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गोरखपुर में लिटरेरी फेस्टिवल, साहित्यकार मैत्रेई पुष्पा ने बताया 'आई लव यू' का मतलब
Sat, 01 Feb 2020 06:17 PM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Sat, 01 Feb 2020 06:17 PM IST
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गोरखपुर लिटेररी फेस्टिवल का शुभारंभ हुआ।
- फोटो : अमर उजाला
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शहर के साहित्यिक, सांस्कृतिक फलक पर शब्द संवाद का मंच उपलब्ध कराने वाले गोरखपुर लिटेररी फेस्टिवल का शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस महोत्सव का उद्घाटन सत्र सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में शुरू हुआ। इस दौरान प्रख्यात साहित्यकार उपन्यासकार मैत्रेई पुष्पा शब्द संवाद समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा- आज का युवा चिट्टियां लिखना भूल गया है उसके पास समय ही नहीं है जबकि सच यह है कि समय हम खुद बनाते हैं
आई लव यू कहना प्रेम नहीं हो सकता जब तक हम उसमें दिल के भाव को प्रकट ना करें कहानी उपन्यास भी समाज के नाम पत्र होते हैं मैंने अपने निजी जीवन में प्रेम पत्र लिखना शुरू किया, तो साहित्य के प्रति रुचि बढ़ी और मेरा प्रेमी पत्र लिखता रहा और मैं इस मुकाम पर पहुंचकर यह कहना है। उन्होंने कहा कि अब समाज में नफरत पत्र हो गया है। इसका प्रमुख कारण सोशल मीडिया है, हम जब खत लिखते थे तो उसमें अपनी भावनाएं व्यक्त करते थे। लेकिन अब हम सिर्फ नफरत फैला रहे हैं।
प्रख्यात साहित्यकार हिंदी साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर विश्व्नाथ तिवारी ने कहा कि संवाद जहां खत्म होती है हिंसा वहीं से शुरू होती है अगर शब्द नहीं होते तो दुनिया पूरी तरह से अंधेरी होती प्रेशर त्रिपाठी ने कहा कि कृत्य कार और अनुमोदित तीन तरह की हिंसा होती हैं आज के समाज में जो घटित हो रहा है उसमें अनुमोदित हिंसा ही महत्वपूर्ण है और हम सब उस में भागीदार हैं उन्होंने कहा कि संवाद से ही हम हिंसा को खत्म कर सकते हैं और दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा है।
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आई लव यू कहना प्रेम नहीं हो सकता जब तक हम उसमें दिल के भाव को प्रकट ना करें कहानी उपन्यास भी समाज के नाम पत्र होते हैं मैंने अपने निजी जीवन में प्रेम पत्र लिखना शुरू किया, तो साहित्य के प्रति रुचि बढ़ी और मेरा प्रेमी पत्र लिखता रहा और मैं इस मुकाम पर पहुंचकर यह कहना है। उन्होंने कहा कि अब समाज में नफरत पत्र हो गया है। इसका प्रमुख कारण सोशल मीडिया है, हम जब खत लिखते थे तो उसमें अपनी भावनाएं व्यक्त करते थे। लेकिन अब हम सिर्फ नफरत फैला रहे हैं।
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प्रख्यात साहित्यकार हिंदी साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर विश्व्नाथ तिवारी ने कहा कि संवाद जहां खत्म होती है हिंसा वहीं से शुरू होती है अगर शब्द नहीं होते तो दुनिया पूरी तरह से अंधेरी होती प्रेशर त्रिपाठी ने कहा कि कृत्य कार और अनुमोदित तीन तरह की हिंसा होती हैं आज के समाज में जो घटित हो रहा है उसमें अनुमोदित हिंसा ही महत्वपूर्ण है और हम सब उस में भागीदार हैं उन्होंने कहा कि संवाद से ही हम हिंसा को खत्म कर सकते हैं और दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा है।
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