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Gorakhpur: गोरखनाथ मंदिर भी जल्द रेड जोन में, ड्रोन उड़ाया तो खैर नहीं; 12KM की परिधि येलो जोन में

Sat, 25 Nov 2023 03:15 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 25 Nov 2023 03:15 PM IST
सार

एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि ड्रोन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की नई पॉलिसी जारी हो गई है। अब ड्रोन उड़ाने के लिए तीन जोन बना दिए गए हैं। 

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Strict action will be taken Gorakhnath temple will also be in red zone soon
गोरखनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

एयरफोर्स की तर्ज पर गोरखनाथ मंदिर भी जल्द ही रेड जोन में शामिल होगा। रेड जोन में ड्रोन नहीं उड़ा सकेंगे। रेड जोन से 12 किलोमीटर की परिधि को येलो जोन में रखा गया है। यहां 200 फीट की ऊंचाई तक ड्रोन उड़ा सकते हैं, लेकिन इसके ऊपर की ऊंचाई पर जाने के लिए अनुमति लेनी होगी। नहीं तो पकड़े जाने पर केस भी दर्ज होगा। ड्रोन भी जब्त कर लिया जाएगा। इतना ही नहीं एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी देना होगा।

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इस व्यवस्था का मकसद है कि ड्रोन की मदद से आंतरिक सुरक्षा को खतरा न होने पाए। यानी शादी में ड्रोन उड़ाने में दिक्कत नहीं है, लेकिन अगर फोटोग्राॅफी व वीडियोग्राॅफी का शौक है और अधिक ऊंचाई पर ड्रोन उड़ाना है तो अनुमति लेनी होगी। इसका प्रोफाॅर्मा एसपी कार्यालय से मिलेगा।
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जानकारी के मुताबिक, ड्रोन पॉलिसी-2023 को उप्र कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। नए बदलाव के बारे में शुक्रवार को एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि शहर को तीन जोन में बांटा गया है। रेड, येलो और ग्रीन। रेड जोन में वर्तमान में एयरपोर्ट को रखा गया है, जिसके आसपास किसी को भी ड्रोन उड़ाने की इजाजत नहीं है। हालांकि, एयरपोर्ट ने जीरो टैग भी किया है, और यहां ड्रोन उड़ भी नहीं सकता है। जबकि येलो जोन और ग्रीन जोन के लिए ड्रोन उड़ाने का मानक तय किया गया है।
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उस मानक से अधिक ऊंचाई पर ड्रोन उड़ाने के लिए एसपी ऑफिस से अनुमति लेनी होगी। एसपी ने बताया कि रेड जोन कहीं भी वीआईपी मूवमेंट के समय बनाया जा सकता है। इसके लिए डीएम की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी है। अभी हाल ही में गोरखनाथ मंदिर में कुछ युवकों ने रील्स बनाने के लिए ड्रोन उड़ा दिया था। पुलिस ने ड्रोन जब्त कर उन युवकों पर कार्रवाई भी की थी। सुरक्षा के लिहाज से गोरखनाथ मंदिर को भी रेड जोन में शामिल किया जा सकता है, इस पर मंथन चल रहा है।

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क्या है रेड, येलो और ग्रीन जोन
रेड जोन :
गोरखपुर एयरपोर्ट और उसके आसपास का क्षेत्र है। गोरखपुर एयरपोर्ट जियो फेंसिंग तकनीक से लैस है। यह ऐसी तकनीक है, जिससे आसपास के क्षेत्र में कोई भी ड्रोन उड़ाने का प्रयास करता है तो वह ऐसा नहीं करने देती है। यानी रेड जोन में ड्रोन उड़ा पाना भी असंभव है।

येलो जोन : रेड जोन से बाहर का 12 किमी तक का क्षेत्र येलो जोन बनाया गया है। यलो जोन में 200 फीट ऊंचाई तक ड्रोन उड़ाने के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। इससे अधिक ऊंचाई पर ड्रोन उड़ाने के लिए अनुमति लेनी पड़ेगी।

ग्रीन जोन : येलो जोन के बाहर का जो एरिया होगा, वह ग्रीन जोन माना जाएगा। ग्रीन जोन में 400 फीट ऊंचाई तक ड्रोन बिना अनुमति के उड़ाया जा सकेगा। इससे अधिक ऊंचाई पर ड्रोन उड़ाने के लिए अनुमति लेनी होगी।

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ड्रोन उड़ाने के लिए कराना होगा पंजीकरण
ड्रोन रखने वालों को पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। नागर विमानन महानिदेशायल (डीजीसीए) के पोर्टल पर ड्रोन का पंजीकरण होगा। इसके साथ ही ड्रोन की गतिविधियों पर थाना स्तर पर भी निगरानी की जाएगी। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों, राज्य कर्मियों को ड्रोन की तकनीक, ड्रोन के संचालन और ड्रोन संबंधी कानूनी नियमों और शर्तों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

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एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि ड्रोन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की नई पॉलिसी जारी हो गई है। अब ड्रोन उड़ाने के लिए तीन जोन बना दिए गए हैं। इसके लिए नियम और मानक बने हैं, उसका सभी को पालन करना होगा। शहर के किसी भी क्षेत्र को अस्थायी, स्थायी रेड जोन घोषित किया जा सकता है। इसके लिए जिला स्तरीय कमेटी बनाई गई है, जो यह फैसला करेगी। नियम तोड़ने वालों पर केस भी दर्ज होगा और एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
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