{"_id":"5bc6299bbdec22693b022ff0","slug":"171539713435-noida-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुनहना के ‘साहिब’ एनकाउंटर केस की अभी तक मजिस्ट्रेट जांच क्यों नहीं?","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
पुनहना के ‘साहिब’ एनकाउंटर केस की अभी तक मजिस्ट्रेट जांच क्यों नहीं?
Updated Tue, 16 Oct 2018 11:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
साहिब मुठभेड़ मामले में उठाए सवाल
पुन्हाना। मेवात के बहुचर्चित साहिब एनकाउंटर मामले की अभी तक मजिस्ट्रेट जांच नहीं कराए जाने पर साहिब के वकील असद हयात ने सरकार और प्रशासन पर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हर एनकाउंटर केस की मजिस्ट्रेट जांच अवश्य करने के सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए हुए हैं, फिर भी अभी तक मजिस्ट्रेट जांच शुरू नहीं की गई है।
हयात का कहना है कि साहिब हत्याकांड मामले को पुन्हाना पुलिस ने 7 अगस्त को मुकदमा नंबर 224 व 225 थाना पुन्हाना दर्ज किया था। मृतक साहिब के पिता शहीद खान की अलग से एफआईआर दर्ज न करके उनकी शिकायत को मुकदमा नंबर-225 के साथ ही जांच के लिए जोड़ दिया गया था।
वकील का कहना है कि रिपोर्ट में पुलिस की ओर से कहा गया है कि देहरादून पुलिस एक आरोपी को पकड़ने आई थी और थाना पुन्हाना पुलिस उसके सहयोगी के रूप में थी। पुलिस ने आरोपी के घर पर दबिश देकर आरोपी को पकड़ लिया, मगर वह उपस्थित लोगों की मदद से छूटकर जंगल की तरफ भागा। मगर पुलिस टीम ने उसे पकड़ लिया लेकिन फिर दोबारा स्थानीय लोगों की मदद मिलने पर वह छूटकर भाग गया। पुलिस का आरोप है कि इस बीच गांव वालों ने पुलिस पर फायरिंग की और पुलिस ने भी अपने बचाव में गोली चलाई।
विज्ञापन
- घटनास्थल पर पहले कौन-कौन पुलिस टीम पहुंची
असद हयात का कहना है कि साहिब हत्याकांड गहन जांच का विषय है, क्योंकि पुन्हाना पुलिस के एसआई जितेंद्र कुमार ने मुकदमा नंबर 224 दर्ज कराया है। इसके मुताबिक देहरादून पुलिस टीम में एसएसआई आशीष गुसाईं, एसआई रामेश्वर/परमेश्वर, एसआई सुमेश उनियाल, कांस्टेबल विपिन, कांस्टेबल सूरज सिंह, कांस्टेबल आशीष शर्मा, कांस्टेबल अमित कुमार, कांस्टेबिल का एक दल आया था। जिनकी सहायता हेतु थाना पुन्हाना से एसआई जितेंद्र के साथ एसआई धर्मेंद्र, हवलदार अमर सिंह, हवलदार जीत राम, कांस्टेबल महेंद्र सिंह कांस्टेबल जयवीर सिंह दादरी और कांस्टेबल अशोक कुमार गए। एडवोकेट का कहना है कि इसी रिपोर्ट में उल्लेख है कि सहायता के लिए फ़ोन करके पुन्हाना पुलिस के एसआई बच्चू सिंह, कांस्टेबल सुभाष, कांस्टेबल राजेश कुमार, एचजीएच इस्लामुद्दीन, एचजीएच जुनैद, एचजीएच जिले सिंह भी आ गए।
