केदारनाथ और हर्ष की मुलाकात लखनऊ के एक कथावाचक के पास हुई थी। वहीं पर दोनों के बीच बातचीत हुई और फिर दोनों ने जालसाजी की साजिश रचकर एक एक कदम उस पर बढ़ाते चले गए। दोनों के जालसाजी का धंधा भी चल पड़ा था, लेकिन उसमें मुख्यमंत्री के गोरखनाथ मंदिर का पता डालने की वजह से ही मामला खुल गया और अब जेल भेजे जा चुके हैं। पुलिस अब इनके गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
बैंक मित्र था हर्ष, आठवीं पास है केदारनाथ
गाजियाबाद का हर्ष बैंक मित्र रह चुका है। इस वजह से उसे बैंक और परिचय पत्र छपवाने सहित अन्य सभी जानकारियां थी। दूसरे महाराजगंज के केदारनाथ है तो आठवीं पास, लेकिन उसका दिमाग तेज था। दोनों की दोस्ती होने के बाद अप्रैल 2023 में केदारनाथ ने प्रार्थना पत्र, परिचय पत्र का तरीका खोजा तो फर्जी तरीके से पंजीकरण का रास्ता हर्ष ने निकाल लिया। फिर दोनों ने अपने नाम के आगे योगी लगाकर जालसाजी शुरू कर दी।
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कानुपर की भाजपा नेत्री रंजना सिंह की तहरीर पर गोरखनाथ थाने में केस दर्ज कर पुलिस ने रविवार को दोनों आरोपियों को पकड़ा था। पुलिस ने गिरफ्तार महराजगंज के पनियरा के सतगुरू मुजुरी गांव निवासी केदारनाथ नाथ अग्रहरी और गाजियाबाद के मधुबन बाबूधाम थाना क्षेत्र के डी 179 स्वर्ण जयंतीपुरम निवासी हर्ष के पास से 87 फर्जी परिचय पत्र, 87 कूटरचित नियुक्ति पत्र, 83 लेटर पैड, आठ प्रार्थना पत्र, दो मोबाइल फोन भी बरामद किया था। इसके बाद दोनों को जेल भेजा गया था।
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एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि दोनों ठगों की लखनऊ में एक साल पहले मुलाकात हुई थी। इसके बाद से दोनों ने साजिश रचकर फर्जी तरीके से संस्था का पंजीकरण करा लिया। शुरुआती जांच में सचिवालय के एक कर्मचारी समेत दो लोगों का नाम सामने आया है। मोबाइल के सीडीआर और दूसरे स्रोतों से पुलिस जांच कर रही है। गिरोह में शामिल सभी आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी। भविष्य में गैंगस्टर भी लगाया जाएगा।