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Gurugram News: नागरिक अस्पताल में व्यवस्था दे रही गच्चा, जच्चा-बच्चा का हाल नहीं अच्छा
Wed, 19 Jul 2023 12:12 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
Updated Wed, 19 Jul 2023 12:12 AM IST
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प्रसव के बाद एक ही बेड पर नवजातों के साथ भर्ती कर दी गई दो-दो प्रसूताएं
संसाधनों के अभाव से जूझ रहीं प्रसूता महिलाओं और तीमारदारों को हो रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में संसाधनों के अभाव से जूझ रहीं प्रसूता महिलाओं को एक बेड तक नसीब नहीं हो पा रहा है। मजबूरन प्रसव के बाद किसी अन्य महिला के साथ बेड शेयर करना पड़ता है। नागरिक अस्पताल के प्रसूता वार्ड में बेड की कमी के चलते एक ही बेड पर दो-दो जच्चा-बच्चा भर्ती करने पड़ रहे हैं। यह स्थिति मंगलवार को देखने को मिली। एक ही बेड पर दो-दो जच्चा-बच्चा भर्ती होने की वजह से महिलाओं के साथ ही उनके तीमारदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रसूति कक्ष में भर्ती महिलाओं ने बताया कि डिलीवरी के बाद उन्हें किसी अन्य महिला के साथ एक ही बेड पर लेटा दिया गया। वहीं बच्चे को संक्रमण का खतरा भी रहता है। बता दें कि प्रसव पीड़ा के बाद प्रसूता शारीरिक रूप से बिल्कुल कमजोर हो जाती हैं। ऐसी महिलाओं को 24 से 48 घंटे तक डॉक्टरों की देखरेख में रहने की अनिवार्यता होती है। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है महिलाओं को किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता होगा।
नागरिक अस्पताल में इन दिनों ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। यहां अस्पताल के महिला वार्ड में प्रत्येक बेड पर दो-दो महिलाओं को अपने नवजात बच्चों के साथ मजबूरी में लेटना पड़ रहा है। अस्पताल में बेड की कमी होने के चलते मरीजों के साथ ही तीमारदारों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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ये बोली महिलाएं
रविवार को देर रात डिलीवरी होने के बाद किसी अन्य महिला के साथ यहां लाकर लिटा दिया गया। बेड का साइज एक मरीज के हिसाब से है। ऐसे में एक बेड पर दो महिला और नवजात होने के चलते बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। - प्रीति, राजीव नगर
डिलीवरी के बाद हम महिलाएं शारीरिक रूप से बिल्कुल कमजोर हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में महिलाओं को आराम की जरूरत होती है। एक बेड पर दो लोग होने की वजह से हाथ पैर फैलाने में परेशानी हो रही है। - अनीता, मानेसर
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डाक्टर बोले:
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 35 डिलीवरी होती हैं। कभी-कभी ये संख्या और बढ़ जाती है। ऐसे में किसी भी प्रसूता को उनके बेड से हटाया नहीं जा सकता न ही किसी गर्भवती को लौटाया जा सकता है। इस स्थिति में कुछ समय के लिए दो-दो महिलाओं को एक बेड पर कर दिया जाता है। जैसे ही बेड खाली होता है तो दूसरी प्रसूता को उस बेड पर भेज दिया जाता है। - डॉ. मनीष राठी, चिकित्सा अधीक्षक
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संसाधनों के अभाव से जूझ रहीं प्रसूता महिलाओं और तीमारदारों को हो रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में संसाधनों के अभाव से जूझ रहीं प्रसूता महिलाओं को एक बेड तक नसीब नहीं हो पा रहा है। मजबूरन प्रसव के बाद किसी अन्य महिला के साथ बेड शेयर करना पड़ता है। नागरिक अस्पताल के प्रसूता वार्ड में बेड की कमी के चलते एक ही बेड पर दो-दो जच्चा-बच्चा भर्ती करने पड़ रहे हैं। यह स्थिति मंगलवार को देखने को मिली। एक ही बेड पर दो-दो जच्चा-बच्चा भर्ती होने की वजह से महिलाओं के साथ ही उनके तीमारदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रसूति कक्ष में भर्ती महिलाओं ने बताया कि डिलीवरी के बाद उन्हें किसी अन्य महिला के साथ एक ही बेड पर लेटा दिया गया। वहीं बच्चे को संक्रमण का खतरा भी रहता है। बता दें कि प्रसव पीड़ा के बाद प्रसूता शारीरिक रूप से बिल्कुल कमजोर हो जाती हैं। ऐसी महिलाओं को 24 से 48 घंटे तक डॉक्टरों की देखरेख में रहने की अनिवार्यता होती है। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है महिलाओं को किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता होगा।
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नागरिक अस्पताल में इन दिनों ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। यहां अस्पताल के महिला वार्ड में प्रत्येक बेड पर दो-दो महिलाओं को अपने नवजात बच्चों के साथ मजबूरी में लेटना पड़ रहा है। अस्पताल में बेड की कमी होने के चलते मरीजों के साथ ही तीमारदारों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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ये बोली महिलाएं
रविवार को देर रात डिलीवरी होने के बाद किसी अन्य महिला के साथ यहां लाकर लिटा दिया गया। बेड का साइज एक मरीज के हिसाब से है। ऐसे में एक बेड पर दो महिला और नवजात होने के चलते बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। - प्रीति, राजीव नगर
डिलीवरी के बाद हम महिलाएं शारीरिक रूप से बिल्कुल कमजोर हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में महिलाओं को आराम की जरूरत होती है। एक बेड पर दो लोग होने की वजह से हाथ पैर फैलाने में परेशानी हो रही है। - अनीता, मानेसर
डाक्टर बोले:
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 35 डिलीवरी होती हैं। कभी-कभी ये संख्या और बढ़ जाती है। ऐसे में किसी भी प्रसूता को उनके बेड से हटाया नहीं जा सकता न ही किसी गर्भवती को लौटाया जा सकता है। इस स्थिति में कुछ समय के लिए दो-दो महिलाओं को एक बेड पर कर दिया जाता है। जैसे ही बेड खाली होता है तो दूसरी प्रसूता को उस बेड पर भेज दिया जाता है। - डॉ. मनीष राठी, चिकित्सा अधीक्षक