Exclusive: श्रीप्रकाश शुक्ला से बड़ा इनामी राघवेंद्र पुलिस की ढिलाई से दोषमुक्त, 2018 में हुआ था डबल मर्डर
राघवेंद्र के अपराध को देखते हुए एडीजी अखिल कुमार ने एक लाख रुपये इनाम घोषित कर फाइल डीजीपी कार्यालय में भेज दी थी। 21 मई 2021 को डीजीपी ने राघवेंद्र पर इनाम बढ़ाकर 2.50 लाख रुपये कर दिया। इसके बाद जोन के सभी थाने, चौकी में इसका फोटो चस्पा कर दिया गया।
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माफिया डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला से भी बड़े 2.50 लाख रुपये के इनामी राघवेंद्र यादव को सजा दिलाने की पुलिस की कोशिश कोर्ट में धड़ाम हो गई। पुलिस उसे न तो गिरफ्तार कर सकी और न ही मजबूत पैरवी या साक्ष्य जुटाने काम ही सही से किया।
इसी को आधार बनाते हुए कोर्ट ने उसे दोषमुक्त कर केस को ही खत्म कर दिया। पुलिस की इस हार की सबसे बड़ी वजह राघवेंद्र का अब तक न पकड़ा जाना ही है। पुलिस उसे भगोड़ा घोषित कर संदेह के आधार पर आरोपी बनाते हुए चार्जशीट दाखिल की थी।
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इसके अलावा केस में आरोपी बनाए गए राघवेंद्र के परिवार के बसंतलाल यादव, रामदरश यादव, सुदर्शन यादव, रामलखन यादव, शर्मा यादव, संतोष कुमार, रमाकांत यादव भी दोषमुक्त हो गए। अब भाई राममिलन यादव पूरे केस को लेकर हाईकोर्ट चले गए हैं। उनका कहना है कि उनके पास पर्याप्त साक्ष्य हैं और वह हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती देंगे।
जानकारी के मुताबिक, झंगहा में एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या में वांछित आरोपी व गैंगस्टर राघवेंद्र यादव पर 2.50 लाख रुपये का इनाम है। राघवेंद्र यादव ने अपने गांव सुगहा में सात जनवरी 2016 को दिनदहाड़े बलवंत (50) और उनके भतीजे कौशल (20) की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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इस केस में राघवेंद्र के साथ ही रामलखन को भी आरोपी बनाया गया था। इसी केस की पैरवी रिटायर्ड दरोगा जयहिंद यादव कर रहे थे। 10 अप्रैल 2018 को रिटायर्ड दरोगा अपने बेटे नागेंद्र के साथ कोर्ट की पैरवी करके घर लौट रहे थे। रास्ते में दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद से राघवेंद्र फरार है।
पुलिस ने इस मामले में राघवेंद्र यादव के अलावा उसके परिवार के अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया। कोर्ट में आठ गवाहों को भी खड़ा किया गया, लेकिन किसी की गवाही से कोर्ट में यह नहीं साबित हो सका कि हत्या में राघवेंद्र और उसके परिवार का ही हाथ है।
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कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुना दिया है और अब पीड़ित परिवार फैसले को लेकर हाईकोर्ट में चला गया है। हालांकि, 2016 में हुई हत्या का मामला अब भी कोर्ट में विचाराधीन है।
डीजीपी ने घोषित किया था ढाई लाख का इनाम
राघवेंद्र के अपराध को देखते हुए एडीजी अखिल कुमार ने एक लाख रुपये इनाम घोषित कर फाइल डीजीपी कार्यालय में भेज दी थी। 21 मई 2021 को डीजीपी ने राघवेंद्र पर इनाम बढ़ाकर 2.50 लाख रुपये कर दिया। इसके बाद जोन के सभी थाने, चौकी में इसका फोटो चस्पा कर दिया गया। एसटीएफ भी इसकी तलाश में लगा दी गई, लेकिन अभी तक पुलिस इस बदमाश को पकड़ नहीं पाई है। इनाम के हिसाब से राघवेंद्र गोरखपुर जोन का सबसे बड़ा बदमाश है। इससे ज्यादा इनाम 90 की दशक में अपराध से दहशत फैलाने वाले माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला पर भी नहीं था। श्रीप्रकाश शुक्ला पर दो लाख रुपये तक ही इनाम था।
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खोज रही थी पुलिस, हत्या कर हो गया था फरार
राघवेंद्र ने जब पहले दो लोगों की हत्या की थी, उस समय वह फरार चल रहा था। पुलिस तलाश रही थी, लेकिन पकड़ नहीं पाई। इस बीच गांव आकर राघवेंद्र ने दोबारा दुस्साहसिक घटना को अंजाम दिया। सरेराह ही रिटायर्ड दरोगा व उनके बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी। यही वजह थी कि पुलिस-प्रशासन को ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा था।
परिवार को लाइसेंस और सुरक्षा दी गई थी
चाचा-भतीजे की हत्या के बाद रिटायर्ड दारोगा व उनके परिवार को सुरक्षा दी गई थी। रिटायर्ड दारोगा के सबसे छोटे बेटे राममिलन को शस्त्र लाइसेंस भी दिया था। इसके बाद भी आरोपी घटना को अंजाम देने में कामयाब हो गया। पुलिस के मुताबिक अब भी परिवार के पास सुरक्षा मौजूद है। छोटे बेटे राममिलन व उनके परिवार की सुरक्षा सतर्कता के साथ की जा रही है।
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एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि कोर्ट में पुलिस ने गवाही और साक्ष्यों को समय से प्रस्तुत किया था। कोर्ट से केस खारिज हुआ है। पुलिस इसकी अपील हाईकोर्ट में करेगी।