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वन विभाग की कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे सोहनावासी
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सोहना। कस्बे में वन विभाग की कार्रवाई के खिलाफ सोहना के नागरिक एकजुट होने लगे हैं। लोगों ने उक्त मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है, जिसके तहत लोग अदालत में जनहित याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाएंगे। ताकि नागरिकों के वर्षों पुराने आशियानों को बचाया जा सके।
मालूम हो कि वन विभाग सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वन क्षेत्र की भूमि को चिन्हित करके अवैध कब्जाधारियों पर कार्रवाई करने में जुटा हुआ है। विभाग ने करीब 550 लिखित नोटिस जारी करके 7 दिनों के अंदर जवाब दाखिल करने के फरमान भी दिए हैं, जिसके चलते लोगों में हड़कंप व बेचैनी व्याप्त है। उक्त मामले को लेकर विरोध शुरू हो गया है। लोग पंचायत व बैठक कर रणनीति बनाने में लगे हैं। पीएलपीए कानून के अंतर्गत करीब दो दर्जन गांव आते हैं, जिसमें सोहना की भूमि 1257 एकड़ है।
उक्त कानून वर्ष 1900 का है, जिसमें पंचायतों ने भूमि पेड़ पौधे लगाने के लिए वन विभाग को दी थी। इसका सरकार द्वारा सन् 1970 में नोटिफिकेशन किया था, जिसकी अवधि 25 वर्ष थी। इसकी मियाद वर्ष 1995 में पूरी हो गई थी तथा भूमि पुन: मालिकों के पास आ गई थी।
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मालूम हो कि वन विभाग सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वन क्षेत्र की भूमि को चिन्हित करके अवैध कब्जाधारियों पर कार्रवाई करने में जुटा हुआ है। विभाग ने करीब 550 लिखित नोटिस जारी करके 7 दिनों के अंदर जवाब दाखिल करने के फरमान भी दिए हैं, जिसके चलते लोगों में हड़कंप व बेचैनी व्याप्त है। उक्त मामले को लेकर विरोध शुरू हो गया है। लोग पंचायत व बैठक कर रणनीति बनाने में लगे हैं। पीएलपीए कानून के अंतर्गत करीब दो दर्जन गांव आते हैं, जिसमें सोहना की भूमि 1257 एकड़ है।
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उक्त कानून वर्ष 1900 का है, जिसमें पंचायतों ने भूमि पेड़ पौधे लगाने के लिए वन विभाग को दी थी। इसका सरकार द्वारा सन् 1970 में नोटिफिकेशन किया था, जिसकी अवधि 25 वर्ष थी। इसकी मियाद वर्ष 1995 में पूरी हो गई थी तथा भूमि पुन: मालिकों के पास आ गई थी।
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