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Gurugram News: बाबा चौरंगीनाथ मंदिर में चार दिवसीय मेले का आगाज
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बाबा बिसाह भक्त पूरणमल बाबा चौरंगीनाथ मंदिर। संवाद
चीर बांधने के साथ हुई मेले की शुरुआत, मंदिर में झाड़ू और नमक चढ़ाने की है खास मान्यता
संवाद न्यूज एजेंसी
मानेसर। कासन गांव स्थित बाबा बिसाह भक्त पूरणमल बाबा चौरंगीनाथ मंदिर में मंगलवार से चार दिवसीय मेले की शुरुआत हो गई। सोमवार शाम को मंदिर में चीर बांधी गई। इसके बाद मंगलवार को गांव और आसपास के लोगों ने घरों से ध्वज लेकर मंदिर तक पैदल पहुंचकर ध्वज चढ़ाए। ध्वज चढ़ाने के साथ ही मेले की औपचारिक शुरुआत हुई। ग्रामीणों के अनुसार, मेले के पहले दिन आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। अगले तीन दिन तक देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने के लिए कासन पहुंचेंगे। मेले में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
कासन में स्थित यह मंदिर क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, जब बाबा काशी जा रहे थे, तब उन्होंने कासन गांव में रुककर विश्राम किया था। उस समय गांव के बिशन सिंह ने उनकी सेवा की थी। बाबा ने जाते समय कहा था कि उनके नाम से पहले बिशन सिंह के नाम की पूजा की जाएगी। इसके बाद से मंदिर का नाम बाबा बिसाह भक्त पूरणमल बाबा चौरंगीनाथ मंदिर पड़ा। ग्रामीण निवासी एडवोकेट विनौद चौहान, पार्षद भूपेंद्र, पूर्व सरंपच सतदेव शर्मा व विजय ने बताया कि मेले के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया जाता है। मंदिर में नियमित रूप से पूजा और आरती भी होती है। मेले के साथ विशाल कुश्ती दंगल भी आयोजित किया जाता है, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से पहलवान पहुंचते हैं। ग्रामीणों के अनुसार बाबा की जो मान्यता है व चौदस की है।
चर्म रोग दूर होने की मान्यता
मंदिर के पास एक तालाब बना हुआ है। ग्रामीणों की मान्यता है कि चर्म रोग से परेशान व्यक्ति यहां तालाब में स्नान करने से ठीक हो जाता है। बीमारी ठीक होने के बाद श्रद्धालु मंदिर में झाड़ू और नमक चढ़ाते हैं। इसी मान्यता के कारण मेले के दौरान बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर पूजा करते हैं और झाड़ू व नमक चढ़ाते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मानेसर। कासन गांव स्थित बाबा बिसाह भक्त पूरणमल बाबा चौरंगीनाथ मंदिर में मंगलवार से चार दिवसीय मेले की शुरुआत हो गई। सोमवार शाम को मंदिर में चीर बांधी गई। इसके बाद मंगलवार को गांव और आसपास के लोगों ने घरों से ध्वज लेकर मंदिर तक पैदल पहुंचकर ध्वज चढ़ाए। ध्वज चढ़ाने के साथ ही मेले की औपचारिक शुरुआत हुई। ग्रामीणों के अनुसार, मेले के पहले दिन आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। अगले तीन दिन तक देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने के लिए कासन पहुंचेंगे। मेले में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
कासन में स्थित यह मंदिर क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, जब बाबा काशी जा रहे थे, तब उन्होंने कासन गांव में रुककर विश्राम किया था। उस समय गांव के बिशन सिंह ने उनकी सेवा की थी। बाबा ने जाते समय कहा था कि उनके नाम से पहले बिशन सिंह के नाम की पूजा की जाएगी। इसके बाद से मंदिर का नाम बाबा बिसाह भक्त पूरणमल बाबा चौरंगीनाथ मंदिर पड़ा। ग्रामीण निवासी एडवोकेट विनौद चौहान, पार्षद भूपेंद्र, पूर्व सरंपच सतदेव शर्मा व विजय ने बताया कि मेले के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया जाता है। मंदिर में नियमित रूप से पूजा और आरती भी होती है। मेले के साथ विशाल कुश्ती दंगल भी आयोजित किया जाता है, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से पहलवान पहुंचते हैं। ग्रामीणों के अनुसार बाबा की जो मान्यता है व चौदस की है।
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चर्म रोग दूर होने की मान्यता
मंदिर के पास एक तालाब बना हुआ है। ग्रामीणों की मान्यता है कि चर्म रोग से परेशान व्यक्ति यहां तालाब में स्नान करने से ठीक हो जाता है। बीमारी ठीक होने के बाद श्रद्धालु मंदिर में झाड़ू और नमक चढ़ाते हैं। इसी मान्यता के कारण मेले के दौरान बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर पूजा करते हैं और झाड़ू व नमक चढ़ाते हैं।
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