हयात के अनुसार, रिपोर्ट में उल्लेख है कि खेतों में जान बचाकर जब उत्तराखंड पुलिस और पुन्हाना पुलिस की पहली टीम (जो एसआई जितेंद्र के साथ आई थी) भाग रही थी तो गांव पटपड़बास के मकानों के पास एक आदमी घायल अवस्था में मिला, जिसे उठाकर अस्पताल में दाखिल कराया गया। एडवोकेट ने सवाल किया यानी पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, साहिब ने उत्तराखंड पुलिस और पुन्हाना पुलिस की टीम-एक पर कोई हमला नहीं किया था क्योंकि उसे घायल अवस्था में ऐसी जगह पाया गया जो पीछे की तरफ थी, जिस दिशा में मुंह करके ये पुलिस टीम भाग रही थीं, उसी तरफ साहिब को घायल पड़ा हुआ पाया गया, जिसके पास कोई हथियार नहीं पाया गया।
एडवोकेट का कहना है कि दूसरी एफआईआर नंबर-225 जो एसआई बच्चू सिंह ने लिखाई है, उसके अनुसार जब पुन्हाना पुलिस की बी टीम पहुंची तो उन्होंने घायल अवस्था में साहिब को पाया और ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराया।
- इन पुलिसकर्मियाें ने की थी गोलीबारी
वरिष्ठ अधिवक्ता असद हयात का कहना है कि मुकदमा नंबर-224 के मुताबिक घटनास्थल पर गोलीबारी उत्तराखंड पुलिस के एसआई परमेश्वर दत्त ने दो गोली, एसआई सुमेश उनियाल ने तीन गोली पिस्टल से, कांस्टेबल विपिन ने एके 47 से 3 राउंड व सूरज सिंह कांस्टेबल ने रिवाल्वर से दो गोली दागीं थी। पुन्हाना पुलिस के कांस्टेबल महेंद्र व जसबीर सिंह ने एसएलआर से हवाई फायर किए थे। हयात ने सवाल किया कि आखिर साहिब को किसने गोली मारी जबकि पुलिस ये स्वीकार नहीं करती कि उसकी गोली से साहिब की मृत्यु हुई है। उन्होंने कहा कि इन्हीं सब सवालों के जवाब के लिए मजिस्ट्रेट जांच होनी चाहिए।
- जल्द अदालत में याचिका दायर होगी
हयात का कहना है कि मजिस्ट्रेट की जांच कराने की मांग को लेकर जल्द ही न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी। मजिस्ट्रेट जांच के बाद ही साहिब के असली हत्यारे का पता लग सकेगा।
विज्ञापन
पुन्हाना। मेवात के बहुचर्चित साहिब एनकाउंटर मामले की अभी तक मजिस्ट्रेट जांच नहीं कराए जाने पर साहिब के वकील असद हयात ने सरकार और प्रशासन पर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हर एनकाउंटर केस की मजिस्ट्रेट जांच अवश्य करने के सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए हुए हैं, फिर भी अभी तक मजिस्ट्रेट जांच शुरू नहीं की गई है।
हयात का कहना है कि साहिब हत्याकांड मामले को पुन्हाना पुलिस ने 7 अगस्त को मुकदमा नंबर 224 व 225 थाना पुन्हाना दर्ज किया था। मृतक साहिब के पिता शहीद खान की अलग से एफआईआर दर्ज न करके उनकी शिकायत को मुकदमा नंबर-225 के साथ ही जांच के लिए जोड़ दिया गया था।
विज्ञापन
वकील का कहना है कि रिपोर्ट में पुलिस की ओर से कहा गया है कि देहरादून पुलिस एक आरोपी को पकड़ने आई थी और थाना पुन्हाना पुलिस उसके सहयोगी के रूप में थी। पुलिस ने आरोपी के घर पर दबिश देकर आरोपी को पकड़ लिया, मगर वह उपस्थित लोगों की मदद से छूटकर जंगल की तरफ भागा। मगर पुलिस टीम ने उसे पकड़ लिया लेकिन फिर दोबारा स्थानीय लोगों की मदद मिलने पर वह छूटकर भाग गया। पुलिस का आरोप है कि इस बीच गांव वालों ने पुलिस पर फायरिंग की और पुलिस ने भी अपने बचाव में गोली चलाई।
