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Gorakhpur: गोरखपुर में गुंडों के हाथों में छोटे अस्पतालों के संचालन की बागडोर, लुट रहे मरीज

Mon, 01 Aug 2022 10:54 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 01 Aug 2022 10:54 AM IST
सार

एसपी सिटी डॉ. कृष्ण कुमार विश्नोई ने कहा कि फायरिंग की घटना में शामिल मुख्य आरोपी सहित अन्य की तलाश में पुलिस लगी है। पुलिस गहनता से वजहों की जांच कर रही है। बदमाशों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
 

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reins of operation of small hospitals in hands of goons in Gorakhpur
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पुलिस ने अपराधियों की नकेल कसी तो नर्सिंगहोम संचालकों की छांव में अपना धंधा जमा लिए हैं। सुधार का चोला पहनकर गरीब मरीजों को लूट रहे हैं। इसकी हकीकत आपस में मरीज को लेकर गुटबाजी में गोली चलने पर ही समाने आ रही है।

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वर्ष 2018 में कमिश्नर आवास के पास फायरिंग का मामला हो या फिर शनिवार सुबह डीआईजी बंगले के पास फायरिंग की घटना। दोनों में ही वजह एक ही अस्पताल के संचालन को लेकर आपसी रंजिश। हालांकि, एसपी सिटी कृष्ण कुमार विश्नोई ने इसे बड़ी गंभीरता से लिया है और पुरानी फाइलों को भी खोलना शुरू कर दिया है।
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दरअसल, शहरी क्षेत्र में कई छोटे क्लीनिक व नर्सिंगहोम संचालित हो रहे हैं, जिस पर स्वास्थ्य विभाग की नजर ही नहीं पड़ती। जब कभी बड़ा मामला होता है तब स्वास्थ्य महकमा सक्रिय होता है और फिर कार्रवाई की जाती है।
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इसी तरह का एक मामला चार अप्रैल 2022 को पैडलेगंज के न्यू लोटस नर्सिंगहोम में सामने आया था। यहां पर मरीज को बंधक बनाकर रुपये के लिए दबाव बनाया जा रहा था। बाद में पुलिस के जाने पर छोड़ा गया था। इस मामले में सीएमओ के आदेश पर नर्सिंगहोम को सील भी किया गया था।

बताया जा रहा है कि तब यहां पर कामकाज देखने वाला आदित्य सिंह इसके बाद ही जेएस अस्पताल का काम देखने लगा। शनिवार को आदित्य सिंह के विवाद में ही सूरज सिंह हिस्ट्रीशीटर ने फायरिंग की है।

 

केस एक
24 अप्रैल 2018 को कमिश्नर आवास के पास बेतियाहाता चौराहा स्थित क्लीनिक के विवाद में संदीप नाम के युवक को गोली मारी गई थी। इस विवाद में भी एक ओर से जिला बदर रह चुके रमन सिंह तो दूसरी ओर से पूर्व विधायक पुत्र व ब्लॉक प्रमुख रहे प्रिंस सिंह का नाम सामने आया था। बाद में पुलिस ने प्रिंस सिंह को गिरफ्तार कर उसके पास से कारबाइन बरामद की थी। इसमें भी हिस्ट्रीशीटर सूरज सिंह का नाम सामने आया था।

केस दो
30 जुलाई को जेएस अस्पताल पर चढ़कर फायरिंग की गई है। इस बार फिर हिस्ट्रीशीटर सूरज सिंह का नाम आया। सूरज सिंह ने ही साथियों के साथ फायरिंग की है। इसके पीछे भी अस्पतालों का विवाद सामने आ रहा है। पता चला है कि सूरज सिंह एक अस्पताल का कामकाज देख रहा था और इसे लेकर ही जेएस अस्पताल के संचालन में सहयोग करने वाले आदित्य सिंह से उसका विवाद हो गया, जिसके बाद फायरिंग की गई।

एसपी सिटी डॉ. कृष्ण कुमार विश्नोई ने कहा कि फायरिंग की घटना में शामिल मुख्य आरोपी सहित अन्य की तलाश में पुलिस लगी है। पुलिस गहनता से वजहों की जांच कर रही है। बदमाशों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

 
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