{"_id":"5f4ff3b78ebc3e54e073fad1","slug":"kisan-samman-nidhi-gorakhpur-gorakhpur-city-news-gkp3640581156","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसान सम्मान निधि : जिनके पास खुद की खेती नहीं वह भी करा रहे पंजीयन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसान सम्मान निधि : जिनके पास खुद की खेती नहीं वह भी करा रहे पंजीयन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसान सम्मान निधि : जिनके पास खुद की खेती नहीं वह भी करा रहे पंजीयन
गोरखपुर। ‘किसान सम्मान निधि’ के लालच में कई अपात्रों के भी योजना के तहत पंजीकरण करा लेने से कृषि विभाग की मुसीबत बढ़ गई है। कोरोना संक्रमण काल में इस योजना के तहत पंजीकरण कराने वालों की संख्या अचानक बढ़ गई है। अप्रैल 2020 तक जहां करीब 4.50 लाख किसानों का ही पंजीकरण था वहीं जुलाई तक यह संख्या बढ़कर करीब छह लाख पहुंच गई। यानी तीन महीने में करीब डेढ़ लाख लोगों ने पंजीकरण करा लिए। खुद विभाग भी यह मान रहा है कि जिनके पास कृषि योग्य जमीन नहीं वे भी पंजीकरण करा ले रहे। उप निदेशक कृषि संजय सिंह का कहना है कि जानबूझकर गलत पंजीकरण कराने वालों का पंजीकरण निरस्त कराने के साथ ही उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई भी की जाएगी।
उप निदेशक कृषि ने लोगों से अपील की है कि यह योजना पूरी तरह से छोटी जोत के किसानों के लिए है। ऐसे में योजना के तहत जो पात्र किसान हैं उनका हक मारने की कोशिश नहीं करें। उन्होंने कहा कि किसानों को कोई दिक्कत न हो इसलिए वह जनसेवा केंद्रों पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण के एक सप्ताह बाद सभी मूल अभिलेख मसलन आधार, बैंक पासबुक की छायाप्रति, खतौनी एवं घोषणा-पत्र तथा इन अभिलेखों की एक सेट स्व-प्रमाणित छायाप्रतियों के साथ सत्यापन के लिए क्षेत्र के राजकीय कृषि बीज भंडार अथवा कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारी से संपर्क कर देना होगा।
ये नहीं करा सकते पंजीकरण
सरकारी सेवा में कार्यरत, पेंशनर (10000 रुपये से अधिक), संवैधानिक पदधारक, पंजीकृत वकील, डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टेड एकाउंटेेंट, आर्किटेक्ट तथा आयकर जमा करने वाले कृषक इस योजना में पात्र नहीं है। एक कृषक परिवार से मात्र एक सदस्य ही योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र है। उसके नाम से राजस्व अभिलेखों में कृषि योग्य भूमि भी होनी जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
गोरखपुर। ‘किसान सम्मान निधि’ के लालच में कई अपात्रों के भी योजना के तहत पंजीकरण करा लेने से कृषि विभाग की मुसीबत बढ़ गई है। कोरोना संक्रमण काल में इस योजना के तहत पंजीकरण कराने वालों की संख्या अचानक बढ़ गई है। अप्रैल 2020 तक जहां करीब 4.50 लाख किसानों का ही पंजीकरण था वहीं जुलाई तक यह संख्या बढ़कर करीब छह लाख पहुंच गई। यानी तीन महीने में करीब डेढ़ लाख लोगों ने पंजीकरण करा लिए। खुद विभाग भी यह मान रहा है कि जिनके पास कृषि योग्य जमीन नहीं वे भी पंजीकरण करा ले रहे। उप निदेशक कृषि संजय सिंह का कहना है कि जानबूझकर गलत पंजीकरण कराने वालों का पंजीकरण निरस्त कराने के साथ ही उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई भी की जाएगी।
उप निदेशक कृषि ने लोगों से अपील की है कि यह योजना पूरी तरह से छोटी जोत के किसानों के लिए है। ऐसे में योजना के तहत जो पात्र किसान हैं उनका हक मारने की कोशिश नहीं करें। उन्होंने कहा कि किसानों को कोई दिक्कत न हो इसलिए वह जनसेवा केंद्रों पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण के एक सप्ताह बाद सभी मूल अभिलेख मसलन आधार, बैंक पासबुक की छायाप्रति, खतौनी एवं घोषणा-पत्र तथा इन अभिलेखों की एक सेट स्व-प्रमाणित छायाप्रतियों के साथ सत्यापन के लिए क्षेत्र के राजकीय कृषि बीज भंडार अथवा कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारी से संपर्क कर देना होगा।
विज्ञापन
ये नहीं करा सकते पंजीकरण
सरकारी सेवा में कार्यरत, पेंशनर (10000 रुपये से अधिक), संवैधानिक पदधारक, पंजीकृत वकील, डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टेड एकाउंटेेंट, आर्किटेक्ट तथा आयकर जमा करने वाले कृषक इस योजना में पात्र नहीं है। एक कृषक परिवार से मात्र एक सदस्य ही योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र है। उसके नाम से राजस्व अभिलेखों में कृषि योग्य भूमि भी होनी जरूरी है।
विज्ञापन