विज्ञापन
- घटनास्थल पर पहले कौन-कौन पुलिस टीम पहुंची
असद हयात का कहना है कि साहिब हत्याकांड गहन जांच का विषय है, क्योंकि पुन्हाना पुलिस के एसआई जितेंद्र कुमार ने मुकदमा नंबर 224 दर्ज कराया है। इसके मुताबिक देहरादून पुलिस टीम में एसएसआई आशीष गुसाईं, एसआई रामेश्वर/परमेश्वर, एसआई सुमेश उनियाल, कांस्टेबल विपिन, कांस्टेबल सूरज सिंह, कांस्टेबल आशीष शर्मा, कांस्टेबल अमित कुमार, कांस्टेबिल का एक दल आया था। जिनकी सहायता हेतु थाना पुन्हाना से एसआई जितेंद्र के साथ एसआई धर्मेंद्र, हवलदार अमर सिंह, हवलदार जीत राम, कांस्टेबल महेंद्र सिंह कांस्टेबल जयवीर सिंह दादरी और कांस्टेबल अशोक कुमार गए। एडवोकेट का कहना है कि इसी रिपोर्ट में उल्लेख है कि सहायता के लिए फ़ोन करके पुन्हाना पुलिस के एसआई बच्चू सिंह, कांस्टेबल सुभाष, कांस्टेबल राजेश कुमार, एचजीएच इस्लामुद्दीन, एचजीएच जुनैद, एचजीएच जिले सिंह भी आ गए।
हयात के अनुसार, रिपोर्ट में उल्लेख है कि खेतों में जान बचाकर जब उत्तराखंड पुलिस और पुन्हाना पुलिस की पहली टीम (जो एसआई जितेंद्र के साथ आई थी) भाग रही थी तो गांव पटपड़बास के मकानों के पास एक आदमी घायल अवस्था में मिला, जिसे उठाकर अस्पताल में दाखिल कराया गया। एडवोकेट ने सवाल किया यानी पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, साहिब ने उत्तराखंड पुलिस और पुन्हाना पुलिस की टीम-एक पर कोई हमला नहीं किया था क्योंकि उसे घायल अवस्था में ऐसी जगह पाया गया जो पीछे की तरफ थी, जिस दिशा में मुंह करके ये पुलिस टीम भाग रही थीं, उसी तरफ साहिब को घायल पड़ा हुआ पाया गया, जिसके पास कोई हथियार नहीं पाया गया।
एडवोकेट का कहना है कि दूसरी एफआईआर नंबर-225 जो एसआई बच्चू सिंह ने लिखाई है, उसके अनुसार जब पुन्हाना पुलिस की बी टीम पहुंची तो उन्होंने घायल अवस्था में साहिब को पाया और ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराया।
- इन पुलिसकर्मियाें ने की थी गोलीबारी
वरिष्ठ अधिवक्ता असद हयात का कहना है कि मुकदमा नंबर-224 के मुताबिक घटनास्थल पर गोलीबारी उत्तराखंड पुलिस के एसआई परमेश्वर दत्त ने दो गोली, एसआई सुमेश उनियाल ने तीन गोली पिस्टल से, कांस्टेबल विपिन ने एके 47 से 3 राउंड व सूरज सिंह कांस्टेबल ने रिवाल्वर से दो गोली दागीं थी। पुन्हाना पुलिस के कांस्टेबल महेंद्र व जसबीर सिंह ने एसएलआर से हवाई फायर किए थे। हयात ने सवाल किया कि आखिर साहिब को किसने गोली मारी जबकि पुलिस ये स्वीकार नहीं करती कि उसकी गोली से साहिब की मृत्यु हुई है। उन्होंने कहा कि इन्हीं सब सवालों के जवाब के लिए मजिस्ट्रेट जांच होनी चाहिए।
- जल्द अदालत में याचिका दायर होगी
हयात का कहना है कि मजिस्ट्रेट की जांच कराने की मांग को लेकर जल्द ही न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी। मजिस्ट्रेट जांच के बाद ही साहिब के असली हत्यारे का पता लग सकेगा।