फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Tax collection continues but no facility for water in Gorakhpur

टैक्स वसूली जारी: गोरखपुर में हैंडपंप और बोरिंग से आ रहा गंदा पानी, पांच लाख लोग पीने के पानी को तरसे

Mon, 24 Apr 2023 04:01 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 24 Apr 2023 04:01 PM IST
सार

घरों में गंदे पानी से ही लोग नहाते हैं और कपड़े भी धुले जाते हैं। ज्यादातर लोग पीने का पानी खरीद कर लाते हैं और जिनके घरों में आरओ मशीनें लगी हैं, उनके फिल्टर भी चार से छह महीने में ही खराब हो जा रहे हैं। इन इलाकों में आरओ प्लांट लगाने का वालों का धंधा खूब फल-फूल रहा है।

विज्ञापन
Tax collection continues but no facility for water in Gorakhpur
नौसड़ में हैंडपंप से पानी पीते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर शहर के करीब पांच लाख लोग शुद्ध पानी के लिए तरस रहे हैं। इनके घरों में लगे हैंडपंप और बोरिंग से पानी से गंदा पानी आने लगा है। ऐसा जलस्तर के गिरने से हुआ है। इन इलाकों में नगर निगम से पानी की आपूर्ति भी नहीं हो रही है, जबकि ये लोग नियमित हाउस टैक्स जमा करते हैं। यहां हालात बेहद खराब हैं।

विज्ञापन


कुछ लोगों ने तो परिस्थितियों से समझौता कर लिया है जबकि, कुछ लोग अब 240 से 350 फीट की गहराई तक दोबारा बोरिंग करवा रहे हैं। घरों में गंदे पानी से ही लोग नहाते हैं और कपड़े भी धुले जाते हैं। ज्यादातर लोग पीने का पानी खरीद कर लाते हैं और जिनके घरों में आरओ मशीनें लगी हैं, उनके फिल्टर भी चार से छह महीने में ही खराब हो जा रहे हैं। इन इलाकों में आरओ प्लांट लगाने का वालों का धंधा खूब फल-फूल रहा है।
विज्ञापन


इसे भी पढ़ें: नवजात को लेकर पति हुआ फरार, पुलिस ने किया बरामद
विज्ञापन
विज्ञापन


शहर के ये मोहल्ले बाहरी इलाकों वाले हैं। जहां पहले 120 फीट गहराई पर ही शुद्ध पानी मिलता था। लेकिन, अब जलस्तर नीचे खिसक गया है। 120 फीट गहराई में लगा हैंडपंप या ट्यूबवेल से गंदा पानी ही आ रहा है। अगर आरओ प्लांट लगा है तो उसके फिल्टर को बदलने और मेटेनेंस पर भी ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, सबमर्सिबल पंप लगवाने में 80 से 90 हजार रुपये तक अतिरिक्त बोझ लोगों पर पड़ रहा है। अगर नगर निगम के पानी की सप्लाई इन घरों तक पहुंचता तो सांसत नहीं झेलनी पड़ती और अतिरिक्त खर्च नहीं उठाना पड़ता।

Trending Videos

इन इलाकों में हैं लोग परेशान
जंगल सालिकराम, शिवपुर सहबाजगंज, सूफीहाता, इंजीनियरिंग कॉलेज, खोराबार, महेसरा, बरगदवां, महेबा, राजेंद्रनगर, नकहा जंगल, शताब्दीपुरम, शक्ति नगर, रुस्तमपुर, रसूलपुर, चरगांवा।

बोले लोग
महेवा कॉलोनी गोविंद गुप्ता ने कहा कि महेवा वार्ड में पानी की सप्लाई नहीं है। पहले तो हैंडपंप का पानी इस्तेमाल होता था, लेकिन अक्सर तबीयत खराब होने के बाद 320 फीट गहराई वाला सबमर्सिबल पंप लगवाया है। कुल 90 हजार रुपये खर्च करने पड़े हैं।

