गोरखपुर में सीलिंग की जमीन: तहसील से चल रहा था खरीद-बिक्री का नेटवर्क, सब रजिस्टार पर केस
एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि पुलिस भूमाफिया कमलेश और उसके साथियों पर दर्ज केस की जांच कर रही है। साक्ष्यों के आधार पर एक सरकारी कर्मचारी का नाम भी बढ़ाया गया है। उसे सवाल-जवाब के लिए बुलाया गया है। पुलिस पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच कर रही है।
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सीलिंग की जमीन का बैनामा हुआ, खारिज-दाखिल हुआ फिर फर्जी बैनामा भी कर दिया गया। इतना सब कुछ भूमाफिया कमलेश यादव अपने साथी दीनानाथ पासवान के साथ कैसे कर ले गया, इसकी सच्चाई अब सामने आ गई है। पुलिस की जांच में पता चला है कि ठगी का पूरा नेटवर्क चौरीचौरा तहसील से चलाया जा रहा था और इसमें कुछ अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक शामिल हैं।
फिलहाल, पुलिस ने जांच के आधार पर सब रजिस्टार चंद्रभूषण शाही का नाम केस में बढ़ाने के साथ ही नोटिस जारी कर जवाब के लिए बुलाया है। उधर, इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए डीएम कृष्णा करुणेश ने चार सदस्यीय जांच कमेटी भी गठित कर दी है।
टीम में एडीएम फाइनेंस, एआईजी स्टांप सहित चार लोगों को शामिल गया है। विभागीय जांच कर पूरी रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी। खबर है कि पूर्व में रहे तहसीलदार व लेखपाल नेटवर्क के हिस्सा थे, अब उनकी भूमिका की जांच तेज कर दी गई है।
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जानकारी के मुताबिक, सेना के जवान की पत्नी ने ठगी का पहला केस भूमाफिया कमलेश यादव, दीनानाथ पासवान, कमलेश की पत्नी पर दर्ज कराया। इसके बाद पुलिस ने पूरे इलाके में एलाउंस कराकर पीड़ित लोगों को बुलाया तो एक के बाद 31 लोग सामने आ गए हैं।
इसमें से कई लोगों को सीलिंग की जमीन का खारिज दाखिल तक करा दिया गया था तो कई ऐसे हैं, जो जमीन के नाम पर लाखों रुपये देकर ठगी के शिकार हुए थे। केस दर्ज कर पुलिस ने कमलेश, दीनानाथ को जेल भिजवाया और जांच को आगे बढ़ाया।
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पुलिस की जांच में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सीलिंग की जमीन का बैनामा कैसे हो रहा था। दूसरे पांच ऐसी भी जमीन हैं, जिसका खारिज-दाखिल भी हो गया। इसकी जांच पुलिस ने शुरू की तो पहले चौरीचौरा तहसील की ओर से पत्रावली देने से ही इंकार कर दिया गया।
पुलिस ने डीएम से मदद मांगी और फिर पत्रावली पुलिस के हाथ लगी, तब पता चला कि पूरा नेटवर्क चौरीचौरा तहसील से ही संचालित हो रहा है। अब पुलिस ने सब रजिस्टार का नाम मुकदमे में बढ़ा दिया है। नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं रहा तो उनकी गिरफ्तारी भी संभव है। इसके साथ ही इसमें कई और लोगों के शामिल होने की जानकारी मिली है, जिसकी पुलिस गहनता से जांच कर रही है।
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लेनदेन के आरोप में हटे, निलंबित हुए और फिर आ गए चौरीचौरा
केस में आरोपी बनाए गए सब रजिस्टार का कार्यकाल चौरीचौरा में ही बीता है। बताया जा रहा है कि 2022 में लेनदेन के आरोप में ही इनका तबादला बांसगांव तहसील में कर दिया गया था। वहां पर फिर शिकायत सामने आने पर निलंबित किया गया। लेकिन दोबारा चौरीचौरा तहसील में तैनाती पाने पर चंद्रभूषण शाही सफल हो गए। बताया जा रहा है कि कुछ माह पहले ही चौरीचौरा आए हैं।
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1996 से सार्वजनिक नहीं किया गया था सीलिंग की जमीन का ब्योरा
तहसील प्रशासन ने सीलिंग की जमीन को बेचने के लिए सबसे बड़ा काम यह किया कि सबसे पहले सीलिंग की जमीन का ब्योरा ही दबा दिया। उसे 1996 के बाद कभी सार्वजनिक ही नहीं किया गया। न तो जमीन पर कभी सरकारी कब्जा लिया गया। जब जमीन के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी और जमीन पर किसी का कब्जा नहीं था तो लोगों ने आसानी से यह मान लिया कि जमीन कमलेश की ही है और लोगों ने जमीन के नाम पर रुपया दे दिए। जब जालसाजी का मामला सामने आया और डीएम ने सख्ती की तब जमीन का ब्योरा सार्वजनिक किया जाने लगा।
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सेना की नौकरी के बाद सूदखोर, फिर जालसाज बना कमलेश
भूमाफिया कमलेश यादव सेना में नौकरी करता था। 2012 में सेवानिवृत्त होने के बाद वह गांव चला आया। फिर उसने सूद का काम शुरू किया। इससे रुपये आने के बाद उसने रसूख के दम पर 2013 में सरकारी सीलिंग की जमीन को बेचने का काम शुरू कर दिया। इसी धंधे के आरोपी दीनानाथ के साथ मिलकर वह लोगों को जमीन बेच देता था। वह रुद्रपुर और बहरामपुर में सरकारी जमीन को बेचकर करोड़पति बन गया। उसके बाद कमलेश ने बिहार और आसपास के तमाम लोगों को फर्जी कागजों के जरिये सरकारी जमीनें बेचकर ठगना शुरू किया। देखते ही देखते उसने करोड़ों की संपत्ति बना ली।
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पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि उसके दोनों कॉलेज भी सीलिंग की जमीन पर ही बने हैं। एक डिग्री कॉलेज को उसने पत्नी के नाम पर बनवाया है। वहीं, गांव में एक आईटीआई कॉलेज भी है। वहीं उसका साथी दीनानाथ भी एक छोटी सी दुकान से वर्तमान में शोरूम और गेस्ट हाउस का मालिक बन चुका है।
एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि पुलिस भूमाफिया कमलेश और उसके साथियों पर दर्ज केस की जांच कर रही है। साक्ष्यों के आधार पर एक सरकारी कर्मचारी का नाम भी बढ़ाया गया है। उसे सवाल-जवाब के लिए बुलाया गया है। पुलिस पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच कर रही है। जांच व साक्ष्यों के आधार पर जो भी इस गिरोह में शामिल है, उस पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।