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सीबीएसई: दसवीं के गणित में इस खास विधि से मिलेंगे विद्यार्थियों को नंबर, बोर्ड ने दिया ये निर्देश
Sun, 20 Jun 2021 03:53 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 20 Jun 2021 03:53 PM IST
सार
स्टैंडर्ड मैथ के आधार पर तैयार होगा दसवीं के गणित का रिजल्ट। बोर्ड ने पिछले वर्ष की तरह नंबर प्रदान करने की दी छूट।
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सीबीएसई बोर्ड
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सीबीएसई ने गणित में शिक्षकों की उहापोह की स्थिति को समाप्त करते हुए पिछले साल की तरह ही स्टैंडर्ड मैथ के मुताबिक गणित में अंक देने का निर्देश दिया है। वर्ष- 2020 में सीबीएसई ने दसवीं के छात्रों को स्टैंडर्ड और बेसिक गणित में से एक का विकल्प चुनने का मौका दिया था।
दसवीं के रिजल्ट में बेसिक और स्टैंडर्ड गणित को मिलाकर औसत अंक निकालना है, लेकिन अगर किसी स्कूल के पास तीन साल का विकल्प नहीं है तो वे 2020 के फार्मूले के अनुसार ही अंक तैयार कर सकते हैं।
बोर्ड द्वारा दस बिंदुओं का प्रश्नोत्तर बनाकर स्कूलों को भेजा गया है। इसमें उन दिक्कतों का जवाब बोर्ड ने दिया है, जिसके कारण तमाम स्कूलों को गणित का रिजल्ट तैयार करने में परेशानी हो रही थी।
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पिछले वर्ष से दो गणित की पढ़ाई स्कूलों में हो रही थी। स्कूलों को बेसिक और स्टैंडर्ड गणित मिलाकर ऐसा अंक निकालना है बोर्ड द्वारा भेजे गए गए क्राइटेरिया का मिलान हो सके। इसमें स्टैंडर्ड मैथ को प्राथमिकता दी गई है।
सीबीएसई स्कूल अब इस नए निर्देश के अनुसार छात्रों को अंक देने में लगे हुए हैं। इधर अभिभावकों के सीबीएसई स्कूलों को आने लगे हैं। स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को समझा रहा है कि जो भी अच्छा ही होगा।
इस वर्ष छात्रों ने दोनों अलग-अलग परीक्षा फार्म भी भरा था। ऐसे छात्रों को आकलन करने में स्कूलों को दिक्कत तो होगी ही। स्कूलों को स्टैंडर्ड मैथ को प्राथमिकता देते हुए पिछले वर्ष की तरह ही अंकों को तैयार करना होगा। ताकि आगे उन्हें कोई परेशानी न हो।
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दसवीं के रिजल्ट में बेसिक और स्टैंडर्ड गणित को मिलाकर औसत अंक निकालना है, लेकिन अगर किसी स्कूल के पास तीन साल का विकल्प नहीं है तो वे 2020 के फार्मूले के अनुसार ही अंक तैयार कर सकते हैं।
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बोर्ड द्वारा दस बिंदुओं का प्रश्नोत्तर बनाकर स्कूलों को भेजा गया है। इसमें उन दिक्कतों का जवाब बोर्ड ने दिया है, जिसके कारण तमाम स्कूलों को गणित का रिजल्ट तैयार करने में परेशानी हो रही थी।
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पिछले वर्ष से दो गणित की पढ़ाई स्कूलों में हो रही थी। स्कूलों को बेसिक और स्टैंडर्ड गणित मिलाकर ऐसा अंक निकालना है बोर्ड द्वारा भेजे गए गए क्राइटेरिया का मिलान हो सके। इसमें स्टैंडर्ड मैथ को प्राथमिकता दी गई है।
सीबीएसई स्कूल अब इस नए निर्देश के अनुसार छात्रों को अंक देने में लगे हुए हैं। इधर अभिभावकों के सीबीएसई स्कूलों को आने लगे हैं। स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को समझा रहा है कि जो भी अच्छा ही होगा।
इस वर्ष छात्रों ने दोनों अलग-अलग परीक्षा फार्म भी भरा था। ऐसे छात्रों को आकलन करने में स्कूलों को दिक्कत तो होगी ही। स्कूलों को स्टैंडर्ड मैथ को प्राथमिकता देते हुए पिछले वर्ष की तरह ही अंकों को तैयार करना होगा। ताकि आगे उन्हें कोई परेशानी न हो।