रुस्तमपुर बाबूराम गुप्ता ने कहा कि नगर निगम के पानी की सप्लाई में अक्सर दिक्कत आती थी। कभी पानी नहीं आता था तो कभी गंदा पानी आता था। गंदे पानी से ही नहाना पड़ता था और कपड़े भी उसी में धुले जाते थे। परेशान होकर सबमर्सिबल लगवाना पड़ा। करीब एक साल पहले 320 फीट गहराई में सबमर्सिबल लगाने में 80 हजार रुपये खर्च करना पड़ा है।

दुर्गा चौक भारद्वाजपुरम निवासी पंकज मिश्रा ने कहा कि पानी की सप्लाई तो आती है, लेकिन अक्सर कुछ न कुछ गड़बड़ी रहती है। सबसे ज्यादा दिक्कत पीने के पानी को लेकर है। ऐसे में सबमर्सिबल लगवा लिया है। 240 फीट गहराई में सबमर्सिबल लगाने में 65 हजार रुपये खर्च करना पड़ा है।

इसे भी पढ़ें: एम्स में ऑनकॉल बुलाए जाएंगे देश भर के विशेषज्ञ डॉक्टर, मरीजों को मिलेगी खास सुविधा

शिवपुर सहबाजगंज निवासी इंद्रकला देवी ने कहा कि छह साल पहले इलाके में जलापूर्ति की व्यवस्था की गई। टंकी बनी, पानी की पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन आज तक पानी की सप्लाई नहीं हो सकी है। ऐसे में हैंडपंप का पानी का इस्तेमाल करना पड़ता है। जबकि ,नगर निगम को पानी का टैक्स भी देते हैं।

आजाद नगर निवासी राहुल चंद ने कहा कि घर में पहले 120 फीट की बोरिंग कराई थी। लेकिन, खराब पानी आने लगा तो आरओ का फिल्टर जल्दी खराब होने लगा। चार महीने में ही बदलना पड़ता था। परेशान होकर 240 फीट पर बोरिंग करावाई। तबसे पानी साफ मिलने लगा। नगर निगम के सप्लाई का पानी 10-10 दिनों तक नहीं आता है।

सबमर्सिबल बोरिंग ठेकेदार मो. अजहरूद्दीन ने कहा कि मेरी फर्म के द्वारा शहर के विभिन्न इलाके में हरेक महीने 8 से 10 सबमर्सिबल बोरिंग की जाती है। पहले 120 से 140 फीट तक बोरिंग करने पर शुद्ध पानी आता था, लेकिन अब अलग-अलग इलाकों में 240 से 350 फीट पर ही साफ पानी आता है। रोजाना आठ से दस घरों में इसी गहराई में बोरिंग करवा रहा हूं।
 

अब 700 फीट की गहराई में नगर निगम लगवा रहा है बड़ा ट्यूबवेल

नगर निगम अब बड़ी क्षमता वाला ट्यूबवेल 550 से 700 फीट गहराई में लगा रहा है। पहले मात्र 400 फीट गहराई में यह ट्यूबवेल लगाई जाती थी। वहीं छोटे ट्यूबवेल की गहराई भी 250 फीट से बढ़ाकर 400 कर दी गई है। इसकी लागत में भी बढ़ोतरी हुई है। बड़ा ट्यूबवेल 56 लाख और छोटा ट्यूबवेल 23 लाख रुपये में लगाया जा रहा है।

पानी की सप्लाई नहीं, फिर भी 15 हजार से ज्यादा लोग देते हैं टैक्स
जलकल विभाग में नियम है कि जिन इलाकों में पानी की एक भी पाइप लाइन बिछी है, वहां के 250 वर्गमीटर के क्षेत्रफल में बने हर मकान को जलकर अनिवार्य रूप से देना होगा। यही वजह है कि नगर निगम के जलकल विभाग के आंकड़ों के अनुसार ऐसे 15,407 घर हैं जिन्हें बिना पानी मिले कर देना पड़ रहा है।

इसे भी पढ़ें: हत्या के बाद दोस्त संग मिलकर जला दिया पत्नी का शव, पुलिस पहुंची तो न मिली थी लाश, न मिले थे घरवाले

आंकड़ों के अनुसार, शहर के 81,593 मकानों में पानी का कनेक्शन है, लेकिन 97 हजार से ज्यादा भवन मालिकों को पानी के लिए टैक्स देना पड़ रहा है। नियमानुसार भवन के कुल मूल्यांकन पर 12 प्रतिशत जल, 12 प्रतिशत गृह और तीन प्रतिशत सीवर कर देना पड़ता है। सीवर कर उन इलाकों के नागरिकों को देना पड़ता है जहां सीवर लाइन बिछी है, लेकिन जल कर उन इलाकों के नागरिकों को भी देना पड़ रहा है जहां पानी की लाइन नहीं बिछी है।

सेंकेंड स्टेटा का पानी भी हो चुका है प्रदूषित, पानी में आर्सेनिक व फ्लोराइड

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शोध छात्रों के सर्वे में भूगर्भ जल में आर्सेनिक एवं फ्लोराइड जैसे हानिकारक तत्व मिले हैं। शिक्षक डॉ. गोविंद पांडेय ने बताया कि दोहन और रिचार्ज का संतुलन न होने से गोरखपुर और आसपास के भूजल में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ने लगी है। जब तक भूमि के नीचे जल रहता है तब तक आसपास की चट्टानों में मौजूद आर्सेनो पाइराइट अघुलनशील होने के कारण उसमें नहीं मिलता। पर जैसे ही दोहन के चलते पानी से खाली हुए स्थान पर हवा भरती है तो हवा में मौजूद ऑक्सीजन आर्सेनो पाइराइट को पीटीसाइट में बदल देता है।

पीटीसाइट बनते ही आर्सेनिक जल में घुलने लगता है। यही वजह है कि बीते कुछ वर्षों में गोरखपुर के भूजल में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ी है। हालांकि 400 से 500 फीट की गहराई से मिलने वाले पानी में इनके मिलने की संभावना न के बराबर होती है। ऐसे में अब चौथे स्टेटा के पानी का इस्तेमाल ही सुरक्षित है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार शहर में असुरन, बहरामपुर, राप्तीनगर, बेतियाहाता समेत कुछ अन्य इलाकों के पानी में आर्सेनिक एवं फ्लोराइड की मात्रा पाई गई है।

इसे भी पढ़ें: स्टेज पर दुल्हन से हाथ मिलाना युवक को पड़ा भारी, घरवालों ने जमकर की धुनाई

गोरखपुर शहर में जलापूर्ति की स्थिति
बड़े नलकूपों की संख्या - 145
मिनी नलकूप की संख्या - 110
पेयजल की उपलब्धता - 184.87 मिलियन लीटर प्रतिदिन
प्रति व्यक्ति पानी की आपूर्ति - 124.87 लीटर प्रतिदिन
ओवरहेड टैंक - 36
भूमिगत जलाशय - 01
पाइप लाइन की लंबाई - 1502 किलोमीटर
वार्ड की संख्या - 80
कुल भवनों की संख्या - 1,49,565
जलकर से आच्छादित भवन - 1,22,492
कुल जलसंयोजन की संख्या - 81,593
अमृत योजना में हो रहा जलसंयोजन - 42,432

बोले अधिकारी
महाप्रबंधक जलकल महेश चंद्र आजाद ने कहा कि नियमानुसार जिन इलाकों में पानी की पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, उसके 200 मीटर दायरे में आने वाले मकान टैक्स के दायरे में आते हैं। शहर में ऐसे घर हैं। नगर निगम शहर के सभी घरों तक जल्द से जल्द पानी पहुंचाने के लिए लक्ष्य है। अमृत योजना के तहत 42 हजार 432 घरों तक पानी का कनेक्शन तेजी से पहुंचाया जा रहा है।


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed