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भगवान विष्णु की उपासना का पर्व अपरा एकादशी आज, गलती से भी ना करे ये काम

Mon, 18 May 2020 01:05 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 18 May 2020 01:05 AM IST
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festival of worship of Lord Vishnu Apara Ekadashi today
भगवान विष्णु

भगवान विष्णु की उपासना का पर्व अपरा एकादशी सोमवार को मनाई जाएगी। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने वाले श्रद्धालुओं के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और अंत समय में उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही व्रती को सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। व्रत को करने से न सिर्फ भगवान विष्णु बल्कि माता लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं।

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अपरा एकादशी की पूजन विधि
पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि एकादशी से एक दिन पूर्व ही व्रत के नियमों का पालन करें। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की साफ-सफाई करें। इसके बाद स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें। अब घर के मंदिर में भगवान विष्णु और बलराम की प्रतिमा, फोटो या कैलेंडर के सामने दीपक जलाएं।
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इसके बाद विष्णु की प्रतिमा को अक्षत, फूल, मौसमी फल, नारियल और मेवे चढ़ाएं। विष्णु की पूजा करते समय तुलसी के पत्ते अवश्य रखें। इसके बाद धूप दिखाकर श्री हरि विष्णु की आरती उतारें। अब सूर्यदेव को जल अर्पित करें।
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एकादशी की कथा सुनें या सुनाएं। निर्जला व्रत करें। शाम के समय तुलसी के पास गाय के घी का एक दीपक जलाएं। रात के समय सोना नहीं चाहिए। भगवान का भजन-कीर्तन करना चाहिए। अगले दिन पारण के समय किसी ब्राह्मण या गरीब को यथाशक्ति भोजन कराए और दक्षिणा देकर विदा करें। इसके बाद अन्न और जल ग्रहण कर व्रत का पारण करें।

ब्रह्म पुराण में मिलता है कथा का उल्लेख

पंडित डॉ. जोखन पांडेय ने बताया कि इस व्रत की कथा का उल्लेख ब्रह्म पुराण में मिलता है। प्राचीन काल में महीध्वज नाम का एक राजा था। उसका व्रतध्वज नामक छोटा भाई बड़ा ही अधर्मी, अन्यायी और क्रूर था। व्रत अपने बड़े भाई से ईष्या-द्वेष रखकर हानि पहुंचाने का अवसर ढूंढता रहता था।

एक दिन बड़े भाई महीध्वज की हत्या कर पीपल के वृक्ष के नीचे गाड़ दिया। वह राजा उस वृक्ष पर प्रेत योनि में रहकर अनेक प्रकार के उत्पात मचाने लगा। एक दिन उस वृक्ष के नीचे से धौम्य ऋषि गुजरे तो अपने तपोबल से प्रेत के कारनामे और उसकी कथा जानी।

धौम्य ने राजा महीध्वज (प्रेत) को नीचे बुलाकर कहा कि तुम्हारे पूर्व जन्म के पाप कर्मों के कारण तुम्हारी हत्या हुई और प्रेत योनि मिली है। यदि तुम इससे मुक्ति चाहते हो तो ज्येष्ठ मास की अपरा एकादशी का व्रत करो। महीध्वज ने वैसा ही व्रत किया। व्रत और उपवास के प्रभाव से उसे प्रेत योनि से छुटकारा मिला और पुन: दिव्य शरीर धारण कर अन्त में मोक्ष को प्राप्त हुआ।

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