जालसाजी का खेल: 100 करोड़ की ठगी कर चुका है रुद्रांश, ईडी ने की जांच तो कंपनी- नाम बदला
एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि पुलिस ने बैंक में जाकर सोमवार को जांच की है। रुद्रांश ने अपना, पिता और माता सभी का कई बार नाम बदलकर जालसाजी की है। रियाज की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस को जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य मिले हैं, जिसके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
विस्तार
फर्जी दस्तावेज पर आईसीआईसीआई बैंक से 4.45 करोड़ रुपये के ऋण मामले में जालसाजी करने वाले मास्टरमाइंड रुद्रांश पांडेय के बारे में पुलिस की पूछताछ में नई जानकारी सामने आई है। उसने पिता अष्टभुजा पांडेय के साथ मिलकर यूपी, बिहार, पंजाब और हरियाणा में ग्रामीण फाइनेंस कंपनी खोलकर 100 करोड़ रुपये की जालसाजी की थी। मामला पकड़े जाने पर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने जांच भी शुरू की तो राजेश ने अपना नाम बदलकर रुद्रांश पांडेय कर लिया और पिता का नाम भी बदल दिया था।
एक बार फिर उसने करोड़ों रुपये की ठगी करने की तैयारी कर ली थी। इसके लिए उसने एक फर्जी दस्तावेज पर फर्म का पंजीकरण भी करा लिया था, जिस पर अब काम भी शुरू करने वाला था, लेकिन इसके पहले ही दबोच लिया गया। मास्टरमाइंड से पूछताछ में पता चला है कि वह मां का नाम भी तीन बार बदल चुका है। अब पूरी गुत्थी को सुलझाने में पुलिस टीम लगी है।
हालांकि, उसके रियाज नाम के चालक की भूमिका अभी साफ नहीं हो पाई है कि वह इस गिरोह का सदस्य था। अभी तक जो पता चला है कि वह सिर्फ नौ हजार रुपये महीने की नौकरी करने के चक्कर में फंसा है। पुलिस उसके खाते का डिटेल खंगाल रही है, ताकि इसकी पुष्टि हो सके। पुलिस एक-एक बिंदु की गहराई से जांच कर रही है। रविवार को पुलिस ने मास्टरमाइंड रुद्रांश पांडेय को रिमांड पर लिया है। पुलिस उससे पूछताछ कर गुत्थी को सुलझाने में जुटी है।
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पता चला है कि उसने एक्सिस बैंक सहित दो अन्य बैंकाें से भी जालसाजी की है, लेकिन रकम एक करोड़ से कम होने की वजह से बैंक की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, इसी वजह से पुलिस सिर्फ अभी सामने आए प्रकरण की ही जांच कर रही है।
बैंक पहुंची पुलिस... असल गुनहगार की तलाश, सीए ने इन्कार किया
पुलिस की एक टीम सोमवार को आईसीआईसीआई बैंक भी पहुंची थी। पुलिस उन सभी की भूमिका की जांच कर रही है, जिसके टेबल से होकर चार करोड़ से अधिक रुपये के ऋण की फाइल होकर गुजरी थी। पुलिस उस असल गुनहगार तक पहुंचना चाहती है, जिसने बिना किसी सत्यापन के ही रुद्रांश पांडेय की फर्जी कंपनी को ऋण दे दिया है।
पुलिस बैंक जाकर सबके कामों को देखकर ये तय कर रही है कि किस स्तर से कितनी चूक हुई है, उसे आधार पर दोष तय किया जाएगा। पुलिस ने अपनी जांच तेज कर दी है। उधर, जांच के दायरे में आए सीए ने किसी भी प्रोजेक्ट को तैयार करने से इन्कार कर दिया है। अब सीए के नाम और मुहर का गलत इस्तेमाल हुआ है या सीए झूठ बोल रहे हैं, इसकी जांच पुलिस कर रही है।
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13 अक्तूबर 2021 में कानपुर पुलिस ने भी रुद्रांश पांडेय को गिरफ्तार किया था। तब सामने आया था कि उसने गोरखपुर की फाइनेंस कंपनी गैब ग्राम्य विकास क्रेडिट कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड बनाकर जालसाजी की थी। 100 करोड़ से अधिक की जालसाजी का मामला सामने आने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच शुरू कर दी थी। तब ईडी ने प्रदेश के कई जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर कंपनी के संचालकों की संपत्तियों का ब्योरा मांगा था, लेकिन रुद्रांश ने अपना नाम-पता ही बदल लिया। जब पकड़ा गया था तब अपना नाम राजेश और पता गोरखपुर का राप्तीनगर बताया था। लेकिन, असल पता बांसगांव है।
पुलिस की जांच में तब सामने आया था कि राप्तीनगर निवासी राजेश कुमार पांडेय और अष्टभुजा पांडेय ने गैब फाइनेंस कंपनी की शुरुआत की थी। कानपुर के गिरीश शर्मा कंपनी में चीफ जनरल मैनेजर थे। लखनऊ में हेड ऑफिस और अन्य प्रदेशों में इसकी शाखाएं खोली गई थीं। कंपनी भारत सरकार का उपक्रम बताकर धन दोगुना करने के नाम पर लोगों से कई योजनाओं में पैसा जमा करवाती थी। वर्ष 2017 में कंपनी अपने दफ्तर बंदकर भाग गई थी, जिसके बाद मामला खुला था।
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बस्ती के मुरलीजोत में रहने वाला रुद्रांश पांडेय अपनी मां अर्चना व पिता राजेश के साथ शाहपुर के राप्तीनगर,ग्रीन वैली में मकान बनवाकर रहता है। मई 2022 को अर्चना व उनके पति राजेश ने आईसीआईसी बैंक की मेडिकल काॅलेज रोड शाखा में होम लोन के लिए आवेदन किया। इसके लिए फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने के साथ ही दूसरे की भूमि को अपना बताकर 31 मई 2022 को 2 करोड़ रुपये लोन पास करा लिया।अगस्त 2022 में बालाजीपुरम राप्तीनगर में रहने वाले रियाज नाम के व्यक्ति ने होम लोन के लिए आवेदन किया।
खुद को भारतीय खाद्य निगम का ठेकेदार बताते हुए रियाज इंटरप्राइजेज के नाम से दस्तावेज प्रस्तुत किए।लोन पास कराने की पैरवी रुद्रांश कर रहा था।अगस्त में रियाज का भी 2.45 करोड़ रुपये होम लोन पास हो गया।तीन माह के बाद किस्त जमा न होने पर बैंक के अधिकारियों ने खोजबीन शुरू की तो पता चला कि फर्जी दस्तावेज पर रुद्रांश ने अपनी मां अर्चना व रियाज के नाम पर लोन कराया है। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर मुख्य आरोपी को जेल भेजा।
एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि पुलिस ने बैंक में जाकर सोमवार को जांच की है। रुद्रांश ने अपना, पिता और माता सभी का कई बार नाम बदलकर जालसाजी की है। रियाज की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस को जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य मिले हैं, जिसके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। गिरोह में शामिल सभी लोगों की जांच की जा रही है।