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Noida News: यमुना प्राधिकरण दो महीने में शुरू करेगा बायोडायवर्सिटी पार्क का काम

Mon, 05 Oct 2026 08:39 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2026 08:39 PM IST
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Yamuna Authority Development
- सीईओ राकेश कुमार सिंह का कहना कि दिसंबर में इस प्राेजेक्ट पर शुरू होना काम
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण नोएडा इंटरनेशनल हवाई अड्डे के प्रभाव क्षेत्र में स्थित धनौरी वेटलैंड को बायोडायवर्सिटी पार्क के रूप में विकसित करने का काम दो महीने में शुरू करेगा। इस परियोजना के लिए पर्यावरण निदेशालय से अनापत्ति मिल चुकी है। यह पार्क पर्यावरण संरक्षण, शैक्षिक अनुभव और शोध के लिए महत्वपूर्ण सुविधाएं प्रदान करेगा।
सीईओ राकेश कुमार सिंह ने बताया कि राज्य पक्षी सारस के घर माने जाने वाले धनौरी वेटलैंड को बिना प्राकृतिक पर्यावास को नुकसान पहुंचाए बायोडायवर्सिटी पार्क के रूप में विकसित करने की योजना है। इस प्रोजेक्ट पर दिसंबर में काम शुरू कराया जाना है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से भी वेटलैंड के विकास के लिए कोई आपत्ति नहीं है। यह स्थल हवाई अड्डे के 10 किलोमीटर के दायरे से बाहर है, जिससे कोई पर्यावरणीय या अन्य कानूनी बाधा नहीं है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों का भी पालन किया जाएगा। धनौरी वेटलैंड में बायोडायवर्सिटी पार्क विकसित करने के लिए यमुना प्राधिकरण को पूर्व में ही पर्यावरण निदेशालय से आवश्यक अनुमति मिल गई है।
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अधिकारियों के मुताबिक यह बायोडायवर्सिटी पार्क करीब 112.89 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगा, जिसमें से 46.35 हेक्टेयर धनौरी वेटलैंड के रूप में चिह्नित है। प्राधिकरण ने इसकी व्यवहार्यता रिपोर्ट और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए सलाहकार के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पूरे क्षेत्र की दीर्घकालिक पर्यावरणीय संरक्षण योजना पर काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य जैव विविधता को प्रभावित किए बिना लोगों को प्रकृति से जोड़कर शैक्षिक अनुभव देना है।
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इनसेट-
मॉडर्न तरीके अपनाएगा यमुना प्राधिकरण
इस पार्क में वनस्पति और जीव तथा प्राकृतिक पर्यावास पर शोध करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए क्यूआर कोड आधारित साइनेज सिस्टम, सभी जानकारियां समेटे इंटरप्रिटेशन सेंटर, 3डी प्रदर्शनी गैलरी को यहां तैयार किया जाना है। इस बायोडायवर्सिटी पार्क की निगरानी डिजिटल डैशबोर्ड के जरिए रहेगी जिसमें प्राधिकरण एआई के उपयोग किए जाने को सुनिश्चित करेगा। एक एजूकेशन ट्रेल भी विकसित की जाएगी, जिससे विभिन्न शैक्षिक संस्थानों के बच्चे जानकारी जुटा सकेंगे। इसके लिए एक आगंतुक आवागमन योजना तैयार की जानी है। पार्क की निगरानी डिजिटल डैशबोर्ड के जरिये होगी, जिसमें प्राधिकरण कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग सुनिश्चित करेगा।

इनसेट-
प्राकृतिक आवास और जल प्रबंधन होगा महत्वपूर्ण
इस बायोडायवर्सिटी पार्क में स्थानीय वनस्पति और जीव के अलावा सारस जैसे पक्षियों का प्राकृतिक आवास बनाने पर भी काम होगा। यह पार्क प्रवासी पक्षियों के लिए भी एक पनाहगाह बनेगा। इस पार्क को इस तरह से विकसित किया जाएगा कि प्राकृतिक रूप से उपलब्ध चीजों का ही उपयोग हो। किसी भी कृत्रिम चीज के उपयोग को रोका जाएगा। झील में पानी की कमी न हो, इसके लिए सीवेज उपचार संयंत्र से निकलने वाले शोधित पानी को पाइपलाइन के जरिये यहां तक पहुंचाने की योजना है।
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