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दुख भरी दास्तां: जिम्मेदारियों के बोझ तले गुम हो गई 'मुस्कान' की मुस्कुराहट, दो वक्त की रोटी को मोहताज हुआ परिवार

Sun, 23 May 2021 10:42 AM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 23 May 2021 10:42 AM IST
सार

मां-बाप का साया उठा, दो भाई व एक बहन हैं मानसिक रूप से बीमार। स्नातक करने के बाद छोड़ी पढ़ाई, मेंहदी व सिलाई-कढ़ाई करके चलाती हैं खर्च। कोरोना कर्फ्यू में बढ़ी मुश्किलें, एनजीओ ने बढ़ाया मदद का हाथ।

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struggle story of Muskan lost under burden of responsibilities in gorakhpur
बहनों के साथ मुस्कान व आजाद पांडेय ने राशन पहुंचाकर मदद की। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मां-बाप का साया उठ चुका है। घर में दो भाई और एक बहन मानसिक रूप से बीमार हैं। सभी का इलाज चलता है। एक बहन तीनों की देखभाल के लिए बराबर उनके साथ रहती है। जबकि बड़ी बहन ने घर का खर्च चलाने की खातिर पढ़ाई छोड़ दी और मेंहदी लगाने व सिलाई-कढ़ाई का काम करती हैं।
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यह गोरखपुर जिले के माधोपुर स्थित सुभाषनगर बोस कॉलोनी के कश्यप परिवार की दुख भरी दास्तां है। जहां मां का प्यार और पिता की जिम्मेदारी उठाने में बड़ी बेटी मुस्कान की मुस्कुराहट गुम हो गई है। घर में खाने को एक दाना नहीं बचा था, तो ऐसे वक्त में स्माइल रोटी बैंक ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है और सप्ताह भर का राशन घर पहुंचाया है।
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दरअसल, कश्यप परिवार पर विपत्तियों का पहाड़ करीब डेढ़ दशक पहले टूट पड़ा। जब मुस्कान के पिता बृजलाल कहीं लापता हो गए और घर नहीं लौटे। वह आढ़ती का काम करते थे। इसके बाद मां निर्मला देवी ने अपने छह बेटे-बेटियों की परवरिश मेहनत-मजदूरी करके की। वर्ष 2017 में वह भी गुजर गईं। बड़े भाई राकेश का निधन हो गया। मुस्कान ने बताया कि वह आसपास के लोगों को मेंहदी लगाती हैं। साथ ही वस्त्रों पर कढ़ाई करती हैं। 
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स्कूल प्रबंधक ने दिया नौकरी का ऑफर

कोरोना कर्फ्यू में अब बहुत कम ही लोग बुलाते हैं। दो भाई व बहन मानसिक रूप से बीमार हैं। इनका इलाज शहर के एक डॉक्टर के यहां चलता है। आर्थिक तंगी के चलते पिछले कुछ दिनों से दवाएं भी बंद हैं। परिवार के भरण-पोषण में एक और छोटी बहन पूजा (18) मदद करती है। मुस्कान के मुताबिक, मानसिक रूप से परेशान छोटी बहन दो बार घर से लापता हो चुकी है। अब उसके साथ साये की तरह रहना पड़ता है।

तीन दिन पहले पड़ोसी की सूचना पर स्माइल रोटी बैंक के आजाद पांडेय घर पहुंचे तो आर्थिक तंगी देखकर दंग रह गए। बकौल आजाद, दो दिन भोजन पहुंचाया, लेकिन जब उनके यहां किचन देखा तो सप्ताह भर का राशन (चावल, दाल, आटा, रिफाइंड, नमक, बिस्किट आदि) पहुंचाया है। अब आगे के लिए भी इंतजाम में लगा हूं।
 
मुस्कान की मुफलिसी की कहानी जब आजाद पांडेय ने विकास पब्लिक स्कूल के प्रबंधक विकास चौरसिया को सुनाई तो उन्होंने मुस्कान को पढ़ाने के लिए ऑफर दिया है। आजाद ने बताया कि भाई-बहनों की निशुल्क शिक्षा की जिम्मेदारी उठाने का भी आश्वासन विकास चौरसिया ने दिया है। इससे कश्यप परिवार को थोड़ी-बहुत राहत मिल जाएगी।

एमए करना चाहती हैं मुस्कान

मुस्कान ने बताया कि वह आगे भी पढ़ाई करना चाहती हैं। एमए करने के बाद शिक्षक बनना उनका सपना है। लेकिन अब उसे इस मुश्किल हालात में सपना पूरा होता नहीं दिखता। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी शुरू की। मुस्कान ने बताया कि साइंस क्लासेज के विमलेश मिश्रा उसे निशुल्क कोचिंग देते थे, लेकिन लॉकडाउन में वह भी बंद है।

गरीबी रेखा के नीचे का नहीं बना राशन कार्ड
मुस्कान का राशन कार्ड बना है, लेकिन गरीबी रेखा के नीचे का नहीं है। इससे तमाम सरकारी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। राशन भी पर्याप्त नहीं मिल पाता। मुस्कान की मांग है कि गरीबी रेखा के नीचे का राशन कार्ड बनवाया जाए।
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