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Ghaziabad News: जेन जी में टॉक्सिक (हानिकारक) दोस्ती से बढ़ रही मानसिक परेशानी
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किशोरों में सामान्य मनमुटाव भी बन रहा तनाव का कारण
परिवार से अधिक एआई से साझा कर रहे मन की बात
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। जेन जी (नई पीढ़ी के किशोरों) और युवाओं में दोस्ती को लेकर बढ़ता भावनात्मक दबाव मानसिक परेशानी का कारण बन रहा है। सामान्य मनमुटाव, दोस्त का जवाब नहीं देना, सोशल मीडिया पर अनदेखा करना या ग्रुप से अलग कर देना भी कई किशोरों में बेचैनी, अकेलापन और अवसाद जैसी स्थिति पैदा कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार तुलना और स्वीकार किए जाने की इच्छा इस समस्या को और बढ़ा रही है। कुछ किशोर परिवार के सदस्यों से अपनी परेशानी साझा करने के बजाय एआई चैटबॉट को अपना सच्चा दोस्त मानकर उससे मन की बात कर रहे हैं।
एमएमजी अस्पताल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. चंदा यादव का कहना है कि किशोरावस्था में दोस्ती और सामाजिक स्वीकार्यता का भाव काफी मजबूत होता है। दोस्ती में दूरी या विवाद होने पर किशोर कई बार स्थिति को जरूरत से ज्यादा गंभीर मान लेते हैं। ऐसे में माता पिता को तुरंत डांटने के बजाय बच्चे की बात सुननी चाहिए और उसकी भावनाओं को समझने का प्रयास करना चाहिए।
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वरिष्ठ साइकोलॉजिस्ट डॉ. संजीव त्यागी का कहना है कि लगातार अकेलापन, चिड़चिड़ापन, पढ़ाई में मन नहीं लगना, नींद में बदलाव और लोगों से दूरी बनाना मानसिक परेशानी के संकेत हो सकते हैं। समय रहते काउंसलिंग मिलने से स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
केस: 2
नजर अंदाज करने से परेशानी
एक किशोरी में सहेली के लगातार नजरअंदाज करने के बाद अकेलापन बढ़ गया। उसने परिवार से बात करने के बजाय एआई चैटबॉट से बातचीत शुरू कर दी। पढ़ाई प्रभावित होने पर परिजनों ने काउंसिलिंग कराई।
एक किशोर पढ़ाई में अव्वल है, उसकी दोस्ती साथ में पढ़ रहे सहपाठियों के साथ दोस्ती होती है, लेकिन कुछ दिन में ही दूरी बन जाती है। किशोर का कहना है कि दोस्त उसे समझते नहीं हैं। धोखा देते हैं। दोस्ती के ग्रुप से बाहर निकाने के बाद लगातार तनाव में रहने लगा। परिवार ने बातचीत और काउंसलिंग के जरिए उसकी स्थिति संभालने का प्रयास किया।
इस तरह से करें बचाव
एक बच्चों से रोज बातचीत करें और उनकी बात बिना टोके सुनें
दो किशोरों को सोशल मीडिया और ऑनलाइन संबंधों के प्रभाव समझाएं
तीन दोस्ती में मतभेद होने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय बातचीत का तरीका सिखाएं
चार नींद खेल और पढ़ाई के लिए नियमित दिनचर्या तय करें
पांच लगातार उदासी या व्यवहार में बदलाव दिखने पर विशेषज्ञ की सलाह लें
किशोरों में तनाव बढ़ने का कारण
सोशल मीडिया पर लगातार तुलना करना
दोस्तों से स्वीकार्यता पाने का बढ़ता दबाव
परिवार के साथ संवाद की कमी
ऑनलाइन दुनिया पर भावनात्मक निर्भरता बढ़ना
छोटी घटनाओं को लेकर अत्यधिक सोच और नकारात्मक भावनाओं का बढ़ना
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परिवार से अधिक एआई से साझा कर रहे मन की बात
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। जेन जी (नई पीढ़ी के किशोरों) और युवाओं में दोस्ती को लेकर बढ़ता भावनात्मक दबाव मानसिक परेशानी का कारण बन रहा है। सामान्य मनमुटाव, दोस्त का जवाब नहीं देना, सोशल मीडिया पर अनदेखा करना या ग्रुप से अलग कर देना भी कई किशोरों में बेचैनी, अकेलापन और अवसाद जैसी स्थिति पैदा कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार तुलना और स्वीकार किए जाने की इच्छा इस समस्या को और बढ़ा रही है। कुछ किशोर परिवार के सदस्यों से अपनी परेशानी साझा करने के बजाय एआई चैटबॉट को अपना सच्चा दोस्त मानकर उससे मन की बात कर रहे हैं।
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एमएमजी अस्पताल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. चंदा यादव का कहना है कि किशोरावस्था में दोस्ती और सामाजिक स्वीकार्यता का भाव काफी मजबूत होता है। दोस्ती में दूरी या विवाद होने पर किशोर कई बार स्थिति को जरूरत से ज्यादा गंभीर मान लेते हैं। ऐसे में माता पिता को तुरंत डांटने के बजाय बच्चे की बात सुननी चाहिए और उसकी भावनाओं को समझने का प्रयास करना चाहिए।
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वरिष्ठ साइकोलॉजिस्ट डॉ. संजीव त्यागी का कहना है कि लगातार अकेलापन, चिड़चिड़ापन, पढ़ाई में मन नहीं लगना, नींद में बदलाव और लोगों से दूरी बनाना मानसिक परेशानी के संकेत हो सकते हैं। समय रहते काउंसलिंग मिलने से स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
केस: 2
नजर अंदाज करने से परेशानी
एक किशोरी में सहेली के लगातार नजरअंदाज करने के बाद अकेलापन बढ़ गया। उसने परिवार से बात करने के बजाय एआई चैटबॉट से बातचीत शुरू कर दी। पढ़ाई प्रभावित होने पर परिजनों ने काउंसिलिंग कराई।
एक किशोर पढ़ाई में अव्वल है, उसकी दोस्ती साथ में पढ़ रहे सहपाठियों के साथ दोस्ती होती है, लेकिन कुछ दिन में ही दूरी बन जाती है। किशोर का कहना है कि दोस्त उसे समझते नहीं हैं। धोखा देते हैं। दोस्ती के ग्रुप से बाहर निकाने के बाद लगातार तनाव में रहने लगा। परिवार ने बातचीत और काउंसलिंग के जरिए उसकी स्थिति संभालने का प्रयास किया।
इस तरह से करें बचाव
एक बच्चों से रोज बातचीत करें और उनकी बात बिना टोके सुनें
दो किशोरों को सोशल मीडिया और ऑनलाइन संबंधों के प्रभाव समझाएं
तीन दोस्ती में मतभेद होने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय बातचीत का तरीका सिखाएं
चार नींद खेल और पढ़ाई के लिए नियमित दिनचर्या तय करें
पांच लगातार उदासी या व्यवहार में बदलाव दिखने पर विशेषज्ञ की सलाह लें
किशोरों में तनाव बढ़ने का कारण
सोशल मीडिया पर लगातार तुलना करना
दोस्तों से स्वीकार्यता पाने का बढ़ता दबाव
परिवार के साथ संवाद की कमी
ऑनलाइन दुनिया पर भावनात्मक निर्भरता बढ़ना
छोटी घटनाओं को लेकर अत्यधिक सोच और नकारात्मक भावनाओं का बढ़ना