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Deoria Assembly By Election 2020: देवरिया में 53 वर्ष के इतिहास में कोई महिला नहीं बनी विधायक

Wed, 21 Oct 2020 01:27 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो विनोद कुमार तिवारी, देवरिया।
विनोद कुमार तिवारी, देवरिया। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 21 Oct 2020 01:27 PM IST
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no woman became mla in 53 years in Deoria history
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

लोकसभा, विधानसभा चुनाव में वोटिंग प्रतिशत में महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा रहती हैं, लेकिन देवरिया सदर विधानसभा क्षेत्र के 53 वर्ष के इतिहास में 14 बार हुए चुनाव में कोई महिला अब तक विधायक नहीं बन सकी। महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने वाले जब चुनाव में टिकट देने की बात आती है तो सभी राजनीतिक दल चुप्पी साध लेते हैं।

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देश में वर्ष 1935 में भारत शासन अधिनियम में भारतीय महिलाओं को मत देने एवं चुनाव लड़ने का अधिकार प्रदान किया गया। दहलीज के भीतर लोकतंत्र की साख बढ़ी है। इसके बावजूद सदर विधानसभा क्षेत्र में 14 बार हुए चुनाव में कभी कोई महिला न मुख्य लड़ाई में रही और न ही चुनाव ही जीत सकीं। इस बार के चुनाव में 20 अक्तूबर तक के आंकड़ों में कुल मतदाता 3,36,565 हैं। इसमें 1,54,302 महिलाएं हैं।
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विभिन्न राजनीतिक दल महिलाओं को अपने पाले में करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं। उन्हें रिझाने के लिए अपनी-अपनी पार्टी की महिलाओं की टीम भी उतार देते हैं, लेकिन टिकट की बात आती है तो उन्हें अनसुना कर दिया जाता है। जो भी हो इस बार के उपचुनाव में निर्णायक भूमिका में महिलाएं होंगी। वैसे कोई महिला प्रत्याशी इस बार के चुनाव में अपना भाग्य नहीं आजमा रही हैं।
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बोली महिलाएं, अगर हम एक हो जाएं तो किसी की भी किस्मत चमका दें

नगरपालिका की अध्यक्ष अलका सिंह कहती हैं कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं। राजनीति में भी उन्हें अवसर दिया जाना चाहिए। नगरपालिका का चुनाव लड़ चुकीं डॉ. उषा तिवारी का कहना है कि राजनीतिक दल महिलाओं की हिस्सेदारी के सवाल पर चुप हो जाते हैं। महिला वोटर एक हो जाएं तो जिसकी चाहे उसकी किस्मत चमका दें। हिंदी की विभागाध्यक्ष रहीं प्रेमशीला शुक्ला का कहना है कि वोटिंग प्रतिशत देखा जाए तो महिलाएं कभी पीछे नहीं रही हैं।

राज्यसभा सांसद रह चुकीं कनक लता सिंह का कहना है कि राजनीति में शीर्ष पर महिलाएं हैं। जिस क्षेत्र में उन्हें मौका दिया गया उस क्षेत्र में महिलाओं ने बेहतर काम किया है। सदर विधानसभा क्षेत्र का दुर्भाग्य है कि यहां किसी महिला को प्रतिनिधित्व का मौका नहीं मिला। पूर्व विधायक गजाला लारी का कहना है कि महिला होने के बावजूद उन्होंने जो विकास के आयाम स्थापित किए हैं वह कोई और नहीं कर सका।

गजाला लारी पहली ऐसी महिला, जो तीन बार रहीं विधायक
जिले की गजाला लारी पहली ऐसी महिला हैं, जिन्हें तीन बार विधायक बनने का गौरव हासिल है। चौथी बार भी चुनाव लड़ीं और मुख्य संघर्ष में रहीं। गजाला लारी अपने पति मुराद लारी की मौत के बाद पहली बार वर्ष 2002 के आम चुनाव में सलेमपुर विधानसभा क्षेत्र से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ीं और जीतीं।

वर्ष 2007 के चुनाव में सपा के टिकट पर चुनाव लड़ीं और दोबारा जीत हासिल की। वर्ष 2012 में सलेमपुर विधानसभा के आरक्षित होने के बाद गजाला लारी नवसृजित विधानसभा रामपुर कारखाना से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ीं और विजयश्री हासिल कीं। वर्ष 2017 के चुनाव में सपा के टिकट पर फिर मैदान में उतरीं, लेकिन पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी की वजह से चुनाव हार गईं।

 

2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटीं हैं महिलाएं

उधर, इसके पूर्व गौरीबाजार विधानसभा से विधायक रहे स्व. रणजीत सिंह की हत्या के बाद उनकी पत्नी लालझारी देवी चुनाव लड़ीं और जीतीं। बरहज विधानसभा से पैना की कमलावती सिंह, इसके कई वर्ष बाद तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख रहे रामऔतार यादव की पत्नी कुंती देवी सपा से चुनाव लड़ीं, लेकिन हार गईं। वर्ष 2012 में बरहज से बसपा से रेनू जायसवाल चुनाव लड़ीं, हार गईं, लेकिन उन्होंने 53896 मत प्राप्त कर अन्य प्रत्याशियों का पसीना छुड़ा दिया।

सलेमपुर विधानसभा क्षेत्र से विजय लक्ष्मी गौतम ने वर्ष 2012 में भाजपा से भाग्य आजमाया, उन्हें 22.39 प्रतिशत मत प्राप्त हुए, लेकिन वह हार गईं। 2017 में विजय लक्ष्मी को भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो उन्होंने सपा का दामन थाम लिया। विजय लक्ष्मी चुनाव में 50521 मत प्राप्त करने के बाद भी चुनाव हार गईं।

सलेमपुर से ही वर्ष 2002 में सपा से शांति यादव चुनाव लड़ी थीं। 29.33 प्रतिशत उन्हें वोट प्राप्त हुए थे, लेकिन वह चुनाव हार गई थीं। इनके अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकीं डॉ. कृष्णा जायसवाल सहित कई महिलाएं चुनावी मैदान में उतर चुकी हैं। विधायक रह चुके स्व. रणजीत सिंह एवं लालझारी देवी की पुत्री सीमा सिंह कहती हैं कि महिला अधिकार की बात सब करते, लेकिन देने की बात आती है तो चुप्पी साध लेते हैं।

उपचुनाव में भले ही किसी महिला उम्मीदवार को राजनीतिक दलों ने महत्व नहीं दिया, लेकिन वर्ष 2022 विधानसभा एवं आगामी लोकसभा के चुनाव की तैयारी में बीस से अधिक महिलाएं जुटी हैं। इसमें सपा से तीन बार विधायक रह चुकीं गजाला लारी, पूर्व राज्यसभा सदस्य कनकलता सिंह, भाजपा में प्रदेश स्तर की नेता मधु मिश्रा, कैबिनेट मंत्री रह चुके राजमंगल पांडेय की पुत्रवधू डॉ. अर्चना पांडेय, महिला कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शहला अहरारी, विधायक रह चुके स्व. रणजीत सिंह एवं लालझारी देवी की पुत्री सीमा सिंह, कांग्रेस की तारा देवी, विजय लक्ष्मी गौतम, गोरखपुर की मेयर रह चुकीं डॉ. सत्या पांडेय, नगरपालिका की अध्यक्ष अलका सिंह, सपा की गुंजन यादव, रुद्रपुर की कादंबरी सिंह, ब्लॉक प्रमुख रह चुकीं बिंदा सिंह कुशवाहा आदि के नाम प्रमुख हैं